'लोग पढ़ेंगे- भारत में कभी लोकतंत्र हुआ करता था', जानें केंद्र सरकार पर क्यों भड़के सांसद मनोज झा
Manoj Jha: केंद्र द्वारा जारी संसद के विशेष सत्र के एजेंडे की अस्थायी सूची में सीईसी और ईसी नियुक्ति विधेयक पर, राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो हम आने वाले वर्षों में पढ़ेंगे, 'वंस अपॉन ए टाइम देयर वाज ए डेमोक्रेसी इन कंट्री' यानी कि भारत में कभी लोकतंत्र हुआ करता था।
मनोज झा न कहा कि क्या इस कमेटी का कोई मतलब है? पहले से ही चुनाव आयोग के काम चिंता का विषय हैं। इसके बाद हम उनके पास जाकर शिकायत भी नहीं कर पाएंगे। सरकार को चाहिए इतनी बेशर्मी से यह बेईमानी वाला बिल लाने से पहले सोचे। नीचे पढ़ें क्या है पूरा मामला...

क्या है मामला?
बता दें कि केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा शर्तों वाला नया विधेयक पेश किया था। इस विधेयक के तहत सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की भूमिका खत्म करने की बात की गई है। हालांकि, इस विधेयक के पेश होने के बाद विपक्षी दलों ने इसका भारी विरोध किया है।
विधेयक में क्या है?
- विधेयक में कहा गया है कि चयन समिति अपनी प्रक्रिया को "पारदर्शी तरीके" से रेगुलेट करेगी।
- सीईसी और ईसी का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक रहेगा।
- सीईसी और ईसी का वेतन कैबिनेट सचिव के समान होगा।
- अब CEC के सदस्यों का चयन प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री करेंगे।












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