सत्यपाल मलिक निधन से पहले इस बात को लेकर थे सबसे ज्यादा परेशान, पोस्ट में बताया था अपना दर्द
Satyapal Malik Death: पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार (5 अगस्त 2025) को 79 वर्ष की आयु में दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में निधन हो गया। उनके निजी सचिव केएस राणा ने उनके निधन की पुष्टि की। बताया गया कि वे किडनी संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे थे और लंबे समय से इलाज चल रहा था। अस्पताल ने बताया कि मंगलवार दोपहर 1:10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
इससे पहले 9 जुलाई को सत्यपाल मलिक ने सोशल मीडिया पर अपनी तबीयत को लेकर जानकारी दी थी और लिखा था कि उनकी हालत "गंभीर" है। पोस्ट कर बताया था कि वे एक महीने से अस्पताल में भर्ती हैं और किडनी की समस्या के कारण इलाज करा रहे हैं। निधन से पहले सत्यपाल मलिक सीबीआई की जांच को लेकर सबसे ज्यादा परेशान रहें। 7 जून 2025 को किए अपने पोस्ट उन्होंने इस बात का जिक्र किया था।

सत्यपाल मलिक ने कहा था- 'सरकार ने मुझे CBI का डर दिखाया था'
सत्यपाल मलिक ने पोस्ट में लिखा,
''सरकार मुझे CBI का डर दिखाकर झूठे चार्जशीट में फंसाने के बहाने ढूंढ रही है। जिस मामले में मुझे फंसाना चाहते हैं उस टेंडर को मैंने खुद निरस्त किया था, मैंने खुद प्रधानमंत्री जी को बताया था इस मामले में करप्शन है और उन्हें बताने के बाद में मैंने खुद उस टेंडर को कैंसिल किया, मेरा तबादला होने के बाद में किसी अन्य के हस्ताक्षर से यह टेंडर हुआ।''
उन्होंने आगे लिखा,
''मैं सरकार को और सरकारी एजेंसियों को बताना चाहता हूं कि मैं किसान कौम से हूं, मैं ना तो डरने वाला हूं ओर ना ही झूकने वाला हूं। सरकार ने मुझे बदनाम करने में पुरी ताकत लगा दी, अंत में मेरा सरकार से ओर सरकारी एजेंसियों से अनुरोध है कि मेरे प्यारे देश की जनता को सच्चाई जरूर बताना कि आपको छानबीन में मेरे पास मिला क्या? हालांकि सच्चाई तो यह है कि 50 साल से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में बहुत बड़े-बड़े पदों पर देशसेवा करने का मौका मिलने के बाद आज भी मैं एक कमरे के मकान में रह रहा हूं ओर कर्ज में भी हूं। अगर आज मेरे पास धन दौलत होती तो मैं प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज करवाता।''
सत्यपाल मलिक का भ्रष्टाचार मामले में आया था नाम
मई 2025 में CBI ने सत्यपाल मलिक सहित 6 अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जो कि जम्मू-कश्मीर के किरू हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से संबंधित थी। यह मामला 2019 में 2200 करोड़ रुपये के सिविल वर्क कॉन्ट्रैक्ट में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
मार्च 2025 में उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था, "आने वाले समय में देश की स्थिति और खराब होगी क्योंकि कई मोर्चों पर संकट आने वाला है और इसके लिए सिर्फ मोदी सरकार जिम्मेदार होगी।"
सत्यपाल मलिक का राजनीतिक जीवन लंबे समय तक सक्रिय और चर्चित रहा। उनके निधन से भारतीय राजनीति ने एक बेबाक और मुखर नेता को खो दिया है।
आर्टिकल 370 हटाने के समय रहे थे जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे सत्यपाल मलिक
सत्यपाल मलिक ने 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। इसी दौरान 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला लिया गया था।
बाद में एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया था कि उन्हें इस अहम फैसले की जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा था, "मुझे कुछ नहीं बताया गया। मुझे सिर्फ एक दिन पहले गृह मंत्री ने बुलाकर कहा, ''सत्यपाल, मैं कल एक चिट्ठी भेज रहा हूं, उसे सुबह 11 बजे तक एक समिति से पास करा दो और मुझे भेज दो।'"
सत्यपाल मलिक का राजनीतिक सफर (Political journey of Satyapal Malik)
🔹 सत्यपाल मलिक प्रारंभिक राजनीतिक यात्रा:
- 1965-66 - लोहिया जी की समाजवादी विचारधारा से प्रेरित होकर राजनीति में कदम रखा।
- 1966-67 - मेरठ कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष बने।
- 1968-69 - तत्कालीन मेरठ विश्वविद्यालय (अब चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय) के छात्र संघ अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
🔹 राजनीतिक पद और पार्टी के साथ संबंध
- 1974 - उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए बागपत विधानसभा क्षेत्र से भारतीय क्रांति दल के टिकट पर विधायक चुने गए और विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त हुए।
- 1975 - नवगठित 'लोक दल' के अखिल भारतीय महासचिव नियुक्त किए गए।
- 1980 - 'लोक दल' से राज्यसभा सदस्य के रूप में नामित किए गए।
- 1984 - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) में शामिल हुए।
- 1986 - कांग्रेस के सदस्य के रूप में राज्यसभा के लिए चुने गए और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव नियुक्त हुए।
- 1987 - बोफोर्स घोटाले से नाराज़ होकर राज्यसभा और कांग्रेस दोनों से इस्तीफा दिया। अपनी पार्टी 'जन मोर्चा' बनाई, जिसे 1988 में 'जनता दल' में मिला दिया। इसके बाद श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के साथ देशभर में जनजागरण रैलियाँ कीं।
- 1987-91 - 'जनता दल' के सचिव और प्रवक्ता नियुक्त हुए।
- 1989 - जनता दल के टिकट पर अलीगढ़ से लोकसभा सदस्य चुने गए।
- 2004 - भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए और बागपत लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा।
- 2005-06 - उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष बनाए गए।
- 2009 - भाजपा के किसान मोर्चा के अखिल भारतीय प्रभारी नियुक्त हुए।
- 2012 - भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने।
- 2014 - लोकसभा चुनाव से पहले कृषि मुद्दों पर पार्टी के घोषणा पत्र की उप-समिति के अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- 2014 - पुनः भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त हुए। किसान रैलियों को संबोधित किया।
🔹 सत्यापाल मलिक राज्यपाल पद की भूमिका
- 2017 - बिहार के राज्यपाल नियुक्त हुए।
- 2018 - 23 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रूप में शपथ ली।
🔹 सत्यापाल मलिक महत्वपूर्ण पदभार
- उत्तर प्रदेश विधानसभा सदस्य (बागपत) - 1974-77
- राज्यसभा सांसद - 1980-84
- राज्यसभा सांसद - 1986-89
- लोकसभा सांसद (अलीगढ़) - 1989-91
- राज्यसभा के पैनल ऑफ चेयरमैन और लोकसभा के पैनल ऑफ स्पीकर्स के सदस्य -1989-90
- केंद्र सरकार में संसदीय कार्य और पर्यटन राज्य मंत्री -21 अप्रैल 1990 से 10 नवम्बर 1990 तक
(ये आंकड़े राजभवन, जम्मू-कश्मीर से लिए गए हैं)












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