कोरोना से अनाथ हुए बच्चों के गैर-कानूनी ढंग से गोद लेने पर SC सख्त, राज्यों को दिए ये निर्देश
नई दिल्ली, 8 जून: कोरोना की वजह से अनाथ हुए बच्चों के गैर-कानूनी तरीके से गोद लेने पर सुप्रीम कोर्ट बहुत ही सख्त है और उसने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से इसपर रोक लगाने को कहा है। इसके साथ ही अदालत ने यतीम बच्चों को गोद लेने के लिए दिए जाने वाले सार्वजनिक विज्ञापनों को भी गैर-कानूनी करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि जो भी एनजीओ इस तरह के गैर-कानूनी धंधे में शामिल हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

अनाथ बच्चों के गैर-कानूनी तरीके से गोद लेने पर रोक लगे-सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एन नागेश्वर राव और अनिरुद्ध बोस की अदालत ने कोविड के वजह से अनात हुए बच्चों की समस्या पर स्वत: संज्ञान लेते हुए ये आदेश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि 'जेजे ऐक्ट, 2015 के प्रावधानों के विपरीत प्रभावित बच्चों के गोद लेने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। अनाथ बच्चों को गोद लेने के लिए लोगों को निमंत्रण देना कानून के खिलाफ है, क्योंकि सीएआरए के शामिल हुए बिना बच्चों को गोद लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इस गैर-कानूनी गतिवधि के लिए जो भी एजेंसियां/व्यक्ति जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ राज्य सरकारों/ केद्र शाशित प्रदेशों की ओर से सख्त कार्रवाई की जाए।'
'फंड जुटाने में लगे एनजीओ पर कार्रवाई हो'
अदालत ने ये भी कहा है कि 'राज्य सरकारों/ केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया जाता है कि प्रभावित बच्चों की पहचान बताकर और इच्छित व्यक्तियों को उन्हें गोद लेने का निमंत्रण देकर उनके नाम पर फंड जुटाने वाले एनजीओ को रोकें।' अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने एसीपीसीआर के 6 जून तक के आंकड़ों (3,621 अनाथ, 26,176 के माता-पिता में से एक की मौत और 274 बच्चे अकेले छोड़ दिए गए हैं) का हवाला देकर इस बात का जिक्र किया है कि 30,071 बच्चे या तो अनाथ हो गए हैं या उन्होंने अपने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया है या कोविड की वजह से उन्हें अकेला छोड़ दिया गया है।(तस्वीर-प्रतीकात्मक)












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