शादीशुदा महिला का दूसरे मर्द के साथ लिव-इन में रहना अवैध: राजस्थान हाईकोर्ट
जयपुर, 17 अगस्त: राजस्थान उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक शादीशुदा महिला का किसी दूसरे पुरुष के साथ लिव-इन रिलशनशिप में रहना नाजायाज और अवैध है। ऐसे में ऐसे किसी जोड़े को पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने लिव-इन में रह रही एक विवाहित महिला की अर्जी पर फैसला देते हुए ये कहा है। महिला ने अपनी अर्जी में कोर्ट से गुहार लगाई थी कि वो शादीशुदा है और किसी अन्य पुरुष के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में है। ऐसे में उसकी जान को खतरा है और उसे पुलिस सुरक्षा दी जाए। इस पर जस्टिस सतीश कुमार शर्मा की बेंच ने महिला की सुरक्षा की मांग को खारिज कर दिया।

महिला ने मांगी थी सुरक्षा
राजस्थान हाईकोर्ट में यह याचिका झुंझुनू जिले की 30 साल की विवाहित महिला और 27 साल के अविवाहित शख्स ने दायर की थी, जिसमें उन्होंने कहा था किवह दोनों वयस्क हैं और सहमति से लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे हैं। महिला ने कहा था कि वह पति की शारीरिक प्रताड़ना और क्रूरता की वजह से वह अलग रह रही है। इन दोनों के वकील की ओर से कोर्ट को बताया गया कि लिव-इन संबंध की वजह से दोनों को धमकियां मिल रही हैं। ऐसे में कोर्ट कपल को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दे।

ये रिश्ता अवैध संबंधों की श्रेणी में आएगा- कोर्ट
जस्टिस शर्मा ने मामले को लेकर अपने आदेश में कहा, याचिकाकर्ता महिला पहले से ही शादीशुदा है। बिना तलाक के वह लिव-इन रिलेशन में रह रही हैं। ऐसे में ये रिश्ता अवैध संबंधों की श्रेणी में आएगा। ऐसे में अदालत याचिकाकर्ताओं के पुलिस सुरक्षा के अनुरोध को खारिज करती है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी दिया था ऐसा ही फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी कुछ समय एक ऐसा ही फैसला दिया था। कोर्ट ने लिव-इन में रह रही शादीशुदा महिला की पुलिस सुरक्षा की याचिका खारिज कर दी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि लिव-इन रिलेशनशिप को समाज के तानेबाने की कीमत पर नहीं रखे जा सकते। राजस्थान हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया है।












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