Coronavirus crisis: अगर इस ब्लड ग्रुप वाले हैं तो वायरस से कम खतरे में हैं आप?
बेंगलुरू। कोरोना वायरस का संकट तेजी से बढ़ता जा रहा है। चीन से फैली यह महामारी अब तक कुल 176 देशों में पहुंच चुकी है और महामारी में हुई मौत के आकंड़े ने अब 9000 पार कर लिया है। इस घातक विषाणु से वैश्विक आपदा झेल रही मानवजाति अभी तक इससे निपटने का तोड़ ईजाद नहीं कर पाई है, जिससे लगातार संक्रमित लोगों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है।

गौरतलब है अब तक विश्व भर में करोनावायरस संक्रमित करीब दो लाख से अधिक लोग पाए जा चुके है, जिनमें में 6, 887 संक्रमित मरीज की हालत बेहद गंभीर हैं। यह वायरस कमजोर रोग प्रतिरोगी क्षमता वाले लोगों पर अधिक प्रभावी होती है। यही कारण है कि कोरोनावायरस बुजुर्ग या बड़ी उम्र के लोगों के लिए अधिक जानलेवा साबित हुई है। भारत में कोरोनोवायरस संक्रमण से मरने वाले तीनों मरीज भी संयोग से बुजुर्ग ही थे।

Recommended Video
दरअसल, कमजोर रोग प्रतिरोधी क्षमता मरीजों पर कोरोना वायरस अधिक हावी होता है, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं। एक चीनी रिसर्च के मुताबिक A ब्लड ग्रुप वाले लोगों को कोरोना वायरस से अधिक खतरा है जबकि O ब्लड ग्रुप वाले कोरोना वायरस का कम खतरा होता है, क्योंकि O ब्लड ग्रुप वाले कोरोना वायरस के प्रतिरोधी हो सकते हैं।

उधर, ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने रिसर्च में इसकी पहचान कर ली है कि मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना का कैसे मुकाबला करती है। उक्त शोध नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित किया गया है। चीन समेत कई देशों में लोगों के कोरोना वायरस संक्रमण से उबरने की खबर आने के बाद शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया कि आखिर मानव शरीर का सुरक्षा तंत्र इस वायरस से कैसे लड़ता है और कैसे उसे हरा पाता है।

प्रोफेसर कैथरीन केडजिएर्स्का के मुताबिक, यह एक बेहद महत्वपूर्ण खोज है, क्योंकि हमें पहली बार शोध से यह पता चल पा रहा है कि हमारा शरीर (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कोरोना वायरस से कैसे लड़ता है। इस रिसर्च से कोरोना वायरस से लड़ाई में काफी मदद मिलेगी और कोरोना वायरस के रहस्य भी खुल सकेंगे।

चीन के हुबेई प्रांत जिनइंतान अस्पताल को शोधकर्ताओं के मुताबिक चीन कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों में अधिक संख्या A ब्लड ग्रुप वालों की थी। साथ ही, रिसर्च में यह भी पाया गया कि A ब्लड ग्रुप वाले लोग इसकी चपेट में ज्यादा आए। कोरोनावायरस के संक्रमण से मरने वालों में A ब्लड ग्रुप वालों की संख्या ज्यादा था जबकि उनकी तुलना में O ब्लड ग्रुप वाले की तादाद कम पाई गई। यह रिसर्च ब्रिटिश अखबार डेली मेल द्वारा प्रकाशित की गई है।

आस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों के शोध में चार प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाओं की पहचान की गई है, जो कोरोना से लड़ने में सक्षम पाई गईं है। शोधकर्ताओं के मुताबिक जब संक्रमित की स्थिति में सुधार आने लगता है, तो उनके खून के बहाव में कुछ विशिष्ट प्रकार की कोशिकाओं को देखा गया, जो कुछ उसी तरह की कोशिकाएं थीं, जो इंफ्लूएंजा के मरीजों में ठीक होने से पहले दिखाई देती हैं।

सेंटर फॉर एविडेंस बेस्ड एंड ट्रांसलेशनल मेडिसिन में की गई रिसर्च कहती है कि टाइप A ब्लड ग्रुप वालों की रोग प्रतिरोधी क्षमता कोरोना वायरस से लड़ने में ज्यादा सक्षम है जबकि A ब्लड ग्रुप वाले इसके आसान शिकार हो जाते हैं।दिसंबर माह में चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस संक्रमण की पहली घटना सामने आई थी और वर्तमान में यह 176 देशों में फैल चुका है, जिसका इलाज अभी तक सिर्फ बचाव तक ही केंद्रित हैं।

उल्लेखनीय है कोरोना वायरस के विभिन्न ब्लड ग्रुप के मरीजों पर होने वाले प्रभाव पर रिसर्च में वुहान और शेनझेन में 2,173 संक्रमित और 3,694 स्वस्थ्य लोगों के ब्लड ग्रुप की तुलना कर यह दावा किया है। उसके अनुसार, वुहान के 31.16 फीसदी कोरोनावायरस संक्रमित मरीज का ब्लड ग्रुप टाइप A था और वुहान के स्थानीय जिनयिंतन अस्पताल में भर्ती 37.75 फीसदी लोगों का भी ब्लड ग्रुप का टाइप A था। जबकि ब्लड ग्रुप टाइप O के महज 26 फीसदी लोग ही कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए थे।

