गुजरात-हिमाचल के परिणाम से पहले इसलिए बनाया जा रहा है राहुल को कांग्रेस अध्यक्ष
गुजरात चुनाव को लेकर कांग्रेस में संशय बना हुआ है। कांग्रेस को यकीन नहीं है कि गुजरात विधानसभा में वो नरेन्द्र मोदी और अमित शाह का तिलिस्म तोड़ पाएगी।
नई दिल्ली। गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव के परिणाम चाहे कांग्रेस के पक्ष में आए या फिर खिलाफ जाए। एक बात तो तय होती जा रही है कि अब कांग्रेस के युवराज ही कांग्रेस के शहंशाह होंगे। कांग्रेस अपने युवराज को सरताज बनाने की तैयारी में जुट गई है। विधानसभा चुनावों के परिणाम से ऐन पहले राहुल गांधी को पार्टी आलाकमान की कुर्सी सौंपी जा सकती है। जिसकी औपचारिक शुरुआत दिल्ली में कांग्रेस की सबसे ताकतवर कमेटी यानि CWC की बैठक में हो गई है। सवाल है कि राहुल की ताजपोशी के लिए ये समय क्यों चुना गया है। ये एक इत्तेफाक है या फिर सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।

बिकने लगा है 'राहुल ब्रांड'
गुजरात के सियासी रण में राहुल जिस रंग में दिख रहे हैं वो रंग अब और कांग्रेस के सिर चढ़ कर बोलने वाला है ऐसा कांग्रेस आलाकमान को लग रहा है। गुजरात चुनाव में राहुल गांधी ने जिस तरह का प्रचार किया उससे कांग्रेस बीजेपी के मुकाबले लड़ाई में आ गई। ये उत्साह नतीजो के बाद ठंडा ना पड़ जाए इसलिए रणनीति के तहत गुजरात के नतीजो से पहले राहुल गांधी उपाध्यक्ष से अध्यक्ष बनाया जाएगा। कांग्रेस का एक धड़ा मानता है कि गुजरात में पार्टी बीजेपी को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में हैं और राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में और उत्साह भर जाएगा। जिससे गुजरात में बाजी पलटने की स्थिति बन जाएगी। मतलब गुजरात में वोटिंग से पहले राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया शुरू कर कांग्रेस राहुल गांधी को मजबूत करना चाहती है और वोटरों को लुभाना चाहती है। ये भी गुजरात प्लान का एक हिस्सा माना जा सकता है।

प्लान A और B दोनों है तैयार
गुजरात चुनाव को लेकर कांग्रेस में संशय बना हुआ है। कांग्रेस को यकीन नहीं है कि गुजरात विधानसभा में वो नरेन्द्र मोदी और अमित शाह का तिलिस्म तोड़ पाएगी। इसलिए चुनाव के नतीजे आने से पहले राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष की गद्दी सौंपने की तैयारी है। गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव के नतीजे अगर कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो राहुल गांधी हीरो के रूप में पेश किए जाएंगे और कांग्रेस 2019 की तैयारी में लग जाएगी। वहीं अगर पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहता है तो राहुल गांधी सीधे तौर पर जिम्मेवारी लेंगे जिससे राहुल गांधी पर जो गैर जिम्मेवार राजनेता होने का आरोप लगता है वो खत्म होगा।

राहुल का कांग्रेस का सरताज यूं ही नहीं बनाया जा रहा
पहली बार गुजरात चुनाव में राहुल गांधी दौरों और भाषणों से विपक्ष गंभीर हुआ है और उनकी परिपक्वता और नए अंदाज को लोग पसंद कर रहे हैं। गुजरात चुनावों में राहुल की सभा में काफी भीड़ देखने को मिल रही है। कांग्रेस को लग रहा है कि अभी देश की सियासी हवा राहुल के पक्ष में है। कांग्रेस गुजरात में कांग्रेस चुनाव फतह कर लेती है तो फिर राहुल गांधी के नेतृत्व में बेहतरीन शुरूआत हो जाएगी और पार्टी के हौंसले बुलंदी की ओर बढ़ जाएंगे। गुजरात में जिस तरह से पार्टी ने जातिगत समीकरण और नरम हिंदुत्व का कार्ड खेला है उससे पार्टी काफी आशान्वित है। इसी वजह से गुजरात का चुनाव पिछले चुनावों की तुलना में ज्यादा दिलचस्प हो गया है। यही नहीं जिस तरह राहुल ने भी राज्य के धुआंधार दौरे किए हैं और उनमें मुद्दे उठाए हैं इससे पार्टी के उस धड़े की बात को महत्व मिला है जो गुजरात चुनाव के पहले ही उनकी ताजपोशी चाहते हैं।

राहुल का राजनीतिक सफर
साल 2004 में अमेठी से लोकसभा चुनाव जीतकर राजनीतिक कॅरियर की शुरूआत करने वाले राहुल गांधी ने 2007 में बतौर कांग्रेस महासचिव संगठन में जिम्मेदारी संभाली थी।यूपीए की 10 साल की सत्ता के दौरान उन्हें कई बार मनमोहन सिंह ने अपनी कैबिनेट में शामिल करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन राहुल ने इसके लिए कई बार मना किया। वहीं 2012 में तो कांग्रेस के एक वर्ग ने उन्हें मनमोहन की जगह पीएम बनाने की मांग तक कर डाली। जयपुर में जनवरी 2013 में राहुल को औपचारिक रुप से सोनिया गांधी का उत्तराधिकारी बनाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष बनाया गया। वहीं अब साल 2017 के अंत में राहुल गांधी सोनिया गांधी के बाद कांग्रेस की कमान समंभालने जा रहे हैं। इसको लेकर कई सालों से मांग उठ रही थी। कई वरिष्ठ नेता इसकी वकालत भी कर चुके हैं।












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