जम्मू कश्मीर: राजनाथ सिंह ने महबूबा मुफ्ती के दावे पर खड़ा किया बड़ा सवाल
नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में जिस तरह से राज्यपाल ने प्रदेश की विधानसभा को भंग किया उसके बाद से लगातार सियासी बंवडर जारी है। कांग्रेस, एनसी और पीडीपी लगातार इसके लिए केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साध रही हैं। लेकिन इन सब के बीच गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि जम्मू कश्मीर विधानसभा को भंग करने का फैसला राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने इसलिए लिया क्योंकि प्रदेश में मौजूदा स्थिति में सरकार बनाने की कोई संभावना नहीं थी।

भाजपा का नहीं है हाथ
राजनाथ सिंह ने कहा कि राज्यपाल ने जम्मू कश्मीर में यह फैसला वहां की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए लिया, वह इस नतीजे पर पहुंचे थे कि प्रदेश में सरकार बनाने की कोई संभावना नहीं है। यह फैसला राज्यपाल ने लिया था, इसमे भारतीय जनता पार्टी का कोई हाथ नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कुछ विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा को भंग करने के पीछे भारतीय जनता पार्टी का हाथ है वह दुर्भाग्यपूर्ण है।

मुफ्ती और लोन ने पेश किया था दावा
आपको बता दें कि राज्यपाल ने बुधवार को प्रदेश की विधानसभा को भंग कर दिया था, जबकि पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती और पीपूल्स कॉफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने राज्यपाल के पास बहुमत होने का दावा किया था। मुफ्ती ने दावा किया था कि उनके पास एनसी और कांग्रेस के विधायकों का समर्थन है, जिसके बाद उनके पास कुल 56 विधायकों का समर्थन है। वहीं लोन ने भी दावा किया था कि उनके पास 25 भाजपा विधायकों और 18 बागी विधायकों का समर्थन है। गौरतलब है कि प्रदेश की विधानसभा में कुल 87 सीटें हैं, लिहाजा सरकार बनाने के लिए 44 विधायकों के समर्थन की जरूरत थी।

मुफ्ती के दावे पर खड़ा किया सवाल
जिस तरह से महबूबा मुफ्ती ने दावा किया था कि उनके पास कांग्रेस का समर्थन है, उपर निशाना साधते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि गुलाम नबी आजाद ने एक बयान में कहा था कि सरकार बनाने के लिए उनकी पार्टी ने पीडीपी को समर्थन नहीं दिया था। अगर मुफ्ती सही हैं तो आजाद ने यह बयान क्यों दिया था। एक अन्य शीर्ष पदाधिकारी ने कहा कि राज्यपाल पिछले तीन-चार दिनों से विधानसभा को भंग करने पर विचार कर रहे थे और उनपर केंद्र की ओर से किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं था।
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