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Sharad Yadav : समाजवादी सियासत के पुरोधा चिरनिद्रा में सोए, जानिए मूल्यों की राजनीति में कैसे बनाई पहचान

Sharad Yadav का निधन गुरुग्राम के अस्पताल में हुआ। जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष और सात बार के सांसद शरद यादव ने 75 साल की आयु में अंतिम सांस ली। जानिए कैसा रहा उनका करियर

sharad yadav

Sharad Yadav का 75 साल की आयु में हरियाणा के गुरुग्राम में एक अस्पताल में निधन हो गया। 27 साल की आयु में पहली बार चुनाव जीतने वाले शरद यादव कमाल के राजनेता रहे। तीन राज्यों से लोक सभा चुनाव जीतने वाले शरद यादव की छवि जायंट किलर की रहे। शरद यादव की बेटी सुभासिनी ने ट्वीट कर उनके निधन की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी समेत तमाम लोगों ने शरद यादव के निधन पर शोक जताया। कभी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के संयोजक रहे शरद यादव राममनोहर लोहिया से प्रेरित और समाजवाद के पुरोधा माने जाते हैं। जानिए कैसा था शरद यादव का सियासी व्यक्तित्व-

खामोश हुई वंचित तबके की आवाज

खामोश हुई वंचित तबके की आवाज

शरद यादव भले ही मध्य प्रदेश में जन्मे लेकिन पूरे जीवन में उनकी कर्मभूमि बिहार बनी। चुनाव के लिए हमेशा तैयार माने जाने वाले शरद यादव का सियासी सफर जय प्रकाश नारायण के मार्गदर्शन में शुरू हुआ। बिहार की मधेपुरा सीट से चार बार सांसद बन चुके शरद यादव शोषित और वंचित तबके की आवाज बुलंद करने के पैरोकार थे। जीवन के अंतिम दिनों में लालू के साथ आने वाले शरद यादव ने कभी उन्हें मधेपुरा सीट से सियासी पटखनी भी दी थी।

शरद यादव राजद में शामिल हुए

शरद यादव राजद में शामिल हुए

समाजवादी विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले शरद यादव ने 1974 में राजनीतिक सफर शुरू किया। ब्राह्मण और अपर क्लास की धौंस वाली राजनीति को बड़ी चुनौती देने वाले शरद यादव अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। जनता दल यूनाइटेड से अलग होने के बाद 2018 में उन्होंने अलग पार्टी का गठन किया। बाद में शरद यादव बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में शामिल हो गए।

CM नीतीश के राजनीतिक गुरु शरद यादव

CM नीतीश के राजनीतिक गुरु शरद यादव

  • एक जुलाई, 1947 को होशंगाबाद में जन्म हुआ।
  • बिहार के मधेपुरा से 4 बार लोक सभा सांसद बने।
  • 1997 में जनता दल के अध्यक्ष बने।
  • जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष रहे।
  • 1974 में पहली बार सांसद बने।
  • CM नीतीश कुमार के राजनीतिक गुरु माने गए।
  • बाद में नीतीश से मतभेद, जदयू से अलग हुए।
  • 2014 में राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए।
  • पूरे करियर में सात बार सांसद निर्वाचित हुए।
  • बिहार, एमपी और उत्तर प्रदेश से निर्वाचित होकर संसद पहुंचे शरद यादव।
  • हवाला कांड में नाम आने पर इस्तीफा देना पड़ा।
पूर्वोत्तर भारत के मुद्दों पर शरद का स्टैंड

पूर्वोत्तर भारत के मुद्दों पर शरद का स्टैंड

पूर्वोत्तर भारत में आदिवासी लोगों के मुद्दों पर आवाज बुलंद करने वाले शरद यादव ने केंद्र सरकार और राज्यपाल के नियंत्रण पर ऐतराज जताया था। उन्होंने राज्य सभा में एक संबोधन के दौरान संविधान की छठी और सातवीं अनुसूची, पहाड़ी इलाकों से जुड़े विषयों पर प्रस्तावों को लंबे समय तक ठंडे बस्ते में डालने के रवैये को लेकर शरद ने सरकार की तीखी आलोचना की थी। संसद के सदस्य बनने के बाद वाम दलों के साथ भी शरद यादव ने हमेशा संवाद कायम रखा। जॉर्ज फर्नांडिस जैसे नेताओं के साथ जुड़े रहे शरद यादव की बातों में ग्रामीण भारत, खेती-किसानी और मजदूरों से जुड़ी चिंताएं झलकती थीं।

 शरद यादव कांग्रेस के साथ भी जुड़े

शरद यादव कांग्रेस के साथ भी जुड़े

जनता दल यूनाइटेड (JDU) के पूर्व अध्यक्ष Sharad Yadav का 75 साल की आयु में निधन होने के बाद उनसे जुड़ी यादों को शेयर करते हुए कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने बताया कि सैद्धांतिक राजनीति करने वाले शरद यादव ने संसद की सदस्यता गंवाने में भी कोई देर नहीं की। उन्होंने बताया कि शरद यादव के मित्र अधिक थे। उनके आलोचक कम मिलेंगे। साझी विरासत का आंदोलन शुरू करने के मामले में भी आनंद शर्मा को शरद यादव का मार्गदर्शन मिला।

संसद में 'परकटी महिला' पर विवाद

संसद में 'परकटी महिला' पर विवाद

जय प्रकाश नारायण के साथ सियासी सफर शुरू करने वाले शरद यादव उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, राम मनोहर लोहिया, मधु लिमये समेत कई राजनीतिक दलों के साथ भी खड़े दिखाई दिए। Sharad Yadav का संसदीय रिकॉर्ड युवाओं के लिए भी काफी प्रेरक माने जाते हैं। महिला आरक्षण के मुद्दे पर संसद में बहस के दौरान जब शरद यादव ने 2008-09 में 'परकटी महिला' शब्द का इस्तेमाल किया तो काफी विवाद हुआ। हालांकि, शरद यादव अपने बयान पर कायम रहे।

 शरद यादव और मंडल कमीशन का दौर

शरद यादव और मंडल कमीशन का दौर

बिहार के पूर्व सांसद पप्पू यादव ने शरद यादव को देश प्रेम सबसे ऊपर रखने वाला किरदार करार दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए लड़ने वाले नेताओं को शरद यादव ने हमेशा सहयोग प्रदान किया। पप्पू यादव ने मंडल कमीशन के फैसलों के दौर में भी शरद यादव की अहम भूमिका बताई। उन्होंने कहा कि नैतिक बल शरद यादव के साथ हमेशा बना रहा। इसलिए उन्होंने कभी भी समझौता नहीं किया। उनके निधन के साथ सामाजिक न्याय की मुहिम को धक्का लगेगा।

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