समलैंगिक संबंध अपराध नहीं, लेकिन इसका समर्थन भी नहीं करते हैं: RSS
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(आरएसएस) ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखे जाने पर एक बयान जारी किया है। आरएसएस ने अपने बयान में कहा कि, वह सुप्रीम कोर्ट की तरह समलैंगिकता को अपराध नहीं मानता है लेकिन वह इसका समर्थन भी नहीं करता है। बता दें कि 2016 में जब इस मुद्दे ने जोर पकड़ा था। तब कई बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं ने समलैंगिकता को अपराध बताया था।

अब इस पर आरएसएस ने इस पर अपना रवैया बदला है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारी अरूण कुमार ने कहा कि आरएसएस समलैंगिकता को अपराध नहीं मानता लेकिन समान लिंग के जोड़ों के बीच विवाह प्रकृति के विरुद्ध है । उन्होंने कहा कि, परंपरागत तौर से भारत का समाज भी इस प्रकार के संबंधों को मान्यता नहीं देता है। मनुष्य सामान्यतः अनुभवों से सीखता है इसलिए इस विषय को सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक स्तर पर ही निपटाए जाने की आवश्यकता है।
अरुण कुमार ने कहा कि, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की तरह हम भी इस को अपराध नहीं मानते। समलैंगिक विवाह और संबंध प्रकृति से सुसंगत एवं नैसर्गिक नहीं है, इसलिए हम इस प्रकार के संबंधों का समर्थन नहीं करते हैं। बता दें कि 2016 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने कहा था कि समलैंगिकता को धार्मिकता से ना जोड़ें ये गलत है। वहीं, RSS ने समलैंगिकता को समाजिक रूप से अस्वीकार कर दिया था।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मामले को लेकर कहा था कि, पार्टी का मानना है कि समलैंगिकता अप्राकृतिक है और इसे अपराध की श्रेणी से बाहर नहीं किया जा सकता है। वहीं आरएसएस के संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने अपने रुख में बदलाव करते हुए समलैंगिकता को सामाजिक रूप से अनैतिक कृत्य करार दिया। उनका कहना है कि एक मनोवैज्ञानिक मामले के रूप में इसका इलाज करने की जरूरत है। उन्होंने समलैंगिक विवाह पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।












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