स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में हेल्थ साइसेंज के डीन प्रोफेसर ब्रूस थॉम्पसन के मुताबिक ताजा शोध वायरस को पहचानने में मदद कर सकता है। प्रोफेसर ब्रूस के मुताबिक, जब आपको यह पता होता है कि विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं कब होंगी, तब यह पता लगाने में आसानी होती है कि आप इस वायरस और उसका काम करने के तरीके की पहचान करने के कितने करीब हैं।

वैज्ञानिकों के नए शोध पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य मंत्री ग्रेग हंट ने कहा इस खोज से कोरोना के लिए वैक्सीन बनाने की दिशा में तेजी आएगी और जल्द ही लोगों को इलाज मुहैया हो सकेगा। टीम अब यह पता लगा रही है कि जिन मामलों में संक्रमण काफी अधिक था उस समय प्रतिरक्षा प्रक्रिया क्यों कमजोर हो गई या क्यों नाकामयाब रही?
यह भी पढ़ें-Coronavirus: जानिए, कैसे संक्रमण के डर से घर में कैद हुए कई नामचीन बॉलीवुड सेलिब्रिटीज!

कमजोर रोग प्रतिरोधी क्षमता मरीजों पर कोरोना वायरस अधिक हावी
कमजोर रोग प्रतिरोधी क्षमता मरीजों पर कोरोना वायरस अधिक हावी होता है, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं। एक चीनी रिसर्च के मुताबिक A ब्लड ग्रुप वाले लोगों को कोरोना वायरस से अधिक खतरा है जबकि O ब्लड ग्रुप वाले कोरोना वायरस का कम खतरा होता है, क्योंकि O ब्लड ग्रुप वाले कोरोना वायरस के प्रतिरोधी हो सकते हैं। उधर, ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने इस बात की पहचान कर ली है कि मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना का मुकाबला कैसे करती है।

आखिर मानव शरीर का सुरक्षा तंत्र इस वायरस से कैसे लड़ता है
चीन समेत कई देशों में लोगों के कोरोना वायरस संक्रमण से उबरने की खबरें आने के बाद शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया कि आखिर मानव शरीर का सुरक्षा तंत्र इस वायरस से कैसे लड़ता है और कैसे उसे हरा पाता है। प्रोफेसर कैथरीन केडजिएर्स्का के मुताबिक, यह एक बेहद महत्वपूर्ण खोज है, क्योंकि हमें पहली बार शोध से यह पता चल पा रहा है कि हमारा शरीर (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कोरोना वायरस से कैसे लड़ता है। इस रिसर्च से कोरोना वायरस से लड़ाई में काफी मदद मिलेगी और कोरोना वायरस के रहस्य भी खुल सकेंगे।

चीन में कोरोना से मरने वालों में अधिक संख्या A ब्लड ग्रुप वालों की थी
चीन के हुबेई प्रांत जिनइंतान अस्पताल को शोधकर्ताओं के मुताबिक चीन कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों में अधिक संख्या A ब्लड ग्रुप वालों की थी। साथ ही, रिसर्च में यह भी पाया गया कि A ब्लड ग्रुप वाले लोग इसकी चपेट में ज्यादा आए। कोरोनावायरस के संक्रमण से मरने वालों में A ब्लड ग्रुप वालों की संख्या ज्यादा था जबकि उनकी तुलना में O ब्लड ग्रुप वाले की तादाद कम पाई गई। यह रिसर्च ब्रिटिश अखबार डेली मेल ने प्रकाशित की है। दिसंबर माह में चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस संक्रमण की पहली घटना सामने आई थी और वर्तमान में यह 176 देशों में फैल चुका है, जिसका इलाज अभी तक सिर्फ बचाव तक ही केंद्रित हैं।

O ब्लड ग्रुप के 26 फीसदी मरीज ही कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए
कोरोना वायरस के विभिन्न ब्लड ग्रुप के मरीजों पर होने वाले प्रभाव पर रिसर्च में वुहान और शेनझेन में 2,173 संक्रमित और 3,694 स्वस्थ्य लोगों के ब्लड ग्रुप की तुलना कर यह दावा किया है। उसके अनुसार, वुहान के 31.16 फीसदी कोरोनावायरस संक्रमित मरीज का ब्लड ग्रुप टाइप A था और वुहान के स्थानीय जिनयिंतन अस्पताल में भर्ती 37.75 फीसदी लोगों का भी ब्लड ग्रुप का टाइप A था। जबकि ब्लड ग्रुप टाइप O के महज 26 फीसदी लोग ही कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए थे।

वैज्ञानिक शोध में चार प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाओं की पहचान हुई
आस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों के शोध में चार प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाओं की पहचान की गई है, जो कोरोना से लड़ने में सक्षम पाई गईं है। शोधकर्ताओं के मुताबिक जब संक्रमित की स्थिति में सुधार आने लगता है, तो उनके खून के बहाव में कुछ विशिष्ट प्रकार की कोशिकाओं को देखा गया, जो कुछ उसी तरह की कोशिकाएं थीं, जो इंफ्लूएंजा के मरीजों में ठीक होने से पहले दिखाई देती हैं। सेंटर फॉर एविडेंस बेस्ड एंड ट्रांसलेशनल मेडिसिन में की गई रिसर्च कहती है कि टाइप A ब्लड ग्रुप वालों की रोग प्रतिरोधी क्षमता कोरोना वायरस से लड़ने में ज्यादा सक्षम है जबकि A ब्लड ग्रुप वाले इसके आसान शिकार हो जाते हैं।












Click it and Unblock the Notifications