कोरोना की दूसरी लहर पर मार्च में ही मोदी सरकार को मिली थी चेतावनी, पर नहीं हुई कार्रवाई: रिपोर्ट

कोरोना की दूसरी लहर पर मार्च में ही मोदी सरकार को मिली थी चेतावनी, पर नहीं हुई कार्रवाई: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 02 मई: भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है। रविवार (02 मई) को भारत में 3.92 लाख नए मरीज मिले हैं और 3,689 लोगों की मौत हुई है। वहीं शनिवार (01 मई) को देश में 4 लाख से ज्यादा कोविड-19 के केस सामने आए थे। अब एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारतीय वैज्ञानिकों के एक पैनल ने मार्च की शुरुआत में ही कोरोना वायरस की दूसरी लहर और कोरोना वायरस वेरिएंट को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार बता दिया था। लेकिन केंद्र की सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया और उचित कार्रवाई नहीं की। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ये रिपोर्ट छापी है।

4 भारतीय वैज्ञानिकों ने भारत सरकार को किया था अलर्ट

4 भारतीय वैज्ञानिकों ने भारत सरकार को किया था अलर्ट

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''भारत सरकार द्वारा गठित वैज्ञानिक सलाहकारों ने देश में कोरोनो वायरस और इसके अधिक संक्रामक वैरिएंट को लेकर मार्च के शुरुआती दिनों में भारत की सरकार को आगाह किया था। चार वैज्ञानिकों ने कहा था कि बड़े स्तर पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत है ताकि कोरोना को फैलने से रोका जा सके। लेकिन चेतावनी के बावजूद, केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए प्रमुख प्रतिबंध और उचित कार्रवाई नहीं की।''

वैज्ञानिकों के कहने के बाद भी राजनीतिक रैलियों हुईं

वैज्ञानिकों के कहने के बाद भी राजनीतिक रैलियों हुईं

रॉयटर्स ने शनिवार (1 मई) को ये रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में एजेंसी ने कहा, भारत की सरकार वैज्ञानिकों की इस चेतावनी के बाद भी राजनीतिक चुनावी रैलियां कर रही थी वो भी बिना मास्क पहने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और विपक्षी राजनेताओं द्वारा आयोजित धार्मिक समारोहों और राजनीतिक रैलियों में लाखों लोग शामिल हुए। वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी की कृषि नीति में बदलाव के विरोध में नई दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलन भी जारी रहा। जहां हजारों की संख्या में किसान बैठे हुए हैं।

रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर ने किया ये दावा

रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर ने किया ये दावा

रिपोर्ट में लिखा गया है कि उत्तर भारत के एक रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर ने नाम ना उजागर करने की शर्त पर कहा है कि 2021 के मार्च के शुरुआत में ही कोविड-19 के नए वैरिएंट को लेकर भारत जेनेटिक कंसोर्टियम (Insacog) ने आगाह किया था। ये रिपोर्ट भारत सरकार के उच्च अधिकारियों के पास सीधे भेजी गई थी। रिपोर्ट उन अधिकारियों के पास गई थी जो सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं। हालांकि रॉयटर्स ने इस बात की पुष्टी नहीं की है कि भारत जेनेटिक कंसोर्टियम (Insacog) ने सरकार को अलर्ट किया था या नहीं। रॉयटर्स ने कहा कि उन्होंने इस बारे में पीएमओ से जानकारी लेनी चाहिए लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

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