न्यायाधीश के यौन उत्पीड़न मामले में बनी जांच समिति निरस्त
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न मामले की जांच को लेकर गठित दो सदस्यीय समिति को निरस्त कर दिया है।

इस समिति का गठन मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने किया था। राज्य की एक महिला जिला न्यायाधीश ने उच्च न्यायालय के ही एक न्यायाधीश पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जिसकी जांच के लिए इस समिति का गठन किया गया था।
न्यायमूर्ति जे.एस.केहर की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने समिति को निरस्त करते हुए कहा कि इसका गठन अनुचित तरीके से किया गया है। यह सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले की सुनवाई के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन है।
जांच समिति को निरस्त करते हुए न्यायालय ने कहा कि आरोपी न्यायाधीश से उनकी प्रशासनिक एवं निरीक्षणात्मक जिम्मेदारियां ले ली जाएंगी और सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश किसी अन्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को जांच समिति गठित करने की जिम्मेदारी देंगे या फिर स्वयं आरोपों की जांच करेंगे।
न्यायालय ने कहा कि चूंकि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश उस प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं, जिसे अब निरस्त किया गया है, इसलिए वह नई जांच समिति का हिस्सा नहीं होंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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