Raghav Chadha Controversy: 'डरपोक नेता देश की लड़ाई नहीं लड़ सकते!', अनुराग ढांडा का राघव चड्ढा को 'खुला चैलेंज'
Raghav Chadha Controversy: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर इन दिनों सब कुछ सामान्य नजर नहीं आ रहा है। पार्टी के भीतर की खींचतान अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच गई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के हालिया बयानों और एक वीडियो के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेता खुलकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से लेकर दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज और वरिष्ठ नेता अनुराग ढांडा तक, सभी ने चड्ढा की कार्यशैली और संसद में उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह आंतरिक विवाद तब और गहरा गया जब नेताओं ने चड्ढा पर पार्टी लाइन से अलग चलने और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया।

अनुराग ढांडा का सीधा हमला, "डरने वाला देश के लिए क्या लड़ेगा?"
AAP नेता अनुराग ढांडा ने राघव चड्ढा पर तीखा प्रहार करते हुए उनके साहस पर सवाल उठाए। ढांडा ने स्पष्ट लहजे में कहा कि जो नेता विपरीत परिस्थितियों में डर जाए, वह देश की लड़ाई कैसे लड़ सकता है। उन्होंने कहा, "सांसदों को संसद में बहुत सीमित समय मिलता है, जिसका उपयोग केवल बड़े और जनहित के मुद्दों पर होना चाहिए।"
ढांडा ने सोशल मीडिया के जरिए पूछा कि क्या एक सांसद का काम सिर्फ छोटे मुद्दों तक सीमित रह गया है? उन्होंने लिखा, "हम केजरीवाल के सिपाही हैं। निडरता पहली पहचान है हमारी। कोई मोदी से डर जाए तो लड़ेगा क्या देश के लिए?
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संसद में थोड़ा सा समय मिलता है बोलने का पार्टी को, उसमें या तो देश बचाने का संघर्ष कर सकते हैं या एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने का। गुजरात में हमारे सैंकड़ों कार्यकर्ता बीजेपी की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिए, क्या सांसद साहब सदन में कुछ बोले?
पश्चिम बंगाल में वोट का अधिकार छीना जा रहा है। सदन में प्रस्ताव आया CEC के खिलाफ तो भाई साहब ने साइन करने से मना कर दिया। पार्टी ने सदन से वाकआउट किया तो मोदी जी की हाज़िरी लगाने के लिए बैठे रहते हैं।
पिछले कुछ सालों से तुम डर गए हो राघव। मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो। देश के असली मुद्दों पर बोलने से घबराते हो। जो डर गया वो....."
हम केजरीवाल के सिपाही हैं। निडरता पहली पहचान है हमारी।
कोई मोदी से डर जाए तो लड़ेगा क्या देश के लिए?
संसद में थोड़ा सा समय मिलता है बोलने का पार्टी को, उसमें या तो देश बचाने का संघर्ष कर सकते हैं या एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने का।
गुजरात में हमारे सैंकड़ों…
— Anurag Dhanda (@anuragdhanda) April 3, 2026
संसद में भूमिका और चुप्पी पर सवाल
ढांडा ने आरोप लगाया कि जब देश के सामने गंभीर चुनौतियां थीं, तब राघव चड्ढा ने संसद में मुखरता नहीं दिखाई। उन्होंने विशेष रूप से दो घटनाओं का जिक्र किया, गुजरात में पार्टी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर संसद में आवाज क्यों नहीं उठाई गई? पश्चिम बंगाल के संदर्भ में जब चुनाव आयोग से जुड़े प्रस्ताव पर समर्थन की आवश्यकता थी, तब चड्ढा ने दूरी क्यों बनाए रखी?
भगवंत मान की कड़ी चेतावनी
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस विवाद पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने इशारों में अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि यदि कोई नेता पार्टी की तय लाइन से हटकर काम करता है, तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है। मान ने सवाल उठाया कि जब पार्टी किसी खास विषय पर बोलने का निर्णय लेती है और कोई नेता उससे अलग रुख अपनाता है, तो यह संदेह पैदा करता है कि वह आखिर किसके हितों के लिए बोल रहा है।
वॉकआउट और वफादारी पर संशय
विवाद का एक बड़ा केंद्र संसद से 'वॉकआउट' की घटना भी है। पार्टी के अन्य नेताओं का आरोप है कि जब 'आप' ने विरोध स्वरूप सदन से बाहर जाने का फैसला किया, तब भी राघव चड्ढा सदन के भीतर ही बैठे रहे। इस व्यवहार को पार्टी के सामूहिक निर्णय की अवहेलना के तौर पर देखा जा रहा है।
सौरभ भारद्वाज का तंज, "संसद की गंभीरता गायब"
दिल्ली सरकार के कद्दावर मंत्री सौरभ भारद्वाज ने भी बहती गंगा में हाथ धोते हुए चड्ढा पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि संसद जैसे गरिमामय मंच का उपयोग लोकतंत्र और कार्यकर्ताओं से जुड़े गंभीर मामलों के लिए होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा होता नहीं दिख रहा है। भारद्वाज ने सीधे तौर पर पूछा कि क्या जमीन पर लड़ने वाले कार्यकर्ताओं की आवाज को सदन में पर्याप्त स्थान मिला?
With AI Inputs
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