भारत वसुधैव कुटुंबकम को मानने वाला, पूरी दुनिया एक परिवार है: राजनाथ सिंह
नई दिल्ली, 16 जून। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग प्लस में बोलते हुए कहा कि भारत वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को मानने वाला देश है। पूरी दुनिया एक परिवार है और यह प्रासंगिक हो गई है। मौजूदा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा माहौल को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और शांति के लिए कई नई चुनौतियां पैदा हो गई हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की साउथ ईस्ट एशिया की नीति एक्ट ईस्ट नीति पर आधारित है, जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में ऐलान किया था। यह देशों के बीच बातचीत के जरिए आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर आधारित है। आसियान के 10 सदस्य देशों को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि आपसी सहयोग से ही हम आतंकवादी संगठनों और उसके नेटवर्क को रोक सकते हैं। बता दें कि आसियान में भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, कोरिया गणतंत्र, अमेरिका और रूस शामिल हैं। इसकी पहली बैठक 2010 में वियतनाम के हनोई में हुई थी।
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रक्षा मंत्री ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र और समावेशी व्यवस्था की बात कही। दक्षिण चीन सागर के बारे में रक्षामंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में विकास ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है। भारत अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में कॉमर्स के लिए स्वतंत्र आवागमन, ओवरफ्लाइट का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि जो देश संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित हैं उनके साथ अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनों के माध्यम से विवादों का समाधन होना चाहिए।
वहीं आतंकवाद के मुद्दे पर राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के सामने आतंकवाद और कट्टरपंथ सबसे बड़ी चुनौती है, यह शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के सदस्य के तौर पर भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को लेकर प्रतिबद्ध है और आतंकवाद के खिलाफ होने वाली फंडिंग के खिलाफ भी हमारी प्रतिबद्धता है। साइबर खतरा जैसे रैंसमवेयर, वानाक्राइट हमला, क्रिप्टो करेंसी खतरा हमारी लिए चिंता का विषय है। आपसी सहयोग के जरिए ही हम आतंकी संगठनों और उनके नेटवर्क को खत्म कर सकते हैं।












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