आखिर क्यों पूरी भाजपा अडानी के बचाव में उतर आई: राहुल गांधी

भारत जोड़ो यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए राहुल गांधी ने कहा भारत माता ने मुझे मैसेज दिया, देखो तुम अगर निकले हो, अगर कन्याकुमारी से कश्मीर चलने निकलने हो तो अपने दिल से अहंकार मिटाओ, घमंड मिटाओ नहीं तो मत चलो।

Rahul gandhi

कांग्रेस के राष्ट्रीय महाधिवेशन में बोलते हुए राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान अपने अनुभव को साझा किया। उन्होने कहा कि इस यात्रा के दौरान मुझे लोगों का ढेर सारा प्यार मिला। राहुल गांधी ने कहा कि सदन में जब मैंने पीएम मोदी के करीबी अडानी की बात कही, उनकी मोदी के साथ तस्वीर दिखाई और पूछा कि कैसे वह इतने अमीर बन गए। इस तरह की नीति बनाई गई कि देश विदेश हर जगह उन्हें फायदा होने लगा। सदन में मैंने अडानी का नाम लिया तो पूरी सरकार और इसके मंत्री उनके बचाव में उतर आए, पूरी भाजपा आखिर क्यों उनके समर्थन में उतर आई।

राहुल ने कहा कि केरल ने आपने वो बोट रेस देखी होगी, उस समय जब मैं नाव में बैठा था तो मेरे पैर में भयंकर दर्द था। मैं उस फोटो में मुस्कुरा रहा हूं, लेकिन मेरे दिल के अंदर रोना आ रहा था, इतना दर्द था। मैंने यात्रा शुरू की, काफी फिट आदमी हूं, 10-12 किलोमीटर ऐसे ही दौड़ लेता हूं, घमंड था, मैंने सोचा कि 10-12 किलोमीटर चल लेता हूं, 20-25 किलोमीटर में क्या बात है। पुरानी चोट थी, कॉलेज में चोट लगी थी फुटबॉल खेलते हुए। मैं दौड़ रहा था, मेरे दोस्त ने पीछे से अडंगी मार दी, घुटने में चोट लगी। दर्द गायब हो गया था सालों के लिए। अचानक जैसे ही मैंने यात्रा शुरू की दर्द वापस आ गया। आप मेरे परिवार हो तो मैं कह सकता हूं आपसे, सुबह उठता था तो सोचता था कि कैसे चला जाए, फिर सोचता था कि 25 किलोमीटर नहीं 3500 किलोमीटर चलना है,कैसे चलूंगा। जब कंटेनर से उतरता था, चलना शुरू करता था, लोगों से मिलता तो पहले 10-15 दिन में, जिसको आप अहंकार कह सकते हो, घमंड कह सकते हो, सारा गायब हो गया।

भारत माता का संदेश

राहुल गांधी ने कहा कि भारत माता ने मुझे मैसेज दिया, देखो तुम अगर निकले हो, अगर कन्याकुमारी से कश्मीर चलने निकलने हो तो अपने दिल से अहंकार मिटाओ, घमंड मिटाओ नहीं तो मत चलो। मुझे यह बात सुननी पड़ी। आहिस्ते-आहिस्ता मैंने देखा मेरी आवाज चुप होती गई। पहले किसान से मिलता था, मैं उसको अपना ज्ञान समझाने की कोशिश करता था। लेकिन धीरे-धीरे सारा ज्ञान बंद हो गया, शांति सी आ गई और सन्नाटे में मैं सुनने लगा, यह आहिस्ते-आहिस्ते बदलाव आया। जब मैं जम्मू कश्मीर पहुंचा मैं बिल्कुल चुप हो गया।

52 साल से मेरा घर नहीं

राहुल ने कहा मैं छोटा सा था, 1977 की बात है, चुनाव आया, मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता था, मैं सिर्फ 6 साल का था। एक दिन घर में अजीब सा माहौल था, मैं मां के पास गया, मैंने पूछा क्या हुआ, उन्होंने कहा हम घर छोड़ रहे हैं। तबतक मैं सोचता था कि वह घर हमारा था, मैंने मां से पूछा हम अपने घर को क्यों छोड़ रहे हैं। पहली बार मां ने मुझे बताया, राहुल यह हमारा घर नहीं है, यह सरकार का घर है, अब हमे यहां से जाना है। मैंने पूछा मां कहां जाना है, कहती हैं नहीं मालूम कहां जाना है। मैं हैरान हो गया, मैंने सोचा था कि वह हमारा घर था। 52 साल हो गए, मेरे पास घर नहीं है, आजतक घर नहीं है, हमारे परिवार का जो घर है वह इलाहाबाद में है, वह भी हमारा घर नहीं है। जो घर होता है, उसके साथ मेरा अजीब सा रिश्ता है, मैं 12 तुगलक लेन में रहता हूं, लेकिन मेरे लिए वह घर नहीं है।

भारत जोड़ो यात्रा में मेरा घर
जब मैं कन्याकुमारी से निकला तो मैंने खुद से पूछा कि मेरी जिम्मेदारी क्या बनती है। मैं भारत का दर्शन करने निकला हूं, भारत को समझने निकला हूं, हजारों लाखों लोग चल रहे हैं, भीड़ है, मेरी क्या जिम्मेदारी है। मैंने थोड़ी देर सोचा और फिर मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। मैंने ऑफिस के लोगो को बुलाया और कहा देखिए यहां पर हजारों लोग चल रहे हैं, धक्का लगेगा, लोगों को चोट लगेगी, बहुत भीड़ है, हमे एक काम करना है, मेरे साइड में, मेरे 20-25 फुट आगे, जो जगह खाली है उसमे हिंदुस्तान के लोग आएंगे, हमसे मिलने आएंगे, अगले चार महीने में वह हमारा घर है। यह घर हमारे साथ चलेगा। मैंने सबसे कहा देखिए इस घर में जो भी आएगा, अमीर हो, गरीब हो, बुजुर्ग हो, युवा हो, बच्चा हो, किसी भी धर्म का हो, राज्य का हो, हिंदुस्तान के बाहर का हो, जानवर हो, उसको यह लगना चाहिए, मैं अपने घर आया हूं। जब वह यहां से जाए उसे लगना चाहिए मैं अपने घर को छोड़कर जा रहा हूं। जिस दिन मैने यह किया, यह यात्रा बदल गई, जादू से बदल गई। लोग मेरे साथ राजनीतिक बात नहीं कर रहे थे, मैंने क्या क्या सुना है मैं आपको बता नहीं सकता हूं।

एक दिन हम सुबह चल रहे थे, साइड में एक महिला भीड़ में खड़ी थी, जैसे ही मैंने उसे देखा, मैंने बुलाया, मेरे पास आई मैंने हाथ पकड़ा, मुझे पता चल गया कि कुछ ना कुछ गलत है। जैसे मैं प्रियंका का हाथ पकड़ता हूं, वैसे ही मैंने उसका हाथ पकड़ा। जो प्यार मैं अपनी बहन को देता हूं, वही मैं उसे दे रहा था। उसने मेरा हाथ पकड़ा और कहा भइया मैं आपसे मिलने आई हूं, मेरा पति मुझे मार रहा है, मैं घर से भागी हूं, आपसे मिलने। पुलिस को मत बुलाइए मैं, वापस जा रही हूं पिटने, मैं आपको यहां बताने आई हूं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+