लोकसभा चुनाव 2019- फैजाबाद लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की फैजाबाद लोकसभा सीट से भाजपा के लल्लू सिंह सांसद हैं, साल 2014 में बीजेपी ने ये सीट सपा को हराकर अपने नाम की थी। अवध विश्वविद्यालय के लिए मशहूर फैजाबाद शुरू से ही धर्म और राजनीति दोनों के केंद्र में रहा है, अयोध्या की वजह से ही फैजाबाद हमेशा से नेशनल न्यूज की हेडलाइन में शामिल रहता है। यहां शायद ही कोई चुनाव ऐसा हुआ हो जिसमें राम मंदिर का मुद्दा न उठा हो। वैसे फैजाबाद धर्मनगरी के अलावा शिक्षा का भी केंद्र रहा है, 1975 से स्थापित अवध यूनिवर्सिटी और कुमारगंज की कृषि यूनिवर्सिटी इनमें प्रमुख है, यहां की औसत साक्षरता दर 68.73% है, हालांकि यहां विकास की गति धीमी ही है।

इस लोकसभा क्षेत्र में उतरप्रदेश विधानसभा की पांच विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं दरियाबाद, बीकापुर, रुदौली, अयोध्या और मिल्कीपुर, जिसमें मिल्कीपुर की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 1957 में इस सीट पर पहली बार आम चुनाव हुए थे , 1971 तक हुए सभी आमचुनाव कांग्रेस ने जीते, 1977 में कांग्रेस के विजय रथ को रोका भारतीय लोकदल के अंतराम जयसवाल ने, जिन्होंने यहां जीत का परचम फहराया लेकिन 1980 और 1984 दोनों ही चुनावों में कांग्रेस का ही बोलबाला रहा और 1989 में कम्युनिस्ट पार्टी के मित्र सेन ने इस सीट पर कब्ज़ा किया। 1991 में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के विनय कटियार ने यहां जीत दर्ज की, 1996 में भी विनय कटियार यहां से सांसद चुने गए थे लेकिन 1998 के चुनावों में सपा के हाथों विनय कटियार को हार का सामना करना पड़ा लेकिन कटियार ने 1999 का चुनाव जीतकर फिर से यहां वापसी की, 2004 में बसपा और 2009 में कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की लेकिन साल 2014 का चुनाव यहां बीजेपी ने जीता और लल्लू सिंह यहां से सांसद चुने गए।
सांसद लल्लू सिंह संसाधन सम्बन्धी मामलों की स्थाई समिति के सदस्य भी हैं, पिछले 5 सालों के दौरान इन्होंने लोकसभा की 21 डिबेट में हिस्सा लिया है और 267 प्रश्न पूछे हैं और सदन में इनकी उपस्थिति 93 प्रतिशत रही है, यूपी के चर्चित शहरों में से एक फैजाबाद की 84 प्रतिशत आबादी हिंदू और 14 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम है, साल 2014 के चुनाव में 1738701 वोटरों ने हिस्सा लिया था, जिसमें 53 प्रतिशत पुरुष और 46 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं, उस साल यहां पर नंबर 2 पर सपा, नंबर 3 पर बसपा और नंबर 4 पर कांग्रेस थी।












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