SC पैनल का दावा, फोन में पेगासस स्पाइवेयर मौजूद, हमारे पास हैं पुख्ता सबूत

नई दिल्ली, 31 जनवरी। पेगासस को लेकर पिछले कुछ सालों से विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेरने में लगा था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया था। कमेटी के दो साइबर सिक्योरिटी शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उनके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि पेगासस के जरिए याचिकाकर्ताओं के फोन में जासूसी की गई है। दोनों ही शोधकर्ता कुछ याचिकाकर्ताओं के संपर्क में थे जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पेगासस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दरवाजा खटखटाया था।

pegasus

दो शोधकर्ताओं ने किया दावा
जिन दो शोधकर्ताओं ने इस पूरे मामले में अपनी रिसर्च की है उसमे से एक का कहना है कि उन्होंने सात आई फोन को चेक किया जिसमे से दो फोन पेगासस से संक्रमित पाए गए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार रिसर्चर ने बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपनी एफिडेविट को जमा कर दिया है। दोनों ही व्यक्तियों के फोन से उनके व्यक्तिगत डेटा को डिलीट करने के बाद रिसर्चर को फोन में पेगासस का वायरस मिला। एक फोन में अप्रैल 2018 में पेगासस वायरस डाला गया जबकि दूसरे फोन में अलग-अलग चरण में जून-जुलाई 2021 के बीच पेगासस स्पाइवेयर को डाला गया।

2 फोन में मिला पेगासस स्पाइवेयर
साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने एफिडेविट में कहा कि मार्च 2021 में फोन में पेगासस स्पाइवेयर डाला गया, जिसके जरिए फोन के डेटा को डिलीट किया गया। दूसरे रिसर्चर का कहना है कि मैंने 6 एंड्राइड फोन की जांच की, चार फोन में अलग-अलग वायरस मिला है। जबकि दो फोन में पेगासस स्पाइवेयर मिला। यह वायरस इस श्रेणी का है जिसे सही काम के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यह ना सिर्फ आपके फोन के मैसेज को पढ़ता है बल्कि इसके जरिए आपके फोन के वीडियो को देखा जा सकता है। वीडियो और ऑडियो को कभी भी ऑन किया जा सकता है।

तीन तकनीकी सदस्य कमेटी में
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर को पिछले साल तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी पर रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस आरवी रवींद्रन निगरानी कर रहे हैं। कमेटी में तीन तकनीकी सदस्य हैं, एक डॉ्टर नवीन कुमार चौधरी जोकि नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी गांधीनगर के डीन है। दूसरे सदस्य डॉक्टर प्रभाकरन पी जोकि अमृत विश्व वविद्यापीठम केरल के प्रोफेसर हैं। तीसरे सदस्य डॉक्टर अश्विन अनिल गुमास्ते हैं जोकि इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे के असोसिएट प्रोफेसर हैं। कमेटी ने 2 जनवरी को एक विज्ञापन दिया था जिसमे कहा था कि जिस किसी को लगता है कि उनका फोन इस स्पाइवेयर से प्रभावित है वह हमे 7 जनवरी की दोपहर 12 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।

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