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Pulwama Attack 7th Anniversary: शहादत के 7 साल! जब 40 जवानों के लहू से लाल हुई थी घाटी, आज भी जिंदा है वो दर्द

Pulwama Attack 7th Anniversary: आज 14 फरवरी 2026 है। कैलेंडर के पन्नों पर भले ही दुनिया आज प्यार का इजहार कर रही हो, लेकिन भारत के लिए यह 'ब्लैक डे' (काला दिवस) है। ठीक सात साल पहले, आज ही के दिन जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर बारूद के एक धमाके ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के 40 जांबाज जवानों ने भारत मां से अपने प्यार का इजहार करते हुए शहादत दी थी।

इस दिन हिंदुस्तान ने आतंक के सबसे खतरानक रुप का दर्द झेला जिसकी टीस सात साल बाद आज भी हर देशवासी के रगों में सिहरन पैदा कर देती है। यह तारीख भारतीय इतिहास के उन सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुआ यह हमला आज भी हर भारतीय के दिल में एक गहरी टीस छोड़ जाता है।

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आज, पुलवामा हमले को सात साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन उस दिन की तस्वीरें, वो धमाका, हवा को चीरती उन 40 वीर सपूतों के परिजनों की चीखें और तिरंगे में लिपटे शहीदों के पार्थिव शरीर आज भी देश की स्मृति में हैं।

Pulwama Attack 14 फरवरी 2019 को दोपहर के 3 बजकर 33 मिनट पर हुआ हमला

उस दिन भी भारत में एक सामान्य दोपहर थी। सीआरपीएफ का एक बड़ा काफिला जम्मू से श्रीनगर की ओर बढ़ रहा था। इस काफिले में करीब 78 बसें थीं, जिनमें 2500 से अधिक जवान सवार थे। जैसे ही काफिला पुलवामा के लेथपोरा के पास पहुंचा, अचानक उलटी दिशा से आती एक एसयूवी (SUV) बस से टकरा गई। पलक झपकते ही एक जोरदार ब्लास्ट हुआ।

यह एक आत्मघाती हमला था और उस गाड़ी को आदिल अहमद डार नामक आत्मघाती हमलावर चला रहा था, जो जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा था। गाड़ी विस्फोटकों से लदी हुई थी। धमाका इतना जोरदार था कि बस के परखच्चे उड़ गए और उसकी गूंज कई किलोमीटर तक सुनाई दी। इस हमले में हमने अपने 40 वीर जवानों को खो दिया।

हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का हाथ सामने आया। संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। आत्मघाती हमलावर की पहचान आदिल अहमद डार के रूप में हुई, जो कश्मीर का ही निवासी था और जैश से जुड़ा हुआ था। इस खुलासे के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में जबरदस्त तनाव देखने को मिला।

Balakot Airstrike History: देश का गुस्सा और 'ऑपरेशन बालाकोट'

पुलवामा हमले के बाद पूरे देश में गम और गुस्से की लहर दौड़ गई थी। सरकार ने साफ कर दिया था कि "जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।" हमले के ठीक 12 दिन बाद, यानी 26 फरवरी 2019 की रात भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। मिराज-2000 विमानों ने आतंकियों के ट्रेनिंग कैंपों को मलबे में तब्दील कर दिया, जिसे भारत के सैन्य कौशल और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

7 साल बाद की तस्वीर: घाटी में सुरक्षा के कड़े पहरे

आज सातवीं बरसी पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त है। श्रीनगर और अन्य व्यस्त इलाकों में जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल सरप्राइज चेकिंग कर रहे हैं। पुलवामा हमले के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब काफिले की सुरक्षा के लिए ड्रोन, सीसीटीवी और बेहतर इंटेलिजेंस इनपुट का सहारा लिया जाता है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में आतंकवाद पर कड़ा प्रहार हुआ है, लेकिन 14 फरवरी की याद आज भी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखती है।

पुलवामा हमले के बाद से हर साल 14 फरवरी को 'ब्लैक डे' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन न सिर्फ शोक का प्रतीक है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ देश की एकजुटता और संकल्प को भी दर्शाता है। देश आज भी उन 40 शहीदों को याद करता है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

शहीदों को नमन: कभी न मिटने वाली याद

पुलवामा के शहीदों की याद में देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, हर भारतीय उन 40 नामों को याद कर रहा है जिन्होंने तिरंगे की आन के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी। भारत अपने वीर सपुतों के साहस को सलाम करते हुए दोहराया है कि उनका बलिदान राष्ट्र की स्मृति में हमेशा जीवित रहेगा।

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