CORONA VACCINE की रेस में अब तक के 7 ताजा और बड़े डेवलपमेंट
नई
दिल्ली। कोरोना वायरस की बढ़ती महामारी के दौरान पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इसके खिलाफ वैक्सीन बनाने में जुटे हैं। वहीं बुधवार को भारत में कोरोना के पॉजिटिव मरीजों की रिकॉर्ड संख्या दर्ज हुई है। गुरुवार सुबह 8 बजे जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटों में 75,760 मरीज पॉजिटिव जबकि 1023 मौतों का आंकड़ा दर्ज हुआ है। महामारी शुरू होने के बाद से ये किसी भी देश में एक दिन में मिलने वाले पॉजिटिव मरीजों की ये रिकॉर्ड संख्या है। id="toptextpromo"> id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'>अभी
तक सिर्फ रूस ही इकलौता देश है जिसने कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने का दावा किया है। वहीं भारत में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन के दूसरे फेस का ट्रायल पुणे में शुरू हो गया। शोधकर्ताओं के मुताबिक जल्द ही तीसरे चरण का ट्रायल भी किया जाएगा। आइए आपको बताते हैं कि कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर अब तक क्या प्रगति हुई है और वैक्सीन किस चरण में है। id='are-slot-2' class='oiad oi-axt oiadv'>Recommended Video

1- रूस बनाने जा रहा कोरोना की दूसरी वैक्सीन
रूस ने सबसे पहले कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन स्पुतनिक-वी बनाने के बाद अब दूसरी वैक्सीन बनाने को अनुमति दे दी है। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने इसी महीने की शुरुआत में घोषणा की थी कि उनके देश के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन का सफल परीक्षण किया है। राष्ट्रपति ने उनकी बेटी को भी वैक्सीन दिए जाने की बात कही। हालांकि दुनिया भर के वैज्ञानिकों और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वैक्सीन को लेकर चिंता जाहिर की थी। इसके बाद अब रूस ने अब कोविड-19 के खिलाफ दूसरी वैक्सीन बनाये जाने की अनुमति दे दी है। रूस के उपराष्ट्रपति टाटियाना गोलिकोव ने कहा कि साइबेरिया की वेक्टर वायरोलॉजी द्वारा बनाई जा रही का ट्रायल अपने प्रारंभिक चरण में है जो सितंबर के अंत तक पूरा हो जाएगा।

2- भारत में दूसरे चरण का ट्रायल
भारत में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन के दूसरे चरण का ट्रायल शुरू हो गया है। पुणे स्थित भारती विद्यापीठ मेडिकल कॉलेज में वालंटियर्स पर किए गए टेस्ट में वैक्सीन का किसी भी तरह का नकारात्मक प्रभाव नहीं दिखा है। जिन्हें वैक्सीन के डोज दिए गए थे उनके सभी लक्षण सामान्य पाए गए हैं। इस वैक्सीन को पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और एस्ट्राजेंका मिलकर बना रही हैं। वैक्सीन बनने पर भारत इसका लाभ पाने वाले प्रारंभिक देशों में होगा। सरकार ने देश में उन्हीं वैक्सीन के ट्रायल को अनुमति दी है जो इसे भारतीय लोगों के लिए भी सप्लाई करेंगे। वहीं भारत में दो अन्य कंपनियों के वैक्सीन का ट्रायल भी किया जा रहा है।

3- अमेरिकी कंपनी को मिली बड़ी सफलता
वहीं अमेरिकी दवा निर्माता मॉडर्ना ने एक नई वैक्सीन के निर्माण में महत्वपूर्ण प्रगति का दावा किया है। कंपनी ने एक वैक्सीन को ट्रायल के दौरान बुजुर्गों पर भी समान असरदार पाया है। सीमित संख्या में किए गए टेस्ट में बुजुर्ग मरीजों के ऊपर इसका अच्छा रिस्पांस देखा गया। ताजा उन 20 लोगों पर किए गए प्रारंभिक टेस्ट से मिले हैं जिनकी उम्र 56 वर्ष या इससे अधिक है। वैक्सीन युवाओं के साथ अधिक उम्र के लोगों पर भी समान रूप से असरदार देखी गई है। अधिक उम्र के लोग कोरोना का आसानी से शिकार बन रहे हैं और बीमारी से उनकी मृत्यु दर भी ज्यादा है।
कंपनी के मुताबिक वैक्सीन के परीक्षण बेहद ठीक रहा। इस दौरान मरीजों पर इसका कोई विशेष प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया। कुछ मरीजों को थकान, हेडेक और दर्द महसूस हुआ जो दो दिन में दूर हो गया। कंपनी ने इन्हें सामान्य बताया है जो ट्रायल के दौरान होते ही हैं।

4- कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी बनाएगी नई वैक्सीन
वहीं कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने एक ऐसे संभावित टीके के परीक्षण की योजना की पुष्टि की है जो न केवल कोविड-19 वायरस से लड़ेगा बल्कि उन सभी कोरोना वायरस से लड़ने में सक्षम होगी जिनके भविष्य में जानवरों से इंसानों में पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। नई वैक्सीन में अब तक के ज्ञात सभी कोरोना वायरस के अनुवांशिक अनुक्रमों, जिसमें चमगादड़ भी शामिल हैं की जानकारी का उपयोग किया जाएगा।
अमिरिकी कंपनी Pfizer Inc ने कहा है कि जर्मन पार्टनर बॉयोएनटेक के साथ 30 हजार वालंटियर्स पर कोरोना वायरस वैक्सीन का ट्रायल किया जाना है। इस ट्रायल को लेकर वालंटियर्स के नामांकन का 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

5- एएमए ने एफडीए को लिखा पत्र
अमेरिकी मेडिकल एसोसिएशन ने अमेरिकन फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) से कोरोना वैक्सीन की निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता को सुनिश्चित करने को कहा है। एएमए का ये पत्र उस समय आया है जब राष्ट्रपित ट्रंप ने कुछ दिन पहले ही ये कहा था कि कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन जल्द आ सकती है। ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव के पहले वैक्सीन लाए जाने की उम्मीद कर रहे हैं। इससे पहले कोरोना वायरस को लेकर अमेरिकी सरकार के मुख्य सलाहकार और निगरानी करने वाले डॉक्टर एंथोनी फाउची ने भी इसका विरोध किया था।
फाउची ने कहा कि बिना सभी जरूरी टेस्ट को किए जल्दबाजी में किसी भी वैक्सीन के प्रयोग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। फाउची ने कहा कि 'मेरे लिए सबसे जरूरी है, एक ऐसा टीक जो प्रभावी और सुरक्षित दोनों हो। हम उम्मीद करते हैं कि इसके साथ कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।'

6- जॉनसन एंड जॉनसन तीसरे चरण के ट्रायल की तैयारी में
अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने वह चिली, अर्जेंटीना और पेरू को कोरोना वायरस वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के लिए चुना है। यूएस फार्मा कंपनी ने गुरुवार को कहा कि अध्ययन में 60 हजार वालंटियर ब्राजील, चिनी, अर्जेंटीना, कोलंबिया और मेक्सिकों से चुने जाएंगे। इन पर जॉनसन एंड जॉनसन की फार्मासेटुकल यूनिट और स्थानीय एकेडमिक सेंटर के सहयोग से ट्रायल पूरा किया जाएगा। कंपनी ने रायटर्स को बताया कि अभी अर्जेंटीना, मेक्सिको और चिली में नियामक अधिकारियों का अप्रूवल का इंतजार है।

7- कनाडा ने चाइनीज कंपनी से करार किया खत्म
कनाडा की नेशनल रिसर्च काउंसिल (NRC) ने बुधवार को कहा कि उसने कैनसिनो बॉयोलॉजिक्स CanSino Biologics के साथ कोरोनोवायरस वैक्सीन के लिए अपनी साझेदारी को समाप्त कर दिया है। एनआरसी ने पार्टनरशिप को समाप्त करने की वजह बताते हुए खहा कि चीनी कंपनी के पास इस समय वैक्सीनशिप के अधिकार का अभाव है।












Click it and Unblock the Notifications