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'समलैंगिक थे' शकुंतला देवी के पति, 'ह्यूमन कंप्यूटर' ने 18 जून को किया था बड़ा कमाल

नई दिल्ली, 18 जून। गणित के कठिन से कठिन सवालों को मिनटों में जुबानी सुलझाने वाली शकुंतला देवी को जीनयस, निडर महिला, कुशल लेखिका और मुखर वक्ता के रूप में जाना जाता है। शकुंतला देवी का कौशल तब लोगों के सामने आया, जब देश की बहुत सारी महिलाएं और लड़कियां शिक्षित ही नहीं होती थीं, यूं तो शकुंतला देवी अपनी तीव्र बुद्धि के लिए जानी जाती हैं लेकिन लोग उन्हें 'वर्ल्ड ऑफ होमोसेक्शुल्स' किताब के लिए भी याद करते हैं।

 'समलैंगिक थे' शकुंतला देवी के पति परितोष बनर्जी

'समलैंगिक थे' शकुंतला देवी के पति परितोष बनर्जी

ये किताब साल 1977 में प्रकाशित हुई थी और उस दौर में सामने आई जब लोग 'होमोसेक्शुएलिटी' पर खुलकर बातें नहीं करते थे, बल्कि इस विषय पर बात करने वाले लोगों को घृणित और अपराधी के तौर पर देखा करते थे, कहते हैं कि शकुंतला देवी को इस विषय पर किताब लिखने का विचार इसलिए आया क्योंकि उनके पति परितोष बनर्जी, जो कि पेशे से तो आईएएस ऑफिसर थे, लेकिन असल जीवन में होमोसेक्शुल्स यानी कि 'समलैंगिक' थे।

साल 1979 में पति से हुआ तलाक

साल 1979 में पति से हुआ तलाक

शकुंतला देवी ने नजदीक से इस रिलेशनशिप को देखा और समझा था और इसी वजह से वो शायद उस बोल्ड सब्जेक्ट को कलमबद्ध कर पाईं थीं, यहीं नहीं शकुंतला ने डॉक्यूमेंट्री फोर स्ट्रेटस ओनली में एक समलैंगिक शख्स के साथ शादी के अनुभवों को भी साझा किया था। मालूम हो कि शकुंतला देवी साल 1960 में वापस इंडिया आ गई थीं और यहां आकर उन्होंने परितोष बनर्जी से विवाह किया था लेकिन साल 1979 में उन्होंने अपने पति से तलाक ले लिया था।

कैल्कुलेशन रोड शो से हुईं लोकप्रिय

कैल्कुलेशन रोड शो से हुईं लोकप्रिय

मालूम हो कि शकुंतला देवी का जन्म 4 नवंबर 1929 को भारत के शहर बंगलूरू में एक धार्मिक कन्नड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ था, उनके पिता सर्कस में ट्रैपीज आर्टिस्ट थे, जब शकुंतला मात्र 3 साल की थीं, तब उनके पिता को एहसास हुआ कि उनकी बेटी को नंबर्स फटाफट याद होते हैं, इसके बाद उन्होंने सर्कस की नौकरी छोड़ दी और अपनी बेटी के साथ कैल्कुलेशन का रोड शो करने लगे।

'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में नाम दर्ज

'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में नाम दर्ज

अद्भूत प्रतिभा की धनी शकुंतला ने मात्र 6 साल की उम्र में स्नातक स्तर के मैथ्स के सवाल हल कर दिए थे और यहीं से शकुंतला देवी के जीवन ने नया मोड़ लिया, वो साल 1944 में अपने पिता के साथ इंग्लैंड चली गईं और धीरे-धीरे कैल्कुलेशन शो के जरिए बेहद लोकप्रिय हो गईं।

18 जून को किया था कमाल

दरअसल शकुंतला देवी का 18 जून से खास रिश्ता है, आपको बता दें कि इसी दिन लंदन के इंपीरियल कॉलेज में शकुंतला देवी ने नया इतिहास रचा था। उनकी बुद्दि का एग्जाम लिया गया था, डिपार्टमेंट ऑफ कम्प्यूटिंग की तरफ से उन्हें 13 अंकों की दो संख्याएं दी गईं थी, जिनका उन्हें गुणा करना था वो भी जुबानी। पूरे हॉल की नजर शकुंतला देवी की ओर थी और उन्होंने मात्र 28 सेकंड में इस जटिल प्रश्न का जवाब दिया था। उनके इसी कारनामे को साल 1982 में 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज किया गया था। उन्हें जो संख्याएं दी गई थी वो थीं-7,686,369,774,870 और 2,465,099,745,779।

इंदिरा गांधी के खिलाफ लड़ा था चुनाव

इंदिरा गांधी के खिलाफ लड़ा था चुनाव

शकुंतला देवी काफी बोल्ड महिला थीं और इसका उदाहरण तब दिखा जब, 1980 में शकुंतला ने साउथ बॉम्बे और तेलंगाना के मेडक लोकसभा सीट से इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया था,हालांकि उस चुनाव में शकुंतला देवी 9वें नंबर पर रहीं थीं लेकिन उनकी चुनौती उस वक्त काफी चर्चा का विषय बनी थी।

साल 1983 में हुआ निधन

साल 1983 में भारत की इस जीनयस बेटी ने दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन वो अपने पीछे अपनी बेटी अनुपमा बनर्जी को छोड़ गई हैं। उनके 84वें जन्मदिन पर गूगल ने उनके सम्मान में अपना डूडल समर्पित किया था।

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