राहुल गांधी की अयोग्यता विवाद: कर्नाटक चुनाव जीतकर 'मोदी सरकार' को जवाब देना चाहती हैं प्रियंका गांधी!

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा,''मैं सच बोलता हूं,ये बात मेरे खून में है। ये मेरे जीवन की तपस्या है और मैं यह करता जाऊंगा। मैं किसी से डरता नहीं हूं।''

Priyanka Gandhi

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द होने से कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट के इस फैसले के बाद ये चर्चा हो रही है कि कुछ ही महीनों में होने वाली कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में इसका क्या असर पड़ने वाला है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर ये भी लिखा है कि राहुल गांधी के अयोग्य होने पर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की जिम्मेदारियां बढ़ जाएंगी। लेकिन प्रियंका गांधी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को कर्नाटक चुनाव जीतकर जवाब देना चाहती हैं। कांग्रेस ने कहा है कि इस लड़ाई को वो आगे जारी रखेंगे।

प्रियंका ने कहा- हम चुनाव जीतकर देंगे जवाब

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार की शाम एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक के दौरान कई कार्ययोजनाएं बनाई गईं। इस बैठक में मौजूद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बीजेपी को करारा जवाब देने का सुझाव भी रखा। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में प्रियंका गांधी वाड्रा ने बीजेपी को करारा जवाब देने का सुझाव देते हुए कहा कि कांग्रेस को इस साल कर्नाटक विधानसभा चुनाव जीतने पर ध्यान देना चाहिए। हमें मोदी सरकार को कर्नाटक चुनाव जीतकर जवाब देना चाहिए।

प्रियंका गांधी बोलीं- हम पीछे नहीं हटने वाले हैं, हम लड़ेंगे

प्रियंका गांधी ने कहा, ''राहुल गांधी की अयोग्यता इसलिए हुई है क्योंकि उन्होंने अडानी का मुद्दा उठाया था। मेरे भाई राहुल इस स्थिति से लड़ेंगे और उसपर काबू पा लेंगे। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि मेरे भाई ने अडानी का मुद्दा उठाया था। यह सरकार अडानी के मसले पर जवाब नहीं देना चाहती। हमारे शरीर में शहीदों का खून है। जिस खून को आप बार-बार परिवारवादी कहते हैं। यह खून इस देश के लिए बहाया गया है। हम पीछे नहीं हटने वाले हैं, हम लड़ेंगे।"

बैठक के दौरान और क्या-क्या हुआ?

सूत्रों के मुताबिक एक सांसद ने बैठक में यह भी सुझाव दिया कि राहुल गांधी की अयोग्यता के विरोध में कांग्रेस के सभी सांसदों को सामूहिक इस्तीफा दे देना चाहिए। एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस मामले में अगले कदम पर चर्चा करने के लिए एक समिति का गठन किया जा सकता है।

कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि यह कदम लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "हमारे सामने मुद्दा कानून से बड़ा राजनीतिक का हो गया है। यह एक राजनीतिक मुद्दा है क्योंकि यह सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश है।''

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