शत्रुधन सिन्हा क्यों दूर रहे मोदी सरकार के जश्न से
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) बिहारी बाबू यानी शत्रुधन सिन्हा केन्द्र की एनडीए सरकार के सत्तासीन होने के मंगलवार को एक साल पूरे होने पर हो रहे देश-व्यापी जश्न से दूर रहे।
जाहिर है, इसके चलते भाजपा के अंदर और बाहर बहुत से लोग हैरत में है। वे लंबे समय से भाजपा के सबसे लोकप्रिय स्टार प्रचारक रहे हैं। उनका इस अवसर पर गायब रहना किसी को समझ नहीं आ रहा।
पीएम से लेकर शाह तक
एनडीए सरकार के तमाम मंत्री और दूसरे नेता देश व्यापी दौरे करके अपनी एक साल की उपलब्धियों को बात रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर भाजपा प्रमुख अमित शाह देशभर में प्रेस से मिल रहे है। जनसभाएं कर रहे हैं। संपादकों से बात कर रहे हैं। पर इस मौके पर शत्रुधन सिन्हा का कहीं न होना संकेत देता है कि बिहारी बाबू पार्टी से नाराज है।
संसद में कम दिखे
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और सांसद ने मंगलवार को वन इंडिया को बताया कि उन्हें भी शत्रुधन सिन्हा के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वे कहां है, किसी को लगता है मालूम नहीं। वे बीते संसद सत्र में भी कम ही दिखे।
कैबिनेट में नहीं लिया
जानकारों का कहना है शत्रुध्न सिन्हा पार्टी आला कमान से नाराज हैं। उनकी नारजगी की वजह ये है कि उहें कैबिनेट मंत्री के लायक नहीं समझा गया। कहते हैं कि उन्होंने अपने कुछ करीबियों से कहा भी है कि वे 1977 से जेपी आंदोलन के दौर में राजनीति में आए थे। वे भाजपा के भी सिनियर लीडर हैं।
इसके बावजूद उनका पार्टी ने सम्मान नहीं किया। हालांकि कुछ जानकार कह रहे हैं कि शत्रुधन सिन्हा के प्रधानमंत्री मोदी से मधुर संबंध हैं। मोदी मुंबई में कुछ समय पहले शत्रु के पुत्र के विवाह समारोह में गए भी थे।
हालांकि जानकारों को शत्रु के साथ-साथ गुरदासपुर से पार्टी सांसद विनोद खन्ना और दिल्ली से भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार मनोज तिवारी के भी इस अवसर पर गायब होने पर हौरानी है।













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