लोकसभा चुनाव 2019: राजनांदगांव लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से मौजूदा सांसद अभिषेक सिंह हैं। अभिषेक सिंह पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार अभिषेक सिंह ने चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। राजनांदगांव लोकसभा सीट पर 1999 के बाद से बीजेपी का कब्जा रहा है। राजनांदगांव में 2014 के लोकसभा चुनाव में 15 लाख 88 हज़ार से ज्यादा मतदाता थे। इनमें महिला मतदाताओं की तादाद 7 लाख 93 हज़ार से ज्यादा थी। यहां महिला मतदाता पुरुषों से अधिक है। वोट डालने में पुरुष मतदाता ही ज्यादा रहे। 6 लाख से अधिक पुरुष वोटरों ने वोट डाले, जबकि महिला वोटरों की तादाद 5 लाख 76 हज़ार से ज्यादा रही। मतदान का प्रतिशत 74 फीसदी था।

profile of Rajnandgaon lok sabha constituency

राजनांदगांव लोकसभा सीट का इतिहास-

दिग्गज कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा भी राजनांदगांव से सांसद रह चुके हैं। वे दो बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। तब छत्तीसगढ़ भी उस मध्यप्रदेश का हिस्सा हुआ करता था। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह भी राजनांदगांव से सांसद रह चुके हैं। उन्होंने 1999 में मोतीलाल वोरा को हराकर यह सीट कांग्रेस से छीनी थी। कांग्रेस ने यह लोकसभा सीट 1957 के बाद से अब तक 9 बार जीती है। वहीं, जनता पार्टी ने एक बार और भारतीय जनता पार्टी ने 6 बार राजनांदगांव की सीट पर जीत दर्ज की है।

अभिषेक सिंह का लोकसभा में प्रदर्शन

पहली बार सांसद बने अभिषेक ने दिसंबर 2018 तक 17 बार सदन में हुई बहस में हिस्सा लिया। 370 सवाल उन्होंने सदन में पूछे। उनकी उपस्थिति 74 फीसदी रही।

राजनांदगांव लोकसभा सीट में विधानसभा की 8 सीटें हैं। इनमें कांग्रेस ने 6 सीटों पर कब्जा कर लिया है। इनमें शामिल हैं पंडरिया, कवर्धा, दोनागढ़, दोनागरगांव, खुज्जी और मोहल्ला-मानपुर शामिल हैं। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ को खैरागढ़ की सीट मिली, जबकि बीजेपी राजनांदगांव में ही जीत पा सकी। 2019 में राजनांदगांव में वोटरों की तादाद में 1 लाख 69 हज़ार 405 की बढ़ोतरी हो चुकी है। ये नये वोटर महत्वपूर्ण साबित होंगे। हालांकि विगत चुनाव में हार-जीत का अंतर इससे कहीं ज्यादा था। तब 2 लाख 35 हज़ार से ज्यादा वोटों से बीजेपी अभिषेक सिंह ने जीत दर्ज की थी। राजनांदगांव में आदिवासी वोटरों की तादाद 24 फीसदी है जबकि एससी यानी अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी 12 फीसदी है। शहरी आबादी इस संसदीय क्षेत्र में लगभग 85 फीसदी है।

राजनांदगांव सीट पर 2019 में जबरदस्त मुकाबला होने वाला है। रमन सिंह के बेटे ही नहीं, रमन सिंह के लिए भी यह सीट प्रतिष्ठा का विषय है। सम्भव है कि रमन सिंह ही एक बार फिर चुनाव मैदान में ताल ठोंकते नज़र आएं। वजह ये है कि बीजेपी अब जोखिम नहीं ले सकती। राजनांदगांव में 4 विधानसभा की सीट कांग्रेस के पास होने और राज्य में कांग्रेस की सरकार होने से स्थिति पलट चुकी है। यह बात भी महत्वपूर्ण रहेगी कि कांग्रेस इस सीट पर किसे मैदान में उतारती है। करुणा शुक्ला के अलावा कोई और बड़ा चेहरा हो, तो यह सीट कांग्रेस झटकने की उम्मीद कर सकती है।

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