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28 साल बाद बेटे ने मां के बलात्कारियों को पकड़वाया, सीने में छिपाए रही राज, अब जाकर मिली इंसाफ की उम्मीद

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शाहजहांपुर, 23 अगस्त। करीब 3 दशक पहले एक 12 साल की उम्र में एक किशोरी का रेप होता है। वह डर के मारे किसी को बताती नहीं और वहशी मौका मिलते ही उसे अपना शिकार बनाते। वह गर्भवती हुई और एक बेटे को जन्म दिया। बेटा बड़ा होता है और एक दिन उसे मां के साथ हुए जुल्म के बारे में पता चलता है। वह अपनी मां के गुनहगारों को पकड़ने की ठानता है और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाता है। ये कोई फिल्मी कहानी नहीं है बल्कि यूपी के शाहजहांपुर में हुए जुल्म की एक सत्यकथा है।

जब पहली बार आरोपियों ने उसे देखा

जब पहली बार आरोपियों ने उसे देखा

घटना 1994 की है जब पीड़िता निशा (बदला हुआ नाम) अपनी बहन और बहनोई के साथ शाहजहांपुर में रहकर पढ़ाई कर रही थी। निशा के जीजा जी सरकारी नौकरी करते थे और उसकी बहन एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी। उसी समय निशा के हाथ साइकिल लगी थी और स्कूल से आने के बाद वह अक्सर घर के आस-पास चलाने निकल जाया करती। पहली बार यहीं आरोपियों को उसने देखा था।

द न्यूज लॉण्ड्री से बात करते हुए निशा उन दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि मैं साइकिल चलाया करती तो वे राजी और हसन वहां खड़े रहते और हंसते रहते। वह उसके बारे में कुछ बातें भी कहतें जो उस वक्त समझ में नहीं आती। उस समय राजी और हसन क्रमश: 20 और 22 साल के थे।

एक बार शुरू हुआ तो सिलसिला थमा नहीं

एक बार शुरू हुआ तो सिलसिला थमा नहीं

एक दिन निशा बहन के घर पर अकेली थी उसी दौरान राजी और हसन कूदकर उसके घर के अंदर आ गए। एक शख्स ने उसका मुंब दबा दिया और दूसरे ने उसे बांध दिया। इसके बाद दोनों ने उसके साथ रेप किया। इसके बाद दोनों ने उसे खोल दिया और चले गए। साथ ही धमकी भी दी कि अगर किसी को बताया तो वे उसकी बहन को जान से मार देंगे।

लेकिन ये सिर्फ एक बार की बात नहीं थी। निशा का डर आरोपियों की हिम्मत बन गया था। यह सिलसिला अब अक्सर का हो गया था। वो जब भी मौका मिलते घर में पहुंच जाते और उसका रेप करते। छह महीने बीत गए और उसने किसी को कु नहीं बताया। कुछ महीने के बाद निशा के पीरियड शुरू हो गए। पहली बार जब उसे पीरियड आया तो समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा। पहले तो उसे लगा कि शायद उसके साथ जो हो रहा है यह उसी का नतीजा है।

पहले पीरियड के बाद ही हुई गर्भवती

पहले पीरियड के बाद ही हुई गर्भवती

निशा उन दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि उन्हें बस एक ही बार पीरियड आया और फिर नहीं आया। धीरे-धीरे निशा की तबियत खराब होने लगी। वह कई बार बेहोश होकर गिर पड़ी। इसके बाद उनकी बहन उन्हें डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर ने जांच करने के बाद बताया कि निशा गर्भवती है। गर्भवती होने की बात सुनते ही सभी के होश उड़ गए।

परिवार ने पहले बच्चे को खत्म करने की सोची लेकिन डॉक्टर ने कहा कि बच्ची बहुत छोटी है और अगर अबॉर्शन कराया गया तो उसका बचना बहुत मुश्किल है। डॉक्टर ने परिवार को पुलिस के पास जाने की सलाह दी लेकिन लोक-लाज के डर से सबने चुप रहना ही ठीक समझा।

दिन में शिकायत, रात में आरोपी घर में

दिन में शिकायत, रात में आरोपी घर में

आखिर में वे आरोपियों के घर गए और वहां उनके घर वालों से पूरी बात कही लेकिन आरोपियों के घर वालों ने मानने से ही इनकार कर दिया।

जब उनकी बहन और जीजा आरोपियों के घर से लौटे उसी रात राजी और हसन उनके घर आ धमके। उनके हाथ में देशी कट्टा था। उन्होंने धमकाया कि अगर हमने किसी को बताया तो वे सभी को मार देंगे। परिवार को न्याय से ज्यादा अब जान की फिक्र थी। निशा की बहन ने सारा सामान समेटा और उन्होंने इलाका ही नहीं छोड़ा बल्कि जिला ही छोड़ दिया और रामपुर पहुंच गए।

डिलीवरी के बाद बच्चे का चेहरा भी नहीं देखा

डिलीवरी के बाद बच्चे का चेहरा भी नहीं देखा

इस बीच निशा का गर्भ बढ़ रहा था और डिलीवरी का दिन आ गया। निशा को जब डिलीवरी रूम से बाहर लाया गया तो उन्होंने बच्चे के बारे में पूछा तो उनसे कहा गया कि वह उन्हें कभी नहीं मिलेगा। निशा को तब तक ये पता भी नहीं था कि उनका बच्चा लड़का है। परिजनों ने उसे एक करीबी रिश्तेदार के पास भेज दिया जहां उसकी परवरिश होती रही। इसके कुछ समय बात निशा की शादी कर दी गई और वह एक नई जिंदगी शुरू करने चली गई लेकिन यहां भी किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया।

