अब दूसरे रास्ते से जा सकेंगे कैलाश मानसरोवर, महज 7 दिन में होंगे बाबा के दर्शन
नई दिल्ली। कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रियों को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को बड़ी सौगात दी है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए बनाई गई 80 किलोमीटर की सड़क का उद्घाटन किया है। उत्तराखंड में बनाई गई इस सड़क को रक्षा मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश को समर्पित किया है। पहले जहां तीर्थयात्रियों को कैलाश मानसरोवर पहुंचने में तीन हफ्तों का समय लगता था अब वह नए मार्ग से सिर्फ एक सप्ताह का समय लगेगा।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर देश को इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, 'आज मानसरोवर यात्रा के लिए लिंक रोड का उद्घाटन करने के बाद बहुत प्रसन्न हूं। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने धारचूला से लिपुलेख (चीन सीमा) तक कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग के रूप में सड़क स्थापित करने में सफलता हासिल की है, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पिथौरागढ़ से गुंजी तक वाहनों के काफिले को रवाना किया गया।'
राजनाथ सिंह ने आगे लिखा, 'कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी मुश्किल अब आसान हो गई है। अब वह एक हफ्ते में ही अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे, पहले इसमें 3 सप्ताह का समय लगता था। इसके साथ ही स्थानीय लोगों और तीर्थ यात्रियों का दशकों पुराना सपना भी साकार हो गया है।' राजनाथ ने अपने ट्वीट में बताया है कि सड़क घाटियाबगड़ से शुरू होता है और लिपूलेख में खत्म होता है। यहीं से कैलाश मानसरोवर का आगाज होता है। राजनाथ ने कहा- अब यहां आर्थिक विकास भी तेज होगा।
एक रक्षा सूत्र ने कहा, 'पहले वाले मार्ग की तुलना में नए मार्ग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह सबसे छोटा और सस्ता मार्ग है। इस क्षेत्र में कोई हवाई यात्रा शामिल नहीं है और यात्रा का अधिकांश हिस्सा भारत में 84% है और 16% चीन में है। इसके अलावा, लिपुलेख दर्रे पर चीनी तरफ 5 किमी के ट्रेक को छोड़कर, पूरी यात्रा अब वाहनों पर होगी।
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