धर्म संसद में दिए गए बयान पर मोहन भागवत की दो टूक, वहां कही बातें हिंदुत्व नहीं
नई दिल्ली, 07 फरवरी। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने धर्म संसद में दिए गए बयान पर कहा कि धर्म संसद के कार्यक्रम हिंदू विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। धर्म संसद के कार्यक्रम में जो कुछ हुआ वह हिंदू के शब्द नहीं थे ना ही वह हिंदू कर्म या हिंदू दिमाग था। मोहन भागवत ने यह बयान नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। भागवत ने कहा कि हिंदुत्व में विश्वास रखने वाले लोग इस तरह की बातों पर भरोसा नहीं करते हैं। अगर कोई बात किसी समय गुस्से में कही गई है तो यह हिंदुत्व नहीं है। बता दें कि पिछले साल दिसंबर माह में हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद के दौरान मुसलमानों को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया गया था। वहीं रायपुर में धर्म संसद में महात्मा गांधी को लेकर भी अमर्यादित बयान दिया गया था।

मोहन भागवत ने कहा कि हिंदुत्व कोई इज्म नहीं है, हिंदुत्व शब्द का अंग्रेजी ट्रांसलेशन हिंदुनेस होता है। इस शब्द का सबसे पहले जिक्र गुरू नानक देव ने किया था, इसका जिक्र रामायण, महाभारत, में नहीं है। हिंदू का अर्थ संक्षिप्त नहीं है, यह बहुत वृहद है जोकि अनुभव के साथ बदलता रहता है। भागवत ने कहा कि व्यक्तिगत लाभ या दुश्मनी फैलाने के लिए जो बयान दिए जाते हैं वह हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। आरएसएस या फिर वो जो लोग सच में हिंदुत्व को मानते हैं वह इस तरह के अर्थों को कोई महत्व नहीं देते हैं। हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व विवेक, संतुलन, सबके प्रति आत्मीयता करते हैं। भागतव ने कहा कि संघ लोगों को बांटने में नहीं बल्कि लोगों के बीच के मतभेद को खत्म करने में विश्वास करता है। हम हिंदुत्व के जरिए यह काम करना चाहते हैं।
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बता दें कि हरिद्वार में धर्म संसद का आयोजन किया गया था उसमे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने की बात कही गई थी। यह बयान 17 और 19 दिसंबर 201 को हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद के दौरान दिया गया था। हिंदु युवा वाहिनी के यति नरसिंहानंद ने यह बयान दिया था। इसी तरह का एक और कार्यक्रम छत्तीसगढ़के रायपुर में 26 दिसंबर को हुआ था। जिसमे कालीचरण महाराज ने कथित रूप से अल्पसंख्यकों के लिए और महात्मा गांधी को लेकर भड़काऊ भाषण दिया था।












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