कौन थे IAF के इकलौते परमवीर चक्र विजेता शहीद Nirmal Jit Singh Sekhon? आसमान में अकेले चटाई PAK को धूल
Nirmal Jit Singh Sekhon: गणतंत्र दिवस 2026 (Republic Day 2026) के पावन अवसर पर पूरा देश उन जांबाजों को नमन कर रहा है, जिन्होंने मां भारती की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इसी बीच 23 जनवरी को रिलीज हुई बहुप्रतीक्षित फिल्म 'बॉर्डर 2' ने सिनेमाघरों में देशभक्ति का नया ज्वार पैदा कर दिया है। यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना और वायुसेना के अदम्य साहस, अद्वितीय बलिदान और ऐतिहासिक जीत का एक जीवंत दस्तावेज है।
फिल्म में भारतीय वायुसेना के वीर शहीद फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों (NJS Sekhon) की वीरता को पर्दे पर उतारा गया है। इनकी कहानी आज भी हर भारतीय की रगों में जोश भर देती है। गणतंत्र दिवस के इस माहौल में सेखों का बलिदान हमें याद दिलाता है कि हमारी आजादी की कीमत कितनी बड़ी है।

पंजाब की मिट्टी से आसमान के रक्षक बनने तक का सफर
फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों का जन्म 17 जुलाई 1945 को पंजाब के लुधियाना जिले के इसेवाल गांव में हुआ था। एक साधारण परिवार में जन्मे सेखों के मन में बचपन से ही देश सेवा का जज्बा था। उन्होंने अपनी शुरुआत इंजीनियरिंग की पढ़ाई से की थी, लेकिन जल्द ही उन्हें आभास हुआ कि उनकी असली मंजिल आसमान की ऊंचाइयों में देश की रक्षा करना है। इसी संकल्प के साथ उन्होंने 1964 में भारतीय वायुसेना में कदम रखा।
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मिग-21 और 18 स्क्वॉड्रन के निडर योद्धा
वायुसेना में शामिल होने के बाद सेखों को मिग-21 लड़ाकू विमान उड़ाने का गहन प्रशिक्षण मिला। उनकी तैनाती वायुसेना की 18 स्क्वॉड्रन में हुई, जहाँ वे अपने शांत स्वभाव, कड़े अनुशासन और निडरता के कारण सहकर्मियों के बीच काफी लोकप्रिय थे। 1971 का युद्ध उनके लिए अपनी ट्रेनिंग को साबित करने का सबसे बड़ा अवसर लेकर आया।
जब बिना आदेश दुश्मन के छह विमानों से अकेले भिड़ गए
14 दिसंबर 1971 का वह दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज है। पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों ने श्रीनगर एयरफील्ड पर अचानक हमला बोल दिया था। स्थिति इतनी खराब थी कि आधिकारिक तौर पर उड़ान भरने की अनुमति मिलना कठिन था, लेकिन सेखों ने खतरे को भांपते हुए बिना आदेश के ही विमान उड़ाने का साहसिक फैसला किया। उन्होंने अकेले ही दुश्मन के छह विमानों का मुकाबला किया, जिनमें से दो को मार गिराया और शेष को भागने पर मजबूर कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार उन्होंने जलते हुए रनवे से अपना प्लेन उड़ाया था।
'मुझे मजा आ रहा है', साहस का वह आखिरी संदेश
हवाई युद्ध के उस भीषण तनाव के बीच रेडियो पर सेखों का आखिरी संदेश गूंजा था, 'मैं मुकाबले पर हूं और मुझे मजा आ रहा है।' ये शब्द आज भी भारतीय वायुसेना में साहस और अटूट आत्मविश्वास की सबसे बड़ी मिसाल माने जाते हैं। अपने मिशन को बखूबी अंजाम देते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए।
Nirmal Jit Singh Sekhon: वायुसेना के इकलौते परमवीर चक्र विजेता
निर्मलजीत सिंह सेखों की इस अद्वितीय बहादुरी के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया। वे आज भी भारतीय वायुसेना के इतिहास में एकमात्र परमवीर चक्र विजेता हैं। उनके बलिदान की एक भावुक बात यह भी है कि उनकी शादी को मात्र छह महीने ही हुए थे जब उन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।
'बॉर्डर 2' ने नई पीढ़ी को दी प्रेरणा
हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'बॉर्डर 2' में फ्लाइंग ऑफिसर सेखों की इस वीरगाथा को पूरी भव्यता के साथ दिखाया गया है। फिल्म को मिल रही अपार सराहना यह साबित करती है कि नई पीढ़ी अपने असली नायकों के बारे में जानने और उन्हें सम्मान देने के लिए उत्सुक है। गणतंत्र दिवस पर उनको याद करते हुए हम अपने शहीदों को नमन करते हैं।
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