'चीन पर चीनी राजदूत से क्लास लेते हैं राहुल गांधी', विदेश मंत्री एस जयशंकर का तंज
कांग्रेस नेता राहुल गांधी अबकी बार विदेश मंत्री एस जयशंकर के निशाने पर आए हैं। जयशंकर ने कहा है कि चीन के मसले पर राहुल चीनी राजदूत से ही क्लास लेते हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जोरदार तंज कसा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी चीन के मसले पर चीन के राजदूत से क्लास लेते हैं। विदेश मंत्री ने रविवार को कर्नाटक के मैसुरु में 'मोदी सरकार की विदेश नीति' पर अपना पक्ष रखते हुए कांग्रेस नेता पर यह कटाक्ष किया है।
'चीन पर चीनी राजदूत से क्लास लेते हैं राहुल गांधी'
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, 'मैं चीन पर राहुल गांधी से क्लास लेना चाहता, लेकिन मुझे पता चला कि वह चीन पर चीन के राजदूत से ही क्लास ले रहे थे।' राहुल मोदी सरकार की चीन के मसले पर आलोचना करते रहे हैं और विदेश मंत्री इसी बात का जवाब दे रहे थे।
चीन के राजदूत से राहुल के मुलाकात का किया जिक्र
उन्होंने डोकलाम संकट के दौरान राहुल गांधी के चीनी राजदूत से मुलाकात का भी जिक्र किया, जब राहुल ने सरकार पर यह आरोप लगाते हुए दावा किया था कि उसकी वजह से चीन की सलामी स्लाइसिंग की नीति में हमने कथित तौर पर अपना नया इलाका गंवा दिया।
'विदेशों में अपनी स्थिति को कमजोर न करें'
एस जयशंकर बोले, 'मैं जानता हूं कि राजनीति में सबकुछ राजनीतिक होता है। मैं इसे स्वीकार करता हूं। लेकिन, मैं सोचता हूं कि कुछ मुद्दों पर हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम कम से कम इस तरह से बर्ताव करें कि विदेशों में हम अपनी (भारत की) सामूहिक स्थिति को कमजोर न करें, जो कि पिछले तीन वर्षों में हमनें चीन पर देखा है।'
पैंगोंग त्सो में पुल बनाने की घटना का दिया उदाहरण
उनके मुताबिक, 'अक्सर बहुत ही भ्रामक कहानियां लायी जाती हैं।' जयशंकर बोले, 'उदाहरण के लिए.....एक पुल जो चीनी पैंगोंग त्सो में बना रहे थे। अब, सच्चाई यह थी कि उस खास क्षेत्र में चीनी पहली बार 1959 में आए थे, और 1962 में उसपर उन्होंने कब्जा कर लिया था। लेकिन, इसे इस तरह से नहीं रखा गया था।..... '
'अगर आप स्तर गिराना चाहते हैं तो मैं क्या कह सकता हूं'
विदेश मंत्री ने आगे बताया कि 'इस तरह कुछ तथाकथित मॉडल गांवों के मामले में भी हुआ, क्योंकि, वो उन इलाकों में बने थे, जो हम 62 में या उससे पहले ही खो चुके थे। अब, मुझे विश्वास नहीं होता, शायद ही आप कभी मुझे 1962 कहते सुनेंगे....कि वह नहीं होना चाहिए था या आप गलत हैं या आप जिम्मेदार हैं। जो हुआ था, वह हुआ था। मैं कहूंगा कि यह हमारी सामूहिक, नाकामी या जिम्मेदारी....जरूरी नहीं कि मैं इसे राजनीतिक रंग दे रहा हूं। मैं वास्तव में जैसे चीन से गंभीर बातचीत देखना चाहता हूं। मैं यह स्वीकार करने के लिए तैयार हूं कि इसपर भिन्न नजरिया है, लेकिन अगर आप इसे कहा-सुनी के स्तर तक गिराना चाहते हैं तो इसके बाद मैं क्या कह सकता हूं?'
Recommended Video
भारत-चीन मसले पर जयशंकर इससे पहले इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में भी राहुल गांधी की आलोचना कर चुके हैं। (स्रोत-एएनआई)












Click it and Unblock the Notifications