राफेल डील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा, जानिए

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    Rafale Deal पर Modi Government को बड़ा झटका, Superme Court फिर करेगा सुनवाई | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। राफेल डील मामले में केंद्र की मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट राफेल मामले में दोबारा सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। राफेल मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की आपत्तियों को खारिज कर दिया और तीन दस्तावेजों की वैधता को मंजूरी दे दी। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय बेंच ने कहा कि जो दस्तावेज सामने आए हैं, उनके आधार पर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होगी। जानिए, और कहा सुप्रीम कोर्ट ने..

    राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट में दोबारा होगी सुनवाई

    राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट में दोबारा होगी सुनवाई

    राफेल मामले पर करीब-करीब पूरा विपक्ष मोदी सरकार को घेरता रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लीक हुए दस्तावेजों की वैधता पर आने वाले फैसले पर सभी की निगाहें टिकी थी। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा राफेल से जुड़े जो दस्तावेज आए हैं, वे सुनवाई का हिस्सा होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां तक ​​राफेल मामले में पुनर्विचार याचिका की सुनवाई का सवाल है, इसपर बाद में विस्तृत सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख तय करेगा।

    सरकार को बड़ा झटका, लीक हुए दस्तावेज होंगे मान्य

    सरकार को बड़ा झटका, लीक हुए दस्तावेज होंगे मान्य

    इस मामले में याचिकाकर्ता अरुण शौरी ने कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'हमारा तर्क यह था कि ये दस्तावेज रक्षा (मंत्रालय) से संबंधित हैं, इसलिए कोर्ट को इसे देखना चाहिए। आपने इन साक्ष्यों के लिए कहा और हमने इसे आपके सामने रखा। सुप्रीम कोर्ट ने हमारी दलीलों को स्वीकार कर लिया और सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया।' उन्होंने कहा कि अब पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के लिए कोर्ट अगली तारीख तय करेगा। प्रशांत भूषण ने भी इसपर ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि द हिंदू, और कैरवां द्वारा छापे गए दस्तावेजों को लेकर सरकार की आपत्तियों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। अब हमारी पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होगी।

    सरकार ने याचिका खारिज करने की मांग की थी

    राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 14 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि जो दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए, उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त है, जिन्हें भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के तहत सबूत नहीं माना जा सकता है। इन दस्तावेजों को गोपनीयता के अधिनियम के तहत संरक्षित किया जाता है। कोर्ट ने सरकार की इन दलीलों को आज खारिज कर दिया।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दायर की गई थी पुनर्विचार याचिका

    इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस मामले में धांधली की गई और भ्रष्टाचार हुआ है। साथ ही उनका कहना है कि भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए किसी भी कागज को कोर्ट में पेश किया जा सकता है, वह चाहे जैसे भी हासिल किया गया हो। लिहाजा कोर्ट को इन दस्तावेजों पर गौर करना चाहिए। साथ ही कहा गया है कि किसी भी विभाग के अदर अगर भ्रष्टाचार को सामने लाने के लिए कोई गोपनीय तरीके से दस्तावेज देता है तो उसकी पहचान को उजागर नहीं करना चाहिए।

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