लोकसभा चुनाव 2019: कोलार लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: कर्नाटक की कोलार लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद कांग्रेस के केएच मुनियप्पा हैं। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार एकेएच मुनियप्पा ने जेडीएस के कोलार केशव को मात दी थी। मुनियप्पा को 4,18,926 वोट्स मिले तो वहीं केशव को 3,71,076 वोट्स हासिल हुए थे। । कोलार की कुल आबादी 20,48, 640 है। इस आबादी में 70.36 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। वहीं शहरों में 29.64 प्रतिशत आबादी निवास करती है। एससी आबादी का प्रतिशत 29.64 है तो वहीं 6.39 प्रतिशत की आबादी एसटी है। कोलार में कुल मतदाताओं की संख्या 14,92,275 है। इसमें से 7,55, 450 पुरुष और 7,37, 525 महिला मतदाता हैं। यहां पर अब तक कांग्रेस अजेय पार्टी के तौर पर उभरी है।

कोलार लोकसभा सीट का इतिहास
कोलार में पहली बार सन् 1951 में वोट्स डाले गए थे।यह कर्नाटक राज्य की ऐसी सीट है, जहां पर अक्सर कांग्रेस का दबदबा रहा है। कांग्रेस को अब तक के लोकसभा चुनावों में यहां पर 15 बार जीत हासिल हई है। कर्नाटक का कोलार जिला भारत के पुराने स्थलों में से है। इस जगह के निर्माण में चोल और पल्लव का योगदान रहा है। मध्यकाल में यह विजयनगर के शासकों के अधीन रहा। कोलार में कई पर्यटन स्थल है जहां आप जा सकते हैं। हैदर अली के पिता का मकबरा कोलार की पुरानी इमारतों में से है।
कोलार , परिचय-प्रमुख बातें-
कोलार के इतिहास के बारे में कई कहानियां मशहूर हैं। कहा जाता है कि इस जगह का संबंध मुलबगल तालुक के अवनी से है। इसे अवनी क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि ऋषि वाल्मीकि यहां पर ठहरें थे। इसके अलावा श्रीराम लंका से अयोध्या वापस आ रहे थे तो वह भी कुछ समय के लिए यहां पर रूके थे। कुछ लोग यह भी कहते हैं भगवान राम ने जब माता सीता को ठुकरा दिया था तो वह अपने दोनों बेटों लव और कुश के साथ अवनी में ही शरण लेने आई थीं। बंगलोर के उत्तर-पूर्व में स्थित अपने सोने की खानों के लिए भी मशहूर है। सोने की खदानों के अलावा कोलार को दूध उत्पादन के लिए भी जाना जाता है। कुछ समय पहले ही कोलार ने दूध उत्पादन में डेनमार्क का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इसके अलावा कोलार को सिल्क और आम के उत्पादन के लिए भी प्रसिद्धि हासिल है। यह शहर सोमेश्वर मंदिर और कोलारम्मा मंदिरों के लिए भी जाना जाता है। कोलारम्मा को इस शहर की देवी के तौर पर भी जाना जाता है।
कोलार मे एक एपीएमसी मार्केट भी है जो एशिया में नंबर दो और दक्षिण भारत में नंबर वन है। कोलार में उत्पादित होने वाले आम, टमाटर और दूध को निर्यात, यूके, अमेरिका और यूएई जैसे देशों में होता है। कोलार की गोल्ड फील्ड्स, बेंगलुरु से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर है। एक दशक से भी ज्यादा समय से यह जगह गोल्ड माइनिंग के लिए मशहूर है। लेकिन साल 2001 में सोने के कम उत्पादन की वजह से खदानें बंद हो गईं। करीब 30,000 लोग रोजगार की तलाश में यहां से बेंगलुरु पहुंचे थे। लेकिन यहां पर स्थित सोने की खदानों की वजह से देश की पहली पावर जनरेशन यूनिट सन् 1900 में यहीं लगाई गई थी। गौतरलब है कि कांग्रेस इस सीट पर अजेय रही है। देखना है कि क्या साल 2019 के चुनाव में यहां इतिहास दोहराया जाएगा या फिर नया इतिहास रचा जाएगा।












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