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कॉलेजियम की सिफारिशों पर सरकारी सुस्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, '...हमें बाध्य मत कीजिए'

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Supreme Court on Collegium's recommendations: सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम की ओर से जजों की नियुक्तियों वाली फाइल सरकार के पास लटके रहने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने कॉलेजियम को लेकर केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू की हालिया टिप्पणी पर भी सख्त नाराजगी जताई है और कहा है कि वह चाहे तो इसपर अवमानना का नोटिस भी दे सकता है। अदालत ने अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से सख्त शब्दों में कहा है कि बेंच की भावना सरकार तक पहुंचाइए और हमें न्यायिक तरीके से इस मसले पर फैसला लेने के लिए बाध्य मत कीजिए।

जजों की नियुक्तियों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

जजों की नियुक्तियों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजियम की सिफारिशों पर फैसला लेने में सरकारी की ओर से होने वाली देरी पर गहरा दुख जताया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसको लेकर कहा है कि 'यह पूरे सिस्टम को निराश करता है'। सर्वोच्च अदालत ने जजों की नियुक्तियों को लेकर सरकार की ओर से हो रही देरी पर यह टिप्पणी की है। जस्टिस संजय किशन कॉल की अगुवाई वाली डिविजन बेंच ने हैरानी जताते हुए सवाल किया कि क्या सरकार न्यायिक नियुक्ति आयोग के नहीं लागू होने से असंतुष्ट है, जिसके चलते कॉलेजियम की सिफारिशें रोकी हुई हैं।

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    कानून मंत्री ने की थी कॉलेजियम सिस्टम पर टिप्पणी

    कानून मंत्री ने की थी कॉलेजियम सिस्टम पर टिप्पणी

    अदालत ने टिप्पणी की है कि 'मुद्दा है कि नामों को मंजूरी नहीं दी जा रही है। सिस्टम कैसे काम करेगा ? हमने अपनी पीड़ा जताई है....ऐसा लगता है कि सरकार NJAC के नहीं पास किए जाने से खुश नहीं है। क्या नामों को मंजूर नहीं किए जाने का यह कारण हो सकता है?' गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी केंद्रीय कानून मंत्री की ओर से एक टीवी कार्यक्रम में कॉलेजियम सिस्टम की आलोचना के बाद आई है। उस कार्यक्रम में कानून मंत्री ने कॉलेजियम सिस्टम को भारतीय संविधान के लिए ऐलीअन बताया था, और कहा था कि इसे भारतीय जनता का समर्थन नहीं है और सरकार से यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वह सिर्फ कॉलेजियम की ओर से प्रस्तावित नामों पर मुहर लगाए।

    जबतक यह है, यही कानून है- सुप्रीम कोर्ट

    जबतक यह है, यही कानून है- सुप्रीम कोर्ट

    जस्टिस कॉल ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि जनता के कानून (कॉलेजियम सिस्टम) को लेकर सवाल हो सकते हैं, लेकिन जबतक यह है, यही देश का कानून है। दरअसल, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कानून मंत्री किरेन रिजिजू की सख्त टिप्पणी की ओर अदालत का ध्यान खींचा था। उन्होंने कहा था, 'यह कभी मत कहिए की सरकार फाइल पर बैठी हुई है, तब सरकार को फाइल ही मत भेजिए, आप खुद ही अपनी नियुक्ति कीजिए, तब आप ही कीजिए...'

    '.....ऐसा नहीं होना चाहिए था।'

    '.....ऐसा नहीं होना चाहिए था।'

    जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एएस ओका की बेच ने इसपर कहा है कि, 'जब उच्च पद पर बैठा कोई व्यक्ति कहता है कि........ऐसा नहीं होना चाहिए था।' इस पर केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से कहा कि कई बार मीडिया की खबरें गलत होती हैं। तो अदालत ने कहा कि 'मैंने सभी प्रेस रिपोर्ट को नंजरअंदाज किया था, लेकिन यह कोई उच्च स्तर के व्यक्ति की ओर से आया है.....मैं और कुछ भी नहीं कह रहा हूं।'

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    'हमें न्यायिक तरीके से फैसला लेने के लिए बाध्य मत कीजिए'

    'हमें न्यायिक तरीके से फैसला लेने के लिए बाध्य मत कीजिए'

    जज ने आगे कहा कि 'पूरी प्रक्रिया में समय लगता है, आईबी का इनपुट लिया जा चुका है। आपका इनपुट ले लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम आपके इनपुट को ध्यान में रखता है और नाम भेजता है। जब ऐसा हो जाता है तो मामला खत्म हो जाता है, अभी तक कानून यही है।' अदालत ने यहीं खत्म नहीं किया। जस्टिस कॉल ने अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से कहा कि 'बेंच की भावनाओं' से सरकार को अवगत कराएं और सुनिश्चित करें कि देश के कानून का पालन हो। मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी। अदालत ने कहा कि 'आप दोनों पर्याप्त वरिष्ठ हैं, जो बेंच की भावनाओं को सरकार तक पहुंचा सकते हैं। प्लीज मामले को सुलझाइए, हमें न्यायिक तरीके से फैसला लेने के लिए बाध्य मत कीजिए।' अदालत ने यह भी कहा कि उन्हें यह भी बताइए कि बेंच अवमानना नोटिस जारी करने से खुद को रोक रहा है।

    Comments
    English summary
    Supreme Court is angry with the delay on the part of the government in the appointment of judges as per the recommendations of the collegium. The court also got angry on the remarks of Union Law Minister Kiren Rijiju
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