जानिए उस शख्स के बारे में जिसने कन्नौज से हरा दिया डिंपल यादव को
नई दिल्ली। पिछले कई वर्षों से सपा का गढ़ रहे कन्नौज में भाजपा के सुब्रत पाठक ने अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को करारी शिकस्त दी। हालांकि हार का अंतर करीब 12 हजार मतों का ही रहा लेकिन इस हार से सपा को तगड़ा झटका लगा है। अजेय सीट मानी जाने वाली सीट पर सुब्रत पाठक ने एक नया इतिहास लिख दिया। कन्नौज लोकसभा सीट जीतने और सपा नेता डिंपल यादव को हराने पर भाजपा प्रत्याशी सुब्रत पाठक ने कहा कि यह कन्नौज की जनता की जीत है।

सुब्रत पाठक का कन्नौज से लोकसभा का ये तीसरा चुनाव था
सुब्रत पाठक का कन्नौज से लोकसभा का ये तीसरा चुनाव था। इससे पहले दो बार वे इस सीट से हार चुके थे। साल 2009 में अखिलेश यादव के सामने उन्होंने पहली बार ताल ठोंकी थी, मगर वे हार गए। इस चुनाव में अखिलेश को 3,37751 और सुब्रत को 1,50,872 वोट मिले। साल 2014 में उन्हें डिंपल से हार का सामना करना पड़ा। लेकिन 2019 में वे अपनी हार को जीत में बदलने में कामयाब रहे। सुब्रत भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। इस समय भाजपा के प्रदेश मंत्री हैं।

सुब्रत के खिलाफ नौ मुकदमें दर्ज हैं
39 साल के सुब्रत पाठक ने छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के सुंदरलाल मेमोरियल पोस्ट ग्रेजुएशन कॉलेज कन्नौज से आर्ट्स में स्नातक किया है। सुब्रत पाठक एक व्यवसायी है। उनकी कुल संपत्ति 5 करोड़ रुपए है। जबकि उन पर लगभग तीन करोड़ रुपए की देनदारियां हैं। सुब्रत के खिलाफ नौ मुकदमें दर्ज हैं। कन्नौज की लोकसभा सीट पर सपा ने 1998 से कब्जा जमाया हुआ है। सपा ने ये सीट भाजपा के सांसद चंद्रभूषण सिंह से छीनी थी। 1998 बाद के हुए लोकसभा के हर चुनाव में सपा ने इस सीट पर अपनी जीत बरकार रखी है। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बादजूद डिपंल यादव ने यहां से जीत दर्ज की थी।

पिछली बार डिंपल की जीत का अंतर था कम
पहली बार सांसद बने सुब्रत पाठक को 563087 वोट मिले थे। वहीं उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी व निर्वतमान सांसद डिंपल यादव को 550734 मत मिले। चर्चित कन्नौज सीट पर 11 लाख 40 हजार 985 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इसमें से 8165 मत नोटा के खाते में भी गए। 2014 के चुनाव में कन्नौज सीट से डिंपल यादव 4,89,164 मत पाकर सांसद बनी थीं। तब उन्होंने सुब्रत पाठक को ही 19907 मतों के अंतर से हराया था। सुब्रत को 4,69,257 वोट मिले थे।












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