'भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के चलते गिरी J&K बैंक के चेयरमैन परवेज अहमद पर गाज'

नई दिल्ली- जे एंड के बैंक के चेयरमैन परवेज अहमद को भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की केंद्र सरकार की नीति के चलते हटाया गया है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। गौरतलब है कि अहमद को राज्य सरकार ने उनके पद से हटाया है और उनकी जगह आर के छिब्बर को बैंक का अंतरिम चेयरमैन बनाया गया है।

संदेहास्पद छवि के बावजूद कैसे मिली इतनी तरक्की?

संदेहास्पद छवि के बावजूद कैसे मिली इतनी तरक्की?

सूत्रों के मुताबिक रविवार को सरकार एजेंसियों की ओर से दावा किया गया है कि जे एंड के बैंक के चेयरमैन परवेज अहमद की बर्खास्तगी केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार, आतंकवाद विरोधी नीति और कानून का शासन स्थापित करने वाली पॉलिसी के तहत किया गया है। राज्य में टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर शिकंजा कसने के लिए कुछ महीने पहले ही एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की स्थापना कई गई थी और दो महीने पहले ही एसीबी चीफ की नियुक्ति हुई थी। अब एसीबी इस बात की भी जांच में जुट चुकी है कि सिर्फ 15 साल में महज एक चार्टर्ड एकाउंटेंट से वो बैंक के चेयरमैन कैसे बन गए, जबकि उनकी छवि संदेहास्पद रही है।

अपने और नेताओं के रिश्तेदारों पर मेहरबानी

अपने और नेताओं के रिश्तेदारों पर मेहरबानी

परवेज अहमद पर अपने रिश्तेदारों को बैंक में मनचाही नियुक्ति और पोस्टिंग के भी आरोप हैं। यही नहीं उनपर अपने ससुराल वालों के ठिकानों से बैंक की गतिविधियों को अंजाम देने का भी आरोप है। आरोप है कि उन्होंने एक पूर्व मंत्री फारूक अंद्राबी के 12वीं पास भाई शमसु्ददीन अंद्राबी और एक पूर्व मुख्यमंत्री के रिश्तेदार को भी सीधे बैंक मैनेजर बनाकर बैकडोर से ब्रांचों में नियुक्ति कर दिया।

भ्रष्टाचार के एक से बढ़कर एक कारनामे

भ्रष्टाचार के एक से बढ़कर एक कारनामे

एसीबी इस बात की जांच कर रही है कि सैकड़ों बैंकों को इंटेरियर के नाम पर 50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक कुछ चुनिंदा व्यक्तियों के माध्यम से खर्च करने की इजाजत कैसे दे दी गई। जबकि, उसकी सही लागत भुगतान का सिर्फ 30 फीसदी ही होना चाहिए था। उनपर इमरान अंसारी और सज्जाद लोन से सिफारिश लेकर आने वालों को बिना जरूरी प्रक्रिया पूरी किए ही करोड़ों रुपये के लोन देने के भी आरोप हैं। यही नहीं कई डिफॉल्टरों को भी ओवरड्राफ्ट से भारी रकम दिए गए हैं। कुल मिलाकर उनपर मनमानी करते हुए करोड़ों रुपये की रकम की हेराफेरी के गंभीर आरोप लग रहे हैं। उनपर लाखों रुपये के ऐसे विज्ञापन देने के भी आरोप हैं, जिसे किसी ने देखा ही नहीं। सूत्रों ने बताया है कि ऐसे ताकतवर भ्रष्टाचारियों की नकेल कसना नए गृहमंत्री अमित शाह की प्राथमिकताओं में शामिल है। इस संबंध में मिले निर्देशों के मुताबिक ईडी, एनआईए, सीबीआई, सीबीडीटी और राज्य सरकार की एजेंसियों ने कई कदम उठाए हैं। अब गृहमंत्रालय आरबीआई की गाइडलाइंस के मुताबिक जे एंड के बैंक में पारदर्शिता लाने के लिए सफाई अभियान सुनिश्चित करने की दिशा में पहल कर रहा है। केंद्र सरकार चाहती है कि इन अनियमितताओं को खत्म करके जे एंड के बैंक को भी राष्ट्रीय स्तर पर सही स्थान दिलाया जाय।

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