शादी के बाद पति से अलग हुई और बेटे से मिली

शादी के बाद पति से अलग हुई और बेटे से मिली

शादी के कुछ दिनों बाद ही गड़बड़ शुरू हो गई और एक दिन पति ने उन्हें तलाक दे दिया। पति से अलग होने के बाद एक बार फिर वह अपनी जिंदगी शुरू करने की सोच रही थी कि तभी वह पहली बार अपने बेटे से मिलीं। वह 13 साल का था। दरअसल पति से अलग होने के बाद वह रामपुर से लखनऊ शिफ्ट हो गईं। उनके रिश्तेदार को ये पता चला कि निशा अपने पति से अलग हो गई है तो उन्होंने बेटे मां के पास भेज दिया। वह कहती हैं कि जब बेटा पास पहुंचा तो वह लिपटकर रोने लगी थीं। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह कभी उससे मिल सकेंगी। निशा के पास बेटा तो था लेकिन उसे पालने के लिए उनके पास कुछ नहीं था। निशा छोटे-मोटे काम करते जिंदगी चला रही थीं।

निशा बेटे के साथ थी और बेटा अपनी मां के साथ था लेकिन जिंदगी में सब कुछ ठीक नहीं था। जैसे-जैसे बेटा बड़ा हो रहा था उसे लोगों से पिता के बारे में सवाल सुनने पड़ते। बेटा मां से पूछता लेकिन मां कोई जवाब नहीं दे पाती थी। निशा याद करती हैं पहले वह पूछता तो मैं उसे मारकर चुप करा देती लेकिन वह बड़ा हो रहा था। एक दिन बेटे ने जिद कर ली कि अगर उसे पिता के बारे में नहीं बताया गया तो वह आत्महत्या कर लेगा। निशा ने उस दिन बेटे को अपने साथ हुई पूरा घटना के बारे में बताया।

केस दर्ज कराने के लिए भी लड़ी लड़ाई

केस दर्ज कराने के लिए भी लड़ी लड़ाई

मां के साथ हुई ज्यादती के बारे में जानने के बाद बेटा चुप रहने लगा। फिर एक दिन उसने मां से कहा कि हमें उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करनी चाहिए। निशा पहले तैयार नहीं हुई तब बेटे ने कहा कि जब हमारी कोई गलती नहीं है तो हम क्यों चुप रहें। आखिरकार निशा शिकायत के लिए तैयार हो गईं। वह शाहजहांपुर के सदर बाजार पुलिस स्टेशन पहुंची लेकिन यहां पुलिस ने केस दर्ज करने से इनकार कर दिया। निशा के पास न कोई नाम था न कोई तस्वीर, एक बार फिर निराशा नजर आ रही थी लेकिन बेटे ने हिम्मत नहीं हारी थी।

जब पहली बार आरोपियों का नाम जोड़ा गया
बेटे ने एक वकील की मदद ली जो इस मामले को सीजेएम कोर्ट में ले गए। कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया और इस तरह 5 मार्च 2021 को प्राथमिकी दर्ज की गई। अब असली संघर्ष शुरू होना था आरोपियों को ढूढ़ने का। मोहल्ले में इतने सालों में बहुत कुछ बदल गया था। ऊपर से मुस्लिम मोहल्ले में कोई कुछ बताने को तैयार नहीं था। इधर निशा भ पुलिस की मदद कर रही थी। 25 दिन बाद दोनों आरोपियों की पहचान हुई और एफआईआर में उनका नाम जोड़ा गया। निशा की जिंदगी में इस केस को लेकर ये पहली बड़ी सफलता थी।

निशा की आरोपी से पहली बार फोन पर बात

निशा की आरोपी से पहली बार फोन पर बात

एक आरोपी का पुलिस को बता चल गया लेकिन ड्राइवर था और उसका पता नहीं चल रहा था। निशा ने छानबीन कर उसका नंबर निकाला और फोन किया। उसने फोन पर ही पहचान लिया और कहा तू अभी तक जिंदा है। निशा ने फोन पुलिस को दे दिया। शुरू में कुछ आनाकानी के बाद दोनों पुलिस स्टेशन पहुंचे लेकिन आरोपी सामने होने के बाद भी पुलिस के पास कोई सबूत नहीं था। घटना के इतने दिन बीत चुके थे मेडिकल रिपोर्ट में भी कुछ सामने नहीं आना था। इतनी पुरानी रेप की घटना को साबित कर पाना सबसे मुश्किल था।

बेटा बना इस केस का सबसे बड़ा सबूत

बेटा बना इस केस का सबसे बड़ा सबूत

पुलिस इन सारे सवालों का हल ढूढ़ रही थी और तभी बेटे ने डीएनए टेस्ट कराने की बात कही। बेटे का सैंपल लिया गया और दोनों आरोपियों का भी। सैंपल का नतीजा आया तो यह नकी हसन से मैच कर रहा था। इतने दिनों से पिता को तलाश कर रहे बेटे की तलाश पूरी हो चुकी थी। ये खुशी की बात नहीं थी लेकिन संतोष था कि मां के गुनहगारों के खिलाफ सबूत मिल गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद से दोनों आरोपी फरार थे। आखिर पुलिस ने उन्हें हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया।

आरोपियों को यकीन नहीं था कि इतने दिन बाद केस खुल जाएगा
अपने कबूलनामे में राजी ने कहा कि उसे यकीन नहीं था कि इतने दिनों बाद यह केस खुल जाएगा और उनका गुनाह सामने आ जाएगा। वहीं नकी हसन ने भी अपना गुनाह कबूल कर लिया। मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में बंद हैं।

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English summary
shahjahanpur woman accused handcuffed after 28 years son become reason
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