राजनाथ जी, अंग्रेजी से थी चिढ़ तो क्यों भेजा बेटों को विदेश?
बैंगलोर। राजनाथ सिंह ने एक बार फिर हिंदी पढ़ाओ - देश बढ़ाओ का राग छेड़ दिया है। हालांकि ऐसा करने से पहले वो एक बड़ी मामूली सी बात भूल गए। दूसरे पर टीका - टिप्पणी करने से पहले इंसान को अपने आस पास झांक कर तसल्ली कर लेनी चाहिए। नहीं तो चिंगारी आप के घर हो और आप पानी की बाल्टी लेकर पड़ोसी के घर भागने लगें तो किसी को क्या कहा जाए।

दरअसल राजनाथ सिंह जोधपुर के एक विद्यालय के कार्यक्रम में पहुंचे और हिंदी हैं हम का राग आलापना शुरू किया। लेकिन इसके बाद राजनाथ ने अंग्रेजों द्वारा लाई गई अंग्रेजी शिक्षा को ही देश की टूटती परंपराओं और सभ्यताओं का भी ज़िम्मेदार ठहराया। कार्यक्रम में कांग्रेस के होनहार मंत्री सचिन पाइलट भी मौजूद जिन्होंने पेनिसिलवेनिया की एक यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली है।
क्या खुद के बच्चों को भी कहते हैं अंग्रेज?
राजनाथ सिंह ने अंग्रेजी शिक्षा के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने यहां तक कह डाला कि अंग्रेजी सभ्यता वाले स्कूलों की वजह से हिंदी भाषी बच्चे कुंठा में जीते हैं और खुद को कमतर आंकते हैं। तो शायद इसी कुंठा से अपने बच्चों को बचाने के लिए राजनाथ सिंह ने उन्हें अंग्रेजी शिक्षा दिलवाई।
तीनों बच्चों ने की है अंग्रेजी पढ़ाई
राजनाथ सिंह के तीनों बच्चे पंकज सिंह, नीरज सिंह और अनामिका सिंह ने अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त की है। इतना ही नहीं उनकी बेटी अमरीका की एक कंपनी में ही काम करती थीं जबकि उनके छोटे बेटे नीरज ने भी बाहर रहकर ही उच्च शिक्षा प्राप्त की है। ऐसे क्या सोचकर राजनाथ सिंह बच्चों को यह पाठ पढ़ा रहे थे।
अंग्रेजी शिक्षा पर फोड़ा असभ्यता का ठीकरा
राजनाथ सिंह ने अंग्रेजी शिक्षा पर असभ्यताओं और अमर्यादाओं का ठीकरा फोड़ दिया है। तो क्या वह यह कहना चाह रहे थे कि कुछ समय पूर्व अमर्यादित व्यवहार के कारण चर्चा में आए उनके बेटे का वह बर्ताव उसकी अंग्रेजी शिक्षा का दोष था?
भाजपा के कई चर्चित चेहरे 'अंग्रेज़'
अगर राजनाथ सिंह की इस टिप्पणी को गंभीरता से लिया जाए तो भाजपा के कई चर्चित चेहरों ने भी अंग्रेजी शिक्षा ली हैं। इनमें निर्मला सीतारमण, अरूण जेटली जैसे नाम शामिल हैं।












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