Rajiv Gandhi Foundation:केंद्र ने FCRA लाइसेंस क्यों रद्द किया, जानिए राजीव गांधी फाउंडेशन क्या है
Rajiv Gandhi Foundation news: केंद्र सरकार ने सोनिया गांधी के परिवार से जुड़ी संस्था राजीव गांधी फाउंडेशन का लाइसेंस रद्द कर दिया है। इस फाउंडेशन पर विदेशी डोनेशन लेने के लिए कानूनों के उल्लंघन के गंभीर आरोप हैं और गृह मंत्रालय ने दो साल से ज्यादा हुई जांच के बाद यह सख्त कदम उठाया है। राजीव गांधी फाउंडेशन पर चीन जैसे देशों से लाखों डॉलर दान लेने के आरोप हैं। आइए इस संगठन पर हुई कार्रवाई, इसपर लगे आरोपों और इसके कार्यों से जुड़ी सभी बातों के बारे में विस्तार से समझते हैं और यह भी जानते हैं कि इस गैर-सरकारी संगठन पर सोनिया गांधी के पारिवारिक संगठन होने के आरोप क्यों लगते हैं।

राजीव गांधी फाउंडेशन का एफसीआरए लाइसेंस केंद्र ने क्यों कैंसिल किया
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राजीव गांधी फाउंडेशन (आरजीएफ) का विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह फैसला 2020 में गृह ेमंत्रालय की ओर से बनाई गई अंतर-मंत्रालय समिति की ओर से की गई जांच के बाद लिया गया है। केंद्र सरकार के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा है, 'हां, राजीव गांधी फाउंडेशन के खिलाफ हुई एक जांच के बाद इसका एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।' अधिकारी के मुताबिक यह एक गैर-सरकारी संगठन है, जो गांधी परिवार से संबंधित है और इसपर एफसीआरए कानून के उल्लंघन का आरोप हैं।

राजीव गांधी फाउंडेशन पर क्या है आरोप
2020 में राजीव गांधी फाउंडेशन का डोनेशन पैटर्न राजनीतिक सुर्खियों में आया था। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने 25 जून को आरोप लगाया था कि राजीव गांधी फाउंडेशन ने 2005-06 के दौरान चीन से 3,00,000 डॉलर का दान लिया था। नड्डा ने कहा था, 'मैं यह देखकर हैरान था कि राजीव गांधी फाउंडेशन को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (चीन)और चीनी दूतावास से 3,00,000 डॉलर का दान मिला है। इस डोनेशन का इस्तेमाल देश में मुक्त व्यापार पर शोध करने और उसे प्रोत्साहित करने पर किया गया था। भ्रष्टाचार के कई तरीके हैं और कांग्रेस पार्टी को बताना चाहिए कि इन डोनेशनों से किस तरह के शोध किए गए थे।'

लद्दाख में एलएसी पर चीन के साथ तनाव के बीच उठा था मामला
राजीव गांधी फाउंडेशन के खिलाफ जांच उस दौरान शुरू हुई थी, जब पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सेना और भारतीय जवानों के बीच हुई हिंसक झड़पों की वजह से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था। उस दौरान बीजेपी और कांग्रेस दोनों एक-दूसरे पर चीन के साथ सीमा को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस और गांधी परिवार से जुड़े गई संगठनों ने चीन से दान लिए हैं। जबकि, कांग्रेस पार्टी लगातार केंद्र सरकार पर सीमा विवाद से निपटने को लेकर सवाल खड़े कर रही थी।

राजीव गांधी फाउंडेशन के बोर्ड में कौन लोग हैं
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी राजीव गांधी फाउंडेशन की फाउंडर चेयरपर्सन/एक्सक्यूटिव कमेटी मेंबर हैं। जबकि, इसके बाकी ट्रस्टी/एक्सक्यूटिव कमेटी मेंबर में उनके बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा सुमन दुबे शामिल हैं। जबकि, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, मोंटेक सिंह अहलुवालिया और अशोक गांगुली इसके ट्रस्टी हैं। विजय महाजन इस संगठन के सेक्रेटरी और सीईओ हैं।

राजीव गांधी फाउंडेशन कब बना
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के निधन के बाद उनकी पत्नी सोनिया गांधी ने 21 जून, 1991 को एक गैर-सरकारी संगठन के तौर पर राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना की थी। इसकी वेबसाइट के मुताबिक 25 वर्षों से फाउंडेशन ने राजीव गांधी के सपनों को साकार करने के लिए काम किया है। चेयरपर्स के तौर पर सोनिया गांधी ने इसके हितों से जुड़ी हर चीज की अगुवाई की है।

राजीव गांधी फाउंडेशन किस क्षेत्र में काम करता है
राजीव गांधी फाउंडेशन की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस संगठन ने 5 मुख्य क्षेत्रों के लिए काम करना निश्चित किया है। इसमें साक्षरता, विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास, वंचितों और विकलांगों का सशक्तिकरण, विमानन क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और एक थिंक टैंक की स्थापना करना, जिसके तहत अगस्त 1991 में RGICS का गठन किया गया था।












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