लोकसभा चुनाव 2019: उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: नई दिल्ली की उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के मनोज तिवारी हैं। घनी आबादी वाले उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2014 में कुल वोटरों की संख्या 1,957,707 थी, जिसमें इस साल 15 से 20 प्रतिशत इजाफा होने की संभावना है। 2014 में यहां से 67 फीसदी वोट पड़े, जिनमें 741,003 पुरुष और 576,335 महिलाओं ने वोट डाला। इन्हीं वोटों की बदौलत मनोज तिवारी संसद पहुंचे। उन्हें कुल 596,125 वोट मिले। उन्होंने आम आदमी पार्टी के आनंद कुमार को 144,084 वोटों से हराया।

भाजपा के टिकट से पहली बार सांसद बने 47 वर्षीय भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनोज तिवारी ने मई 2014 से दिसंबर 2018 तक मात्र 10 परिचर्चाओं में हिस्सा लिया। जबकि दिल्ली स्टेट के सभी सांसदों का औसत 61.7 औरे राष्ट्रीय औसत 63.9 रहा। मनोज तिवारी एक भी प्रइवेट मेंबर बिल नहीं लाये जबकि दिल्ली के बाकी सांसदों ने राष्ट्रीय औसत 2 के मुकाबले 11 प्राइवेट मेंबर बिल पेश किये। खैर 79 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराने वाले सांसद मनोज तिवारी प्रश्न पूछने के मामले में काफी आगे रहे। उन्होंने कुल 239 सवाल पूछे। जो कि राज्य के 290 और देश के 273 सवालों के औसत के मुकाबले ठीक-ठाक कहा जायेगा। यह था सदन के भीतर मनोज तिवारी का प्रदर्शन अब अगर क्षेत्र में जायें, तो उन्होंने 25 करोड़ की आवंटित सांसद निधि के का भरपूर इस्तेमाल किया। तमाम विकास कार्य करवाये। और तो और उन्होंने केंद्र से उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लिये 15 करोड़ अतिरिक्त धनराशि की मांग की। जनवरी 2019 तक उनकी सांसद निधि में 3.24 करोड़ रुपए बचे रहे। मार्च के अंत तक वे इस धन को भी सभी विकास कार्यों में लगाना चाहेंगे।
ये लोकसभा सीट नये परिसीमन के चलते 2008 में यह सीट अस्तित्व में आयी। और 2009 में कांग्रेस के जेपी अग्रवाल यहां से पहले सांसद बने। उस दौरान कांग्रेस का वोट शेयर 59 प्रतिशत था, जो 2014 में गिर कर महज 16 फीसदी रह गया और कांग्रेस खिसक कर तीसरे नंबर पर आ गई। अरविंद केजरीवाल के असर के चेलते आप पार्टी ने 34 फीसदी तक वोट जुटाये, जबकि भाजपा 11 प्रतिशत के उछाल के साथ 45 फीसदी वोट खींचने में कामयाब रही। वोट मीटर की सुई बहुत तेजी से अलग-अलग पार्टियों की ओर घूम रही है। मीटर में फ्लक्चुएशन बरकरार है, जिसके चलते तमाम नेताओं की नींदें उड़ी हुई हैं। पिछली बार की तरह इस बार भी बाजी पलटेगी या नहीं, यह दिल्ली उत्तर पूर्वी की जनता तय करेगी।












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