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जेल से निकलने में मददगार साबित हुआ मोटापा, हाईकोर्ट के जज ने दे दी बेल

दुनियाभर में मोटापा एक एक बड़ी बीमारी बनकर उभरा है। मोटापे के चलते करोड़ों लोग परेशान है। लेकिन एक शख्स के लिए मोटापा वरदान साबित हुआ है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने जेल में बंद एक शख्स को उसके बढ़ते वजन के देखते हुए उसे जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि, मोटापा केवल एक लक्षण नहीं है, बल्कि स्वयं एक बीमारी है जो कई अन्य बीमारियों का मूल कारण बन जाती है।

मोटापा आया काम

मोटापा आया काम

न्यायमूर्ति जीएस गिल धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जेल में बंद एक व्यक्ति द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। मनी लॉन्ड्रिंग के इस आरोपी पर 2002 की धारा 45(1) में मामला दर्ज है। जिस शख्स को हाईकोर्ट से जमानत मिली है। उसका वजन 153 किलो है। इस मामले में बंद शख्स के वकील ने कोर्ट के सामने अपने क्लाइंट की इस तकलीफ का जिक्र किया।

मोटापा कई बीमारियों का जड़: हाईकोर्ट

मोटापा कई बीमारियों का जड़: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि, इस तरह की सह-रुग्णताओं के चलते शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। मोटापे के शिकार कई बीमारियों वाले रोगी को जेल डॉक्टर या एक सिविल अस्पताल इलाज देने में सक्षम नहीं होते हैं। इस बीमारी में चिकित्सा उपचार के अलावा एक निश्चित स्तर की निगरानी, देखभाल और ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है जो आमतौर पर जेल में उपलब्ध नहीं होती है।

पोंजी स्कैम का आरोपी है याचिकाकर्ता

पोंजी स्कैम का आरोपी है याचिकाकर्ता

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता "बीमार" होने के अपवाद में आता है। उसके मोटापे को ध्यान में रखते हुए वह जमानत का हकदार है। याचिकाकर्ता पर विभिन्न राज्यों में ₹3,000 करोड़ की पोंजी स्कैम चलाने का आरोपी है। इस स्कैम में उसने 33 लाख लोगों को धोखा दिया गया था। ईडी के मुताबिक इस शख्स ने घोटाले के जरिए 53 करोड़ रुपये का फायदा उठाया।

मुवक्किल का वजन 153 किलोग्राम

मुवक्किल का वजन 153 किलोग्राम

कोर्ट में याचिकाकर्ता ने खुद को एक सॉफ्टवेयर डेवलपर बताया है। उनके दावा किया है कि, इस तरह के सभी भुगतान उसे पेशेवर शुल्क के रूप में दिए गए थे। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि, उसके मुवक्किल का वजन 153 किलोग्राम है। उसे विभिन्न चिकित्सा समस्याएं हैं और उसका स्वास्थ्य दिन पर दिन बिगड़ता जा रहा है। इन परिस्थितियों में उनकी आगे की हिरासत घातक साबित हो सकती है। जिसे कोर्ट ने जायज माना और उसे जमानत दे दी।

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