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मुसलमानों ने कश्मीरी पंडितों को सौंपी इस प्राचीन धार्मिक स्थल की जमीन, POK से 500 मीटर दूर मंदिर में दिखी रौनक

नई दिल्ली, 31 मार्च। 'द कश्मीर फाइल्स' (The Kashmir Files) फिल्म के बाद कश्मीरी पंडितों को लेकर एक बार फिर से चर्चा जोरों पर है। फिल्म की राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से फिल्म को लेकर अलग- अलग तरीके की तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इन सब के बीच 1947 में बंटवारे के बाद वीरान पड़े एक प्राचीन हिंदू धार्मिक स्थल में काफी चहल पहल देखी जा रही है।

Sharda Peeth Temple

दरअसल, जम्मू-कश्मीर में महज 500 मीटर की दूरी पर एक मस्जिद के साथ एक प्राचीन मंदिर और गुरुद्वारा का निर्माण किया जा रहा है। यह भारत में भाईचारे की अनोखी मिसाल है। शारदा पीठ मंदिर (Sharda Peeth Temple) के निर्माण को लेकर दिसंबर 2021 में पारंपरिक रूप से पूजन अर्चन का अनुष्ठान किया गया।

कश्मीरी पंडितों और आदि शंकराचार्य के अनुयायियों के लिए शारदा पीठ सर्वोच्च तीर्थ स्थान है। यह POK के शारदा जिले में है। मंदिर के साथ ही शारदा पीठ को दुनिया के सबसे पुराने और प्राचीन विश्वविद्यालयों में से एक माना जाता है। वर्ष 947 तक एक वार्षिक तीर्थ के रूप में जाना जाता था। इस पीठ के लिए पिछले 15 साल से संघर्ष करने वाली समित बचाओ शारदा पीठ के सदस्यों की मानें तो यह पहले बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक तीर्थ स्थल था। बाद में आदि शंकराचार्य ने वहां सनातन धर्म की परंपराओं का आगे बढ़ाया। समिति शारदा पीठ की वार्षिक यात्रा फिर से शुरू करने की मांग कर रही है। समिति भारत और पाकिस्तान के बीच तीर्थाटन की भी मांग कर रही है।

जम्मू-कश्मीर के टिटवाल गांव में पीओके से महज 500 मीटर की दूरी पर एक मस्जिद के साथ एक प्राचीन मंदिर और गुरुद्वारा का निर्माण किया जा रहा है। यह भारत में भाईचारे की अनोखी मिसाल है। शारदा पीठ के निर्माण को लेकर दिसंबर 2021 में पारंपरिक रूप से पूजन अर्चन का अनुष्ठान किया गया। जिसके बाद गुरुवार को एलओसी के तंगदार सेक्टर टेटवाल गांव में शारदा मंदिर के पुनर्निर्माका शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया।

इस प्राचीन मंदिर शारदा पीठ मंदिर (Sharda Peeth Temple) और उसके पास स्थित गुरुद्वारा क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसके बाद से यह वीरान पड़ा था। एलओसी के पास इलाके के मुस्लिम आबादी अधिक है। हलांकि उन्होंने शारदा पीठ के जमीन पर कोई अतिक्रमण नहीं किया था। वर्ष 2021 में वार्षिक शारदा पीठ यात्रा और पूजा के लिए नीलम नदी पहुंचने पर ग्रामीणों ने यह जमीन कश्मीरी पंडितों को सौंप दी थी।

मंदिर की भूमि पर पारंपरिक पूजा के बाद पीठ के जीर्णोद्धार के लिए गठित समिति ने एक मंदिर कार्य शुरू कर दिया है। बता दें कि इस समिति में तीन स्थानीय मुस्लिम, एक सिख और कश्मीरी पंडित शामिल हैं।जम्मू-कश्मीर के टिटवाल गांव में पीओके से महज 500 मीटर की दूरी पर एक मस्जिद के साथ एक प्राचीन मंदिर और गुरुद्वारा का निर्माण किया जा रहा है। यह भारत में भाईचारे की अनोखी मिसाल है। शारदा पीठ के निर्माण को लेकर दिसंबर 2021 में पारंपरिक रूप से पूजन अर्चन का अनुष्ठान किया गया।

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