किराया तो बढ़ा नहीं, जानिए उन तरीकों को जिससे प्रभु जुटाएंगे पैसे
नयी दिल्ली। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आज संसद में वर्ष 2016-17 का रेल बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय रेल किराये से इतर स्रोतों से प्राप्त होने वाले राजस्व में बढ़ोतरी करेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में किराए से इतर स्रोतों के जरिए 5 प्रतिशत से भी कम राजस्व अर्जित होता है और इसे अगले 5 वर्षों में बढ़ाकर 10 प्रतिशत की विश्व औसत तक लाया जाएगा। रेलवे बजट 2016: अब घंटों के आधार पर होगी वेटिंग रूम की बुकिंग

स्टेशन पुनर्विकास
खाली भूमि और स्टेशन की इमारतों के ऊपर के स्थान के अधिकारों के वाणिज्यिक उपयोग के जरिए भूमि और इमारतों के मौद्रीकरण के लिए स्टेशनों के पुनर्विकास का एक बड़ा कार्यक्रम शुरू किया गया है।
रेलपथ के आस-पास की भूमि का मौद्रीकरण
रेलवे द्वारा बागवानी तथा वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए रेल नेटवर्क के आस-पास उपलब्ध भूमि को पट्टे पर दिया जाएगा। इससे वंचित वर्गों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग आदि को रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, भोजन सुरक्षा में सुधार होगा। रेलवे भूमि पर अतिक्रमणों की भी रोकथाम होगी। इस ट्रैक का इस्तेमाल करके सौर ऊर्जा उत्पन्न करने की संभावना की भी जांच की जाएगी।
सॉफ्ट परिसंपत्तियों का मौद्रीकरण
भारतीय रेलवे यात्री की प्राथमिकता, टिकटिंग के पैटर्न, जिंस, गाड़ी चालन तथा अन्य विभिन्न सेवाओं तथा परिचालनों से संबंधित संकलित डाटा का मौद्रीकरण डाटा करेगी। आईआरसीटीसी की वेबसाइट के बड़ी संख्या में इस्तेमाल के मद्देनजर इस साइट पर भी ई-कामर्स गतिविधियों का लाभ प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध हो जाते हैं।
विज्ञापन
भारतीय रेलवे द्वारा अपनी विशाल भौतिक और प्राकृतिक अवसंरचना का विज्ञापन के माध्यम से वाणिज्यिक उपयोग किया जाएगा। स्टेशनों, गाडि़यों और बड़े स्टेशनों के रेलपथ के आस-पास की भूमि पर विज्ञापन संबंधी संभावनाओं का इस्तेमाल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पार्सल व्यवसाय को ओवरहॉल करना
रेलवे किराये से इतर राजस्व के स्रोतों में वृद्धि करने के लिए अपनी वर्तमान पार्सल नीतियों को उदार बनाएगा। वह अपनी सेवाओं की पेशकश के दायरे, खासतौर पर ई-कामर्स जैसे उदयीमान क्षेत्र में सेवाओं के दायरे की पेशकश को बढ़ायेगा।
विनिर्माण कार्यकलापों से राजस्व
रेलवे घरेलू तथा अन्तरराष्ट्रीय बाजार में अर्थपूर्ण भागीदार बनने के लिए उत्पादकता बढ़ाने और बेहतर विनिर्माण पद्धतियां अपनाने पर ध्यान केन्द्रित करेगा। इसका 2020 तक लगभग 4,000 करोड़ रुपए तक वार्षिक राजस्व जुटाने का लक्ष्य है।












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