थाली से दूर न हो दाल, एक्शन में आई केंद्र सरकार, जानें किस तरह से बरते जा रहे हैं एहतियात?
दलहन की कीमतें फिर से बढ़ने लगी थीं। आशंका है कि कारोबारियों और निर्यातकों की मिलीभगत की वजह से यह हो रहा था। लेकिन, सरकार ने दखल दिया है तो असर भी नजर आ रहा है।

दलहन की कीमतों को नियंत्रिण में रखने के लिए केंद्र सरकार ने कारोबारियों से इसके आयात में तेजी लाने को कह दिया है। दरअसल, इस वर्ष रबी की फसल के दौरान विपरीत मौसम के कारण दलहन का घरेलू उत्पादन कम रहने की आशंका है। इसलिए सरकार ने तूर और उड़द की आयात में तेजी लाने के लिए कहा है।

सरकार ने दलहन निर्यातकों को दी चेतावनी
सरकार ने म्यांमार के निर्यातकों से भी कहा है कि वह दलहन को रोक कर न रखें, अन्यथा अंजाम भुगतने को तैयार रहें। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने म्यांमारी निर्यातकों को चेताया है कि यदि वह जानबूझकर स्टॉक रिलीज करने में देरी कर रहे हैं तो इसके पास सीधे सरकारी स्तर पर कॉन्ट्रैक्ट के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

कृत्रिम किल्लत पैदा करने की साजिश?
दरअसल, ऐसा संदेह है कि दलहन के कुछ आयातक और म्यांमारी निर्यातक आपस में साठगांठ करके घरेलू बाजारों में कृत्रिम तरीके से कीमतें बढ़ाने के लिए इसे रिलीज करने में देरी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मंत्रालय के सचिव रोहित कुमार सिंह ने इस मामले में जब खुद दखल दिया है, उसके बाद इसका असर भी नजर आ रहा है।

सरकार की सख्ती के बाद कम हुए भाव
मसलन, तूर दाल के कारोबार के लिए मशहूर महाराष्ट्र के लातूर मंडी में गुरुवार को इसकी कीमतों में प्रति क्विंटल 200 रुपए की गिरावट भी दर्ज की गई है। अब यहां यह 8,700 रुपए बिक रहा है। जबकि इस सीजन के लिए तूर दाल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6,600 रुपए प्रति क्विंटल रखा गया है।

भारत ने वित्त वर्ष 2022 में 0.84 मीट्रिक टन और वित्त वर्ष 2023 में 0.89 मीट्रिक टन तूर का आयात किया। जबकि इन्हीं वर्षों में उड़द का आयात क्रमश: 0.51 मीट्रिक टन और 0.61 मीट्रिक टन रहा। बता दें कि एक साल पहले के मुकाबले तूर की कीमत मार्च 2023 में 11.61% और उड़द की 3.15% ज्यादा हो गई था।
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इस सीजन में क्या है उत्पाद का लक्ष्य?
मार्च में ही तूर के स्टॉक पर निगरानी रखने के लिए एक समिति बनाई गई थी, जिसे आयातकों, मिलों, स्टॉकिस्ट और कारोबारियों पर नजर रखती। कृषि मंत्रालय ने साल 2022-23 में (जुलाई-जून) के सीजन में तूर के उत्पादन का लक्ष्य 3.7 मीट्रिक टन और उड़द का 2.68 मीट्रिक टन रखा है।

खराब मौसम की वजह से कम उत्पादन की आशंका
हालांकि, कारोबारी सूत्रों का अनुमान है कि बेमौसम बरसात और मौसम का साथ नहीं देने की वजह से इसके उत्पादन पर असर पड़ा है और तूर का कुल उत्पादन 2.7 से 2.8 मीट्रिक टन तक रह सकता है।

सरकार पहले भी कारोबारियों को दे चुकी है चेतावनी
इस साल पहले भी उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने दलहन की खेप में जानबूझकर देरी करने को गंभीरता से लिया था और चेतावनी दी थी कि जो कारोबारी जानबूझकर ऐसा करेंगे तो उनको परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।

म्यांमार के साथ हुआ है दलहन की आयात का करार
इसके बाद आयात में काफी तेजी दर्ज की गई थी। बता दें कि पिछले साल भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय करार हुआ था, जिसके तहत भारत को साल 2021-22 और 2025-26 के बीच उससे सालाना 0.25 मीट्रिक टन उड़द और 0.1 मीट्रिक टन तूर का आयात करना है।

तीन साल में दलहन के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य
देश ने वित्त वर्ष 2022 में करीब 2 मीट्रिक टन दलहन का आयात किया था। अनुमानों के अनुसार देश हर साल अपनी दलहन की खपत का 15% आयात पर ही निर्भर है। वैसे सरकार की योजना है कि अगले तीन वर्षों में देश दलहन के लिए पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाए।
कृषि मंत्रालय ने फसल साल 2022-23 के लिए रिकॉर्ड 27.81 मीट्रिक टन दलहन के उत्पादन का अनुमान लगा रखा है।












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