प्रियंका गांधी ने छोड़ा दिल्ली का सरकारी बंगला, इसी महीने खाली करने का मिला था नोटिस
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी नेता प्रियंका गांधी वाड्रा गुरुवार को अंततः नई दिल्ली के लुटियन जोन में स्थित सरकारी बंगले को खाली कर दिया है। पिछले साल एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने के बाद सरकार ने नोटिस जारी कर उन्हें सरकारी बंगला खाली करने का आदेश दिया था, क्योंकि एसपीजी सुरक्षा हटने के बाद वो सरकारी बंगले की हकदार नहीं रह गईं थी। उन्हें 35, लोधी एस्टेट स्थित बंगले को 1 अगस्त तक खाली करने को कहा था।
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जुलाई महीने की शुरुआत में सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस मिला
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने जुलाई महीने की शुरुआत में सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस मिला था। नोटिस मिलने के बाद बंगले से जुड़े सभी बकाया राशि का भुगतान भी प्रियंका गांधी ने अदा कर दिया है। सरकारी बंगला खाली करने के लिए जारी एक सरकारी आदेश में कहा गया था कि चूंकि उनकी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) सुरक्षा हटाई जा चुकी है, इसलिए वह नियम के मुताबिक बंगले की हकदार नहीं रही हैं।

एसपीजी सुरक्षा वापस लेने के बाद सरकारी बंगले की हकदार नहीं रह गईं थी
गत एक जुलाई को जारी आदेश के अनुसार, एसपीजी सुरक्षा वापस लेने और जेड प्लस सुरक्षा प्रदान किए जाने के आधार पर आपके लिए किसी भी सरकारी आवास के आवंटन का प्रावधान नहीं है। ऐसे में टाइप 6 बी हाउस नंबर 35, लोधी एस्टेट का आवंटन रद्द किया जाता है। मंत्रालय के आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर वह अगले महीने में आवास खाली नहीं करती हैं, तो फिर उन्हें नियमों के मुताबिक किराया अथवा क्षतिपूर्ति का भुगतान करना होगा।

प्रियंका गांधी का सरकारी बंगला बीजेपी सांसद अनिल बलूनी को दिया गया
रिपोर्ट के मुताबिक प्रियंका गांधी द्वारा खाली किए गए सरकारी बंगले को बीजेपी के राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी को दिया गया है। अनिल बलूनी को बंगला दिए जाने के बाद प्रियंका गांधी ने उन्हें परिवार के साथ चाय पर भी बुलाया था। हालांकि बलूनी ने अपनी सेहत का हवाला देते हुए प्रियंका गांधी के चाय आमंत्रण का अस्वीकार कर दिया था।

पिछले साल गांधी परिवार के तीनों सदस्यों की SPG सुरक्षा वापस ले गई थी
केंद्र सरकार ने पिछले साल नवंबर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली थी। इसके बाद उन्हें सरकार की ओर से जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। यह फैसला एसपीजी सुरक्षा को लेकर किए गए संशोधन के बाद सामने आया था, जिसमें एसपीजी सुरक्षा अब तत्कालीन प्रधानमंत्री तक ही सीमित कर दी गई है।












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