Maharashtra assembly election: क्या शिवसेना भाजपा की 106 सीटों की पेशकश मानेगी
बेंगलुरु। चुनाव आयोग जल्द ही महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की तारीख घोषित कर सकता है। लेकिन अभी महाराष्ट्र की बड़ी पार्टी शिवासेना भारतीय जनता पार्टी के साथ विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारें को लेकर उहापोह की स्थिति में हैं। वर्तमान में पार्टी बड़ी दुविधा के दौर से गुजर रही हैं।

शिवसेना भाजपा के नेतृत्व में महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए सीट शेयरिंग डील के तहत विधासभा की कुल 288 सीट में से 120 से अधिक सीटें नहीं देना चाहती। जबकि महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी ने राज्य में अपने सहयोगी पार्टी शिवसेना को 106 सीटों की पेशकश की है। राजनतिक मान रहे हैं कि शिवसेना 120 सीट से कम में आसानी से मानने वाली नहीं हैं।

भाजपा अध्यक्ष्य और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह शिव सेना के नेताओं को कहा है कि विधानसभा चुनावों के लिए सीट शेयरिंग को लेकर समझौते का फैसला महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस करेंगे। उन्होंने साफ किया हैं कि इसमें हाईकमान की कोई भूमिका नहीं रहेगी।

ऐसी में स्थिति में दुविधा में पड़ी निराश शिवसेना प्रमुख ने अब चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर को हायर किया है। पिछले दिनों किशोर ने मुम्बई में ठाकरे से मुलाकात की थी जिसमें साथ मिलकर काम करने का फैसला लिया गया था। किशोर शिवसेना के सांसदों से भी मिले थे। जिन्हें ठाकरे ने इस बैठक में बुलाया था।
यह पहली बार है कि शिवसेना जनता का जनता का मूड भांपने के लिए अपनी यूनियन, स्थानीय लोकधिकार समिति तथा यूथ विंग सुवा सेना पर निर्भर रहती थी।
हालांकि शिव सेना ने लोकसभा चुनावों के दौरान भी किशोर से सलाह ली थी लेकिन उस दौरान उनकी कोई विशेष भूमिका नहीं रही थी। मगर किशोर हर उस व्यक्ति की मदद के लिए तैयार रहते हैं जो उनकी सेवाएं लेना चाहता है। चाहे वो नीतिश कुमार हों या ममता बनर्जी, अमरेन्द्र सिहं हो या फिर उद्धव ठाकरे क्यों न हो।
भाजपा द्वारा उसे 120 से अधिक सीटों की पेशकश न करने की स्थिति में वह अकेली नहीं पड़ना चाहती। भाजपा तो सेना शिवसेना को उपमुख्यमंत्री का पद देने के मूड में नहीं दिख रही हैं। बहरहाल किशोर शिवसेना प्रमुख को किशोर यह भी सलाह दे रहे हैं कि उनक बेटे आदित्य ठाकरे को चुनाव लड़ना अथवा कुछ और समय का इंतजार करना चाहिए।

याद रहें कि लोकसभा चुनाव 2019 से पहले भाजपा और शिवसेना के वरिष्ठ नेताओं के बीच बातचीत हुई थी तो शिव सेना के नेताओं को 50:50 प्रतिशत सीटों के बंटवारे का वादा किया गया था। इस समझौते के तहत सेना ने लोकसभा की 23 जबकि भाजपा ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा। उस समय यह यह बात उठी थी कि भाजपा केन्द्र में शिवसेना के बड़े भाई की भूमिका में रहेगी। जबकि राज्य में सेना को मुख्य स्थान दिया जाएगा।
अनौपचारिक तौर पर इस बात पर भी चर्चा हुई थी कि फिफ्टी फिफ्टी सीटों के बंटवारों की डील के तहत जो भी पार्टी विधानसभा चुनावों में ज्यादा सीटें जीतेगी उसी पार्टी को मुख्यमंत्री का पद मिलेगा लेकिन लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद सबकुछ बदल गया।
भाजपा अध्यक्ष्य और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह शिव सेना के नेताओं को कहा है कि विधानसभा चुनावों के लिए सीट शेयरिंग को लेकर समझौते का फैसला महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस करेंगे। उन्होंने साफ किया हैं कि इसमें हाईकमान की कोई भूमिका नहीं रहेगी।

बता दें विधानसभा में कुल 288 सीट है। पिछली बार के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने अलग अलग चुनाव लड़ा था। उन्होंने बताया कि एक अन्य सहयोगी जन सुराज्य शक्ति पार्टी ने चार सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमति जता दी है।
सूत्रों ने बताया कि, पश्चिमी महाराष्ट्र में मजबूत पकड़ रखने वाली पार्टी ने शुरूआत में नौ सीटों की मांग की थी लेकिन बाद में इसके नेता विनय कोरे ने बुधवार को बातचीत में चार सीटों पर सहमति जता दी ।
गौरतलब हैं कि बीजेपी राज्य में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की अगुवाई वाली रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया, शिव संग्राम तथा राष्ट्रीय समाज पार्टी के साथ सीटों के बंटबारे को लेकर बातचीत कर रही है । तीनों राजनीतिक दलों ने भाजपा के चुनाव चिह्न पर उनके उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
महाराष्ट्र में 2014 में हुए विधानसभा चुनावों में इन राजनीतिक दलों ने अलग अलग चुनाव लड़ा था लेकिन बाद में एक साथ आ गए थे । भाजपा ने 122 सीटों पर जबकि शिवसेना ने 63 सीटों पर जीत हासिल की थी ।
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