क्या BJP और RSS के रिश्तों में आ गई दरार? नड्डा के बयान पर संघ नेता सुनील आंबेकर के रिएक्शन से तेज हुई चर्चा
RSS Sunil Ambekar: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शीर्ष नेता सुनील आंबेकर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख जेपी नड्डा की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। सुनील आंबेकर ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ "पारिवारिक मामलों को पारिवारिक मामलों की तरह" सुलझाता है और सार्वजनिक मंचों पर ऐसे मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहता है।
जेपी नड्डा ने पहले कहा था कि भाजपा पार्टी अपने मामलों को चलाने में सक्षम है। जेपी नड्डा ने कहा था कि भाजपा उस समय से आगे बढ़ चुकी है जब उसे आरएसएस की जरूरत थी और अब वह अपने मामलों को चलाने में "सक्षम" है। जेपी नड्डा ने कहा था कि भाजपा आरएसएस पर निर्भर रहने से आगे बढ़कर आत्मनिर्भर बन गई है।

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क्या भाजपा और आरएसएस के रिश्तों में आई दरार?
सुनील आंबेकर ने 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव' में जेपी नड्डा के बयान पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी और बस इतना कहा कि वो पारिवारिक मामलों को सुलझाना जानते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या जेपी नड्डा की टिप्पणियों से भाजपा और आरएसएस के बीच दरार पैदा हुई है? तो सुनील आंबेकर ने इस मुद्दे को कमतर आंकते हुए इसे "पारिवारिक मामला" बताया।
यह पूछे जाने पर कि आरएसएस इस टिप्पणी को किस तरह देखता है और क्या इससे सदस्य नाराज हुए हैं? सुनील आंबेकर ने कहा, "हम पारिवारिक मामलों को पारिवारिक मामलों की तरह ही सुलझाते हैं। हम ऐसे मुद्दों पर सार्वजनिक मंचों पर चर्चा नहीं करते।" ये बात उन्होंने हंसते हुए कहा है।
यह चर्चा इस साल मई में जेपी नड्डा द्वारा की गई टिप्पणियों से उपजी है। इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए एक इंटरव्यू में जेपी नड्डा ने कहा, "शुरू में हम अक्षम होंगे, थोड़ा कम होंगे, आरएसएस की जरूरत पड़ती थी...आज हम बढ़ गए हैं, सक्षम हैं...तो बीजेपी अपने आप को चलाती है।"
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आरएसएस हमेशा से कहता रहा है कि वह एक सांस्कृतिक संगठन है और उसका न तो कोई राजनीतिक उद्देश्य है और न ही वह किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल है। आरएसएस इस बात से इनकार करता है कि उसका भाजपा की राजनीति, निर्णयों या नीति निर्धारण या भाजपा के चुनावी प्रयासों से कोई लेना-देना है। हालांकि, ऐसा लगता है कि आरएसएस और भाजपा नेताओं ने हाल ही में इस संदेश को जोर-शोर से और स्पष्ट रूप से पहुंचाने के लिए एक ठोस अभियान शुरू किया है।
भाजपा और आरएसएस के नेता "लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए बहुत प्रयास कर रहे हैं कि आरएसएस एक 'गैर-राजनीतिक' और 'सांस्कृतिक' संगठन है, जिसका भाजपा के चुनाव प्रयासों या उसकी फैसला लेने की प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है।
जबरन धर्मांतरण पर क्या बोले सुनील आंबेकर?
सुनील आंबेकर ने जबरन धर्मांतरण पर आरएसएस के विचारों को लेकर कहा,
"जबरन धर्म परिवर्तन गलत है, चाहे आप किसी भी समाज में रह रहे हों। स्वाभाविक रूप से, जब भी यह सामने आता है, इसका विरोध किया जाता है और हम इसके खिलाफ बोलने वालों के साथ खड़े होते हैं। जहां भी यह समस्या होती है, हम समाज के साथ मिलकर इसका समाधान करने के लिए खड़े होते हैं और सभी कानूनी और आवश्यक विकल्पों पर विचार करते हैं। हालांकि, लोगों ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे दिया है, जो गलत है।"
सुनील आंबेकर बोले- RSS का हिस्सा बनने वाले लोग अच्छे काम करना चाहते हैं
सुनील आंबेकर ने कहा कि जो लोग आरएसएस का हिस्सा बन रहे हैं, वे समाज में अच्छा काम करना चाहते हैं। सुनील आंबेकर ने कहा, "संघ के लिए काम करना बहुत कठिन है, आपको हर दिन शाखा में जाना पड़ता है, इसमें बहुत अधिक शारीरिक व्यायाम और अनुशासन शामिल होता है। हमारे पास हर दिन बहुत से लोग आते हैं जो बहुत अच्छा काम करना चाहते हैं। हमारे पास आईटी क्षेत्र से बहुत से लोग आते हैं जो दूसरों की सेवा करना चाहते हैं। यहां तक कि अगर कोई व्यक्ति राजनीतिक लाभ के बारे में सोचकर हमारे साथ जुड़ता है, तो वह आरएसएस से जुड़े होने के कारण अपने आप ही अच्छा काम करना शुरू कर देता है।''
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