पुलवामा हमले के 5 महीने बाद सामने आई फॉरेंसिक रिपोर्ट, विस्फोटक को लेकर चौंकाने वाला खुलासा

नई दिल्ली। 14 फरवरी, 2019 का वो काला दिन जब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले ने 40 जवानों की जान ले ली थी, इसके करीब 5 महीनों बाद फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। पुलवामा हमले की साजिश आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने रची थी और सीआरपीएफ इस हमले में भारी मात्रा में विस्फोटकों का इस्तेमाल किया गया था।

विस्फोटक 'आरडीएक्स' और 'अमोनियम नाइट्रेट' का मिश्रण था

विस्फोटक 'आरडीएक्स' और 'अमोनियम नाइट्रेट' का मिश्रण था

हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) के विशेषज्ञों, जो केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधीन काम करते हैं, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि 14 फरवरी के आत्मघाती बम विस्फोट में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक 'आरडीएक्स' और 'अमोनियम नाइट्रेट' का मिश्रण था, जिसे मारुति ईको कार में रखे जाने से पहले एक जेरी में असेंबल किया गया था।

फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

एनआईए के एक अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा, हमें फाइनल रिपोर्ट मिल गई है। चार्जशीट में यह सबसे महत्वपूर्ण सबूत साबित होगा। अधिकारी ने कहा कि चार्जशीट जल्द ही दायर की जाएगी। फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर जांच करने वालों का मानना ​​है कि धमाके के प्रभाव को बढ़ाने के लिए जैश-ए-मोहम्मद ने बम में आरडीएक्स को मिलाया गया था। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि विस्फोट का प्रभाव ऐसा था कि सब कुछ पिघल गया। विस्फोट की गूंज स्थानीय लोगों ने कई किलोमीटर दूर से सुनी थी और मौके से डीएनए के नमूने लेने में फॉरेंसिक विशेषज्ञों को कई दिन लग गए थे।

मिलिट्री ग्रेड आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया

मिलिट्री ग्रेड आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया

भारतीय खुफिया एजेंसियों ने जांच करने वाली टीम को बताया कि पुलवामा हमले में मिलिट्री ग्रेड आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था और ये विस्फोटक पाकिस्तानी सेना द्वारा आतंकवादी संगठनों को मुहैया कराया गया था। उन्होंने ये भी कहा कि हमले से पहले इस विस्फोटक को कई हिस्सों में भारत लाया गया था। हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक की मात्रा के बारे में पूछे जाने पर दूसरे अधिकारी ने कहा कि इस तरह के विस्फोटों में आमतौर पर अनुमान लगाया जाता है, लेकिन इस हमले में 30 से 50 किलो तक विस्फोटक जैरी कैन में असेंबल किए गए थे।

आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान हुए थे शहीद

आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान हुए थे शहीद

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आत्मघाती हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी आदिल अहमद उर्फ वकास विस्फोटकों से भरी गाड़ी लेकर जवानों की बस से टकरा गया और देखते ही देखते इस हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे। जबकि इस हमले के 12 दिनों के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जैश के ठिकानों पर बमबारी की थी जिसमें बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए थे।

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