'भारत माता की जय कहने से देशभक्ति नहीं हो जाती': राम का नाम लेकर RSS नेता ने क्यों दिया ऐसा बयान ?
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह ने भारत माता की जय की नारेबाजी को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि सिर्फ नारे लगाने से देशभक्ति नहीं हो जाती, इसके लिए जुटना पड़ता है, मेहनत करनी पड़ती है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने 'भारत माता की जय' के जयकारे लगाने वाली प्रवृत्ति को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण का उदाहरण देकर बताया है कि देशभक्ति का मतलब है कि इसकी प्रगति के लिए कड़ी मेहनत भी की जाए। आरएसएस 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। उससे पहले संघ अपने संगठन के विस्तार के प्रयास में लगा हुआ है। यही नहीं अगले साल लोकसभा चुनाव भी होने हैं, संघ के नेताओं की सक्रियता को उससे भी जोड़कर देखा जा रहा है।

'भारत माता की जय कहने से देशभक्ति नहीं हो जाती'
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने शुक्रवार को कहा है कि सिर्फ भारत माता की जय के नारे लगाने से देशभक्ति नहीं हो जाती है। इसके लिए निस्वार्थ सेवा की आवश्यकता पड़ती है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भगवान राम का नाम नहीं, बल्कि उनका काम लोगों का उत्थान करता है। मकर संक्रांति पर आयोजित एक कार्यक्रम में आरएसएस नेता बोले, 'भगवान श्री कृष्ण की महिमा और भगवान श्री राम की श्रेष्ठता का किसी के जीवन में कोई मायने नहीं है, अगर वह उनके आचरण, व्यवहार और परिवेश जैसी बातों को आत्मसात ना करे। '

'भारत के पूर्वजों के सपनों को समझना होगा'
यही नहीं, दत्तात्रेय की बातें इसलिए भी मायने रखती हैं क्योंकि उनके मुताबिक, 'भारत माता की जय के नारे लगाने से देशभक्ति होती है। ऐसा कहने का नैतिक अधिकार तभी प्राप्त होगा जब कोई कड़ा परिश्रम करेगा और इसके प्रति समझदारी से गंभीर प्रयास करेगा।' आरएसएस नेता ने कहा कि भारत को लेकर इसके पूर्वजों के सपनों को समझना होगा और उसे प्राप्त करने की दिशा में प्रयास भी करना होगा। उन्होंने कहा कि अपने देश का जो पौराणिक इतिहास रहा है, वह दुनिया की किसी भी सभ्यता से कम नहीं है और हमारे लोगों का उत्साह बढ़ाने और चेतना जगाने के लिए काफी है।

'संघ के कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं'
इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक संघ के सरकार्यवाह पिछले मंगलवार से ही उत्तर प्रदेश के प्रवास पर हैं और यहां वह संगठन से जुड़े कार्यक्रमों और गतिविधियों की समीक्षा करने आए हैं। उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब भाजपा के महासचिव (संगठन) बीएल संतोष दो दिन लखनऊ में रहकर 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी के कार्यक्रमों की समीक्षा करके गए है। संघ के एक पदाधिकारी ने सरकार्यवाह के बारे में बताया कि 'उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में प्रयागराज में आयोजित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की चार दिवसीय बैठक में लिए गए निर्णयों के अमल की प्रगति की समीक्षा की है।'

2025 में संघ के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं
2025 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना के 100 साल पूरे हो रहे हैं। होसबाले के कार्यक्रमों को ग्रामीण इलाकों में संगठन का दायरा बढ़ाने की योजना से भी जोड़ा जा रहा है। आरएसएस पदाधिकारी ने बताया कि संघ ने फैसला किया है कि शताब्दी वर्ष पर वह कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित नहीं करेगा, बल्कि अपने संसाधनों का उपयोग संगठन के विस्तार में लगाएगा। प्रयागराज की बैठक में अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल ने देश में जनसंख्या असंतुलन और जबरन धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर चिंता जताई थी। इसमें एक जनसंख्या नीति बनाने की मांग की गई थी, जो सब पर सामान्य रूप से लागू हो। इसमें महिला सशक्तिकरण और उनकी सामाजिक कार्यों में भागीदारी पर भी चर्चा की गई थी।

'संघ के स्वयं सेवक कभी प्रेशर ग्रुप का कार्य नहीं करते'
इससे पहले 7 जनवरी को एक कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत कह चुके हैं कि उनका संगठन स्वयं सेवक का निर्माण करता है, जो देश में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान करता है, लेकिन उनके माध्यम से कभी भी प्रेशर ग्रुप के निर्माण की कोशिश नहीं की जाती। उन्होंने कहा, 'स्वयं सेवक जो भी करते हैं, वे अपने व्यक्तिगत स्तर पर करते हैं।' संघ ने उन्हें विचार दिया है, इसलिए जो भी आवश्यकता होती है, वह करते हैं। 'स्वयं सेवकों को इसी तरह से बनाया गया है, उन्हें इस तरह से नहीं बनाया गया है कि देश में प्रभावी प्रेशर ग्रुप की तरह कार्य करें।.....संघ पूरे देश को एकजुट करना चाहता है।' (पीटीआई इनपुट के साथ)












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