Rahul Gandhi Dinner: AAP से लेकर TMC तक! राहुल गांधी की डिनर डिप्लोमैस में कौन-कौन आएगा? क्या हैं इसके मायनें
Rahul Gandhi Dinner: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Elections 2025) से ठीक पहले विपक्षी गठबंधन INDIA में नई ऊर्जा भरने की कोशिशें तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) आज, 7 अगस्त को दिल्ली स्थित अपने आवास पर एक महत्वपूर्ण डिनर मीटिंग की मेजबानी करने जा रहे हैं, जिसमें विपक्ष के बड़े नेता शामिल होंगे।
इस मीटिंग का उद्देश्य आगामी बिहार चुनाव 2025, उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 के लिए साझा उम्मीदवार पर चर्चा करना और बिहार में चुनावी मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ साझा रणनीति बनाना है।

Rahul Gandhi Dinner Diplomacy: राहुल गांधी ने क्यों ली पहल?
लोकसभा चुनाव के बाद से INDIA गठबंधन बिखरा-बिखरा नजर आ रहा था। कई दलों ने कांग्रेस पर निष्क्रियता और नेतृत्व की कमी के आरोप लगाए थे। लेकिन अब राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बार फिर विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश शुरू कर दी है।
संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्षी दलों की ऑनलाइन मीटिंग, फिर संसद के भीतर समन्वय और अब यह डिनर मीटिंग- (opposition leaders dinner) यह सारे संकेत हैं कि कांग्रेस अब सक्रिय मोड में है।
Opposition Leaders Dinner में कौन-कौन होंगे शामिल?
राहुल गांधी की इस डिनर मीटिंग में विपक्ष के कई बड़े चेहरों के शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है:
- उद्धव ठाकरे
- अखिलेश यादव
- अभिषेक बनर्जी
- डीएमके से कनिमोझी
- तेजस्वी यादव
- एम ए बेबी
- डी. राजा
- दीपंकर भट्टाचार्य
- फारूक अब्दुल्ला
- महबूबा मुफ्ती
इसके अलावा जेएमएम, आईयूएमएल, केरल कांग्रेस (मणि), आरएसपी, फॉरवर्ड ब्लॉक जैसे करीब दस अन्य क्षेत्रीय दलों के नेता भी इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होंगे। सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इस डिनर में शामिल होंगे। साथ ही कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस बैठक में भाग ले सकते हैं।
Rahul Gandhi के इस डिनर में कौन नहीं आएगा?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से उनका आना संभव नहीं है। आम आदमी पार्टी पहले ही गठबंधन से दूरी बना चुकी है और टीएमसी के कुछ नेताओं की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है।
डिनर के अगले दिन होगा EC ऑफिस पर प्रदर्शन
खास बात यह है कि डिनर मीटिंग के अगले दिन, यानी 8 अगस्त को INDIA गठबंधन के नेता एकजुट होकर दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर तक विरोध मार्च निकालेंगे। यह मार्च विपक्षी दलों की ओर से SIR के खिलाफ एक सशक्त संदेश होगा, जिसमें वे इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहे हैं।
क्या हैं इस डिनर के मायने?
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो यह डिनर सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि विपक्ष की नई दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है। उपराष्ट्रपति चुनाव, SIR पर विरोध, और संसद में समन्वय-इन तीनों मोर्चों पर साझा रणनीति बनाना जरूरी है, क्योंकि विपक्ष का मानना है कि लोकतंत्र के मौजूदा स्वरूप पर सवाल खड़े हो चुके हैं।
राहुल गांधी की डिनर डिप्लोमेसी ने एक बार फिर विपक्ष को एक मंच पर लाने की उम्मीदें जगा दी हैं। यदि यह पहल सफल रही, तो यह न केवल उपराष्ट्रपति चुनाव में असर डालेगी, बल्कि भविष्य में विपक्ष को एकजुट रखने में भी मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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