Satellite Toll System: नेशनल हाईवे पर शुरू होगा सैटेलाइट बेस्ड टोल कलेक्शन, गड़करी ने लिए ये बड़ा निर्णय

Satellite Based Toll Collection System: जल्द ही भारत के नेशनल हाईवे पर सैटेलाइट बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम लागू होगा। जी हां...केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देश में सैटेलाइट बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम लागू करने की घोषणा की है।

साथ ही, उन्होंने बताया कि वर्तमान में मौजूदा नेशनल हाईवे पर टोल सिस्टम को जल्द ही समाप्त कर दिया जाएगा। गडकरी ने शुक्रवार 26 जुलाई को घोषणा करते हुए कहा कि सरकार टोल समाप्त कर रही है और शीघ्र ही सैटेलाइट आधारित टोल संग्रह प्रणाली शुरू होने जा करने जा रही है।

Toll System

इस सिस्टम को लागू करने के पीछे का मकसद टोल कलेक्शन को बढ़ाना और टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम को कम करना है। इस संबंध में गडकरी ने बताया कि इस कॉन्सेप्ट को बंगलूरू-मैसूर खंड राष्ट्रीय राजमार्ग-275 और पानीपत-हिसार खंड राष्ट्रीय राजमार्ग-709 पर पायलट आधार पर लागू किया गया था।

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    वहीं, अब कुछ चुनिंदा राष्ट्रीय राजमार्गों पर शुरू किया जाएगा। इसके लिए अभी नोटिफिकेशन जारी होना बाकी है। आइये आपको बताते हैं कि आखिर ये सैटेलाइट बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम क्या है? इससे क्या लाभ होगा?

    क्या है सैटेलाइट बेस्ड टोल सिस्टम?
    भारत सरकार सैटेलाइट बेस्ड टोल सिस्टम के लिए GNSS बेस्ड टोलिंग सिस्टम का इस्तेमाल करेगी, जो मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम को बदल देगा। इतना ही नहीं, मौजूदा सिस्टम RFID टैग्स पर कार्य करता है, जो ऑटोमेटिक टोल कलेक्ट करता है। वहीं, दूसरी तरफ GNSS बेस्ड टोलिंग सिस्टम में वर्चुअल टोल होंगे।

    इसके लिए वर्चुअल गैन्ट्री इंस्टॉल किए जाएंगे, जो GNSS इनेबल वीइकल से जुड़े होंगे। जब गाड़ियां वर्चुअल टोल से गुजरेगी, तो उपयोगकर्ता के खाते से पैसे कट जाएंगे। भारत के पास अपने नेविगेशन सिस्टम GAGAN और NavIC हैं। इन्हीं की सहायता से गाड़ियों के ट्रैक करना आसान हो जाएगा। इसके साथ ही यूजर का डेटा भी सुरक्षित होगा।

    जानें इससे क्या होगा फायदा?
    फास्टैग आधारित मौजूदा टोल सिस्टम में हाईवे का उपयोग करने पर यात्रियों को कम दूरी के लिए भी पूरे टोल का भुगतान करना पड़ता है, जबकि सैटेलाइट टोल सिस्टम में यात्री को जितनी दूरी तय करेंगे आपसे उतनी ही दूरी के लिए टोल देना होगा। इस प्रकार जनता अतिरिक्त टोल टैक्स के भुगतान से बच सकती हैं। हालांकि, सरकार कितनी दूरी के लिए कितना टोल टैक्स लगाएगी, यह सैटेलाइट टोल सिस्टम के लागू होने के बाद पता चल सकेगा।

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