भीषण बिजली संकट की ओर देश, यूपी-हरियाणा और राजस्थान में कितने दिनों का कोयला बचा है? जानिए

नई दिल्ली, 21 अप्रैल: देश में कोयले की किल्लत के चलते भीषण बिजली संकट की स्थिति पैदा हो रही है। कुछ राज्यों में 8-8 घंटे बिजली कटौती की सूचना है। अधिकतर बिजली प्लांट में गिनती के दिनों का ही कोयला बच गया है। ऊपर से तपती गर्मी ने बिजली की मांग में भारी इजाफा कर रखा है। कुछ राज्यों में संकट ज्यादा ही गंभीर चुका है। हालांकि, केंद्र सरकार कह रही है कि कोल इंडिया लिमिटेड के पास काफी मात्रा में कोयले का स्टॉक मौजूद है। लेकिन, विपक्ष ने इस मौके पर राजनीति भी शुरू कर दी है।

बढ़ती गर्मी के बीच बिजली के लिए हाहाकार की स्थिति

बढ़ती गर्मी के बीच बिजली के लिए हाहाकार की स्थिति

कोयले की कमी के चलते देश अप्रत्याशित बिजली संकट की ओर बढ़ रहा है। अधिकतर सरकारी और निजी थर्मल पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक खत्म होने वाला है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक ताजा दैनिक कोल रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू कोयला इस्तेमाल करने वाले 150 थर्मल पावर स्टेशनों में से 81 में कोयले का स्टॉक खत्म होने वाला है। निजी थर्मल पावर प्लांट में भी स्थिति इसी तरह की है। 54 में से 28 थर्मल पावर प्लांट में बिजली उत्पादित करने के लिए कोयले का स्टॉक खत्म होने वाला है। यह स्थिति बढ़ती गर्मी की वजह से बिजली की भारी डिमांड के बीच में हाहाकार की ओर इशारा कर रही है।

यूपी-हरियाणा-राजस्थान में कितने दिनों का कोयला बचा है?

यूपी-हरियाणा-राजस्थान में कितने दिनों का कोयला बचा है?

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कोयले के स्टॉक को लेकर बहुत बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ 7 दिनों का ही कोयला बच गया है। इसी तरह से हरियाणा में 8 दिनों का कोयला है, तो राजस्थान में महज 17 दिनों के लायक ही कोयले का स्टॉक बचा हुआ है। जबकि, थर्मल पावर प्लांट में 26 दिनों के लायक कोयले का स्टॉक रखने का प्रावधान है। हालात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु,पंजाब, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में भी अच्छे नहीं हैं। महाराष्ट्र में बिजली के दूसरे विकल्पों की ओर भी ध्यान दिया जा रहा है। एक अधिकारी ने बताया है कि 2021-22 में कोयले का आयात कम होना कोयला संकट के कारणों में से एक है।

केंद्र सरकार की है कोयले की किल्लत पर नजर

केंद्र सरकार की है कोयले की किल्लत पर नजर

हालांकि, बिजली संकट पर केंद्र सरकार का कहना है कि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के पास कोयले का 72.5 मिलियन टन स्टॉक उपलब्ध है। हालात का जायजा लेने के लिए गृह मंत्री अमित शाह 19 अप्रैल को ऊर्जा, कोयला और रेल मंत्रियों के साथ हालात की समीक्षा के लिए एक बैठक भी कर चुके हैं। इस बीच ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिजली की डिमांड बढ़ने से पंजाब, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में बिजली की कटौती शुरू हो गई है। इसके मुताबिक कुछ जगहों पर तो 8 घंटों तक बिजली कटौती की स्थिति पैदा हो चुकी है।

18 अप्रैल को औसतन 9 दिनों का बचा था कोयला

18 अप्रैल को औसतन 9 दिनों का बचा था कोयला

दरअसल, भारत में कोयला बिजली उत्पादन का बहुत बड़ा स्रोत है और अभी भी 70 फीसदी बिजली उत्पादन इसी पर निर्भर है। ऊर्जा मंत्रालय के 18 अप्रैल के डेटा के मुताबिक भारत में बिजली उत्पादकों के पास सिर्फ औसतन 9 दिनों का ही कोयला बचा हुआ था। देश में कोयले की किल्लत के चलते पैदा हो रही ऊर्जा संकट को लेकर राजनीति भी शुरू हो चुकी है। (कोयले और पावर स्टेशन वाली तस्वीर-फाइल)

'पावर प्लांट का स्विच ऑन कीजिए'

'पावर प्लांट का स्विच ऑन कीजिए'

बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक ट्वीट करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। उन्होंने लिखा था, '8 साल की बड़ी बातों का परिणाम ये है कि भारत के पास सिर्फ 8 दिनों का कोयला बचा है। मोदी जी, मुद्रास्फीति से पैदा हो रही मंदी आ रही है। बिजली कटौती से छोटे उद्योग तबाह हो जाएंगे, जिससे और रोजगार जाएंगे। नफरत का बुलडोजर बंद कीजिए और पावर प्लांट का स्विच ऑन कीजिए। '

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