Sanchar Saathi App क्या संचार साथी ऐप कर रहा है निगरानी? संसद में उठे सवाल पर सिंधिया ने क्या दावा किया
Sanchar Saathi App: केंद्र सरकार ने संचार साथी (Sanchar Saathi) ऐप को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में फैल रही "जासूसी ऐप" संबंधी आशंकाओं को बुधवार, 3 नवंबर को सख्त शब्दों में खारिज कर दिया।
लोकसभा में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ कहा कि यह ऐप किसी भी तरह की निगरानी या प्राइवेसी उल्लंघन के लिए इस्तेमाल ही नहीं हो सकता।

प्रश्नकाल के दौरान ऐप से जुड़े मुद्दे उठने पर सिंधिया ने कहा कि संचार साथी ऐप से जासूसी न संभव है और न ही होगी। उन्होंने कहा कि इस ऐप का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े खतरों से खुद को बचा सकें।
क्या है विवाद का मुख्य कारण?
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (DoT) ने 28 नवंबर के आदेश में निर्देश दिया है कि भारत में बिकने वाले सभी नए मोबाइल फोन में संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल होगा। मौजूदा फोन उपयोगकर्ताओं के डिवाइस में इसे सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिये उपलब्ध कराया जाएगा।
ऐप फोन के सेटअप के समय दिखाई देना चाहिए, और इसकी किसी भी फंक्शनैलिटी को डिसेबल या रिस्ट्रिक्ट नहीं किया जाएगा। यही बिंदु विवाद का कारण बना, क्योंकि कई डिजिटल राइट्स एक्टिविस्ट्स ने कहा कि यह कदम उपयोगकर्ताओं की स्वतंत्रता और प्राइवेसी पर असर डाल सकता है।
MoS संचार चंद्र शेखर: "साइबर फ्रॉड रोकने का यह सबसे प्रभावी तरीका"
संसद के बाहर संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने भी ऐप का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जो लोग इसे स्नूपिंग ऐप कह रहे हैं, वे इसे डाउनलोड कर खुद देखें। साइबर फ्रॉड रोकने के लिए यह सबसे प्रभावी तरीका है। उन्होंने बताया- संचार साथी वेबसाइट पर 20 करोड़ से अधिक हिट्स मिल चुकी हैं और अब तक 1.4 करोड़ लोग ऐप डाउनलोड कर चुके हैं।
ऐप सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है
इसका उद्देश्य शिक्षित उपयोगकर्ताओं के सहयोग से गरीबों और बुजुर्गों को डिजिटल सुरक्षा देना है उन्होंने यह भी कहा कि ऐप को Apple और Google ने वेरिफाई किया है, और अगर किसी को ऐप नहीं चाहिए तो वह इसे आसानी से डिलीट कर सकता है। इससे पहले भी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह साफ किया था कि संचार साथी ऐप उपयोग करना वैकल्पिक है।
यदि कोई इसका उपयोग नहीं करना चाहता, तो वह इसे फोन से हटा सकता है। यह स्पष्टीकरण उस विवाद के बाद आया जब कहा गया कि प्री-इंस्टॉल्ड ऐप को हटाना संभव नहीं होगा। सिंधिया ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर लिखा, यह पूरी तरह स्वैच्छिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था है। उपयोगकर्ता चाहें तो ऐप के लाभ ले सकते हैं या चाहें तो इसे कभी भी डिलीट कर सकते हैं।
क्या करता है संचार साथी ऐप?
सरकार ने मई 2023 में संचार साथी पोर्टल लॉन्च किया था। यह नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा से जुड़े कई साधन प्रदान करता है-
- अपने ID से लिंक सभी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी
- फर्जी SIM या धोखाधड़ी वाले नंबरों की शिकायत
- खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन का ट्रैक और ब्लॉक
- साइबर फ्रॉड रिपोर्ट करने की सुविधा
- मोबाइल ऐप इसी व्यवस्था को और सरल बनाने के लिए इस साल लॉन्च किया गया।
संचार साथी ऐप को लेकर उठी जासूसी संबंधित चिंताओं को केंद्र सरकार ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह ऐप नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है, न कि उनकी निगरानी के लिए।












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