Railway Amendment Bill 2024: केंद्र सरकार क्यों लाई प्रस्ताव, सांसदों ने दी क्या प्रतिक्रिया? जानिए सबकुछ

Railway Amendment Bill 2024: रेल संशोधन विधेयक 2024 के लोकसभा में पारित होने बाद सदन के बाहर भी चर्चा जारी है। इस बीच रेल मंत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। वहीं विधेयक को लेकर कई सांसदों ने विधेयक के बड़े मुद्दों को संबोधित करने में विफल रहने पर चिंता व्यक्त की। वहीं दूसरी ओर रेलवे का निजीकरण होने का फेक नैरेटिव सेट करने की कोशिश के आरोपों को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि देश में डिफेंस और रेलवे दो ऐसे सेक्टर हैं, जिन्हें राजनीति से दूर रखते हुए इन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है। रेलवे विधेयक (संशोधन) की आवश्यकता पर जोर देते हुए रेल मंत्री दावा किया कि Railway Amendment Bill 2024 आने के बाद रेलवे कानून की जटिलताएं और अधिक कम हो गई हैं।

विधेयक भारतीय रेलवे बोर्ड अधिनियम, 1905 को निरस्त करने और इसके प्रावधानों को रेलवे अधिनियम, 1989 में शामिल करने का एक प्रयास माना जा जा रहा है। हालांकि सदन में विधेयक के पारित होने से पहले चर्चा के दौरान कई सांसदों ने विधेयक के बड़े मुद्दों को संबोधित करने में विफल रहने पर चिंता व्यक्त की। इसमें सुरक्षा, रिक्तियों और जोनल और डिवीजन स्तरों पर सत्ता के विकेंद्रीकरण के मुद्दे उठाए गए।

Parliament proceedings Railway Bill

रेलवे अधिनियम क्या हैं उद्देश्य?
बता दें कि भारत के रेलवे नेटवर्क का निर्माण स्वतंत्रता से पहले लोक निर्माण विभाग की एक शाखा के रूप में शुरू हुआ था। जब नेटवर्क का विस्तार हुआ, तो विभिन्न रेलवे संस्थाओं के समुचित कामकाज को सक्षम करने के लिए भारतीय रेलवे अधिनियम, 1890 लागू किया गया। बाद में, रेलवे संगठन को लोक निर्माण विभाग से अलग कर दिया गया और रेलवे बोर्ड को भारतीय रेलवे अधिनियम, 1890 के तहत कुछ शक्तियां या कार्य प्रदान करने के लिए भारतीय रेलवे बोर्ड अधिनियम, 1905 अधिनियमित किया गया।

विधेयक भारतीय रेलवे बोर्ड अधिनियम, 1905 को निरस्त करने और इसके प्रावधानों को रेलवे अधिनियम, 1989 में शामिल करने का प्रयास करता है। और हालांकि नए कानून की सामग्री को बहुत आलोचना नहीं मिली, कई सांसदों ने विधेयक के बड़े मुद्दों को संबोधित करने में विफल रहने पर चिंता व्यक्त की। सुरक्षा, रिक्तियों और जोनल और डिवीजन स्तरों पर सत्ता के विकेंद्रीकरण सहित रेलवे से संबंधित।

सांसदों ने विधेयक को लेकर क्या कहा?
यूपी के नगीना से आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्र शेखर ने सवाल उठाया कि क्या रेलवे बोर्ड में एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं को सदस्य के रूप में समायोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा, "यह जरूरी है कि नियुक्तियां क्षेत्र में योग्यता और विशेषज्ञता के आधार पर की जानी चाहिए, न कि उस राजनीतिक विचारधारा के आधार पर जिससे कोई संबद्ध है। रेलवे को सुविधाजनक, किफायती और विश्वसनीय होना चाहिए।"

वहीं ओडिशा के भुवनेश्वर से भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने कहा कि नया कानून भारतीय रेलवे को आधुनिक बनाने, सरल बनाने और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, "इस विधेयक से रेलवे बोर्ड के कार्यों और स्वतंत्रता में वृद्धि होगी।"

वहीं कुछ विपक्षी सांसदों का मानना ​​था कि विधेयक पर्याप्त विचार-विमर्श के बिना पेश किया गया था।

उत्तर प्रदेश के आंवला से समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य ने कहा, इस मामले पर चर्चा करने और फिर संशोधन पेश करने के लिए एक सर्वदलीय समिति बनाना अधिक फायदेमंद होता। उन्होंने कहा, "रेलवे बोर्ड को निर्णय लेने के अधिकार के साथ एक स्वतंत्र निकाय बनाया जाना चाहिए और इसे सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिए।"

एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक वर्षों से कई विशेषज्ञ समितियों द्वारा की गई किसी भी सिफारिश को शामिल करने में विफल रहा है। उन्होंने कहा, "वर्ष 2015 में गठित रेलवे पुनर्गठन समिति ने एक स्वतंत्र नियामक स्थापित करने की सिफारिश की थी, लेकिन मौजूदा विधेयक एक स्वतंत्र नियामक बनाने में विफल है।"

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