RTI में बड़ा खुलासा, प्राइवेट कंपनी से VVPAT खरीदना चाहती थी केंद्र सरकार, चुनाव आयोग नहीं माना

नई दिल्ली। पिछले दिनों जिस तरह से कई कई राज्यों के चुनाव नतीजे आए, उसके बाद तमाम राजनीतिक दलों ने ईवीएम पर सवाल खड़े किए थे। जिसके बाद चुनाव आयोग ने सभी ईवीएम मशीनों में वीवीपैट मशीन लगाने का फैसला लिया था, जिससे कि लोगों का चुनावी प्रक्रिया में भरोसा बरकरार रहे। लेकिन इस बाबत सूचना के अधिकार के तहत बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल केंद्र सरकार चाहती थी कि इन वीवीपैट मशीन को प्राइवेट कंपनी से खरीदा जाए, लेकिन केंद्र सरकार की इस मांग को चुनाव आयोग ने सिरे से यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इससे लोगों का चुनाव प्रक्रिया में भरोसा कम हो जाएगा।

आरटीआई में हुआ खुलासा

आरटीआई में हुआ खुलासा

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक कानून मंत्रालय ने चुनाव आयोग को जुलाई से सितंबर 2016 के बीच तीन पत्र इस बाबत लिखकर सुझाव मांगा था। लेकिन इस पत्र के जवाब में चुनाव आयोग ने 19 सितंबर को लिखा कि हम इस बात पर पूरी तरह से विश्वास रखते हैं किक प्राइवेट निर्माता से ऐसे संवेदनशील काम के लिए मशीन नहीं ली जा सकती है, वीवीपैट मशीन ईवीएम का काफी अहम हिस्सा है। मुख्य सूचना आयुक्त नसीम जैदी ने केंद्र को लिखे जवाब में साफ किया है कि वह प्राइवेट निर्माता से यह मशीन नहीं खरीद सकते हैं।

सिर्फ दो कंपनियां करती हैं वीवीपैट सप्लाई

सिर्फ दो कंपनियां करती हैं वीवीपैट सप्लाई

आपको बता दें कि ईवीएम और वीवीपैट मशीन को शुरू से भारत में दो ही सरकारी उपक्रम सप्लाई करते हैं, जिसमे भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड जोकि बेंगलुरू में स्थित है और दूसरा इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड हैदराबाद शामिल है। इन दोनों कंपनियों के अलावा चुनाव आयोग किसी अन्य प्राइवेट कंपनी से यह मशीन नहीं लेता है। वीवीपैट मशीन के जरिए मतदाता जब वोट देता है तो उसकी एक रसीद प्रिंट होती है, जोकि भविष्य में किसी भी विवाद से निपटने के लिए काफी अहम साबित हो सकती है।

 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश

2013 में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश

गौरतलब है किक 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि चुनाव आयोग वीवीपैट मशीन का सिलसिलवार तरीके से इस्तेमाल शुरू करे, जिससे कि 2019 के लोकसभा चुनाव तक सभी ईवीएम मशीनों को वीवीपैट से जोड़ा जा सके। जिसके बाद से लगातार चुनाव आयोग तमाम ईवीएम मशीनों को वीवीपैट से जोड़ रहा है। जिससे कि चुनावी प्रक्रिया पर किसी भी तरह का संदेह नहीं रहे।

इसे भी पढ़ें- जस्टिस केएम जोसेफ के मामले पर सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की आज फिर होगी बैठक

